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साहसी और ठोस निर्णयों द्वारा ही सपनों को साकार किया जा सकता है

In Church on April 25, 2016 at 2:55 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 25 अप्रैल 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं के लिए करुणा की जयन्ती के अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 24 अप्रैल को समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया तथा स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया।

ख्रीस्तयाग प्रवचन में उन्होंने कहा,

प्रिय युवा मित्रो, जीवन के इस चरण में स्नेह प्रदर्शन करने और स्नेह पाने की प्रबल इच्छा होती है। यदि आप प्रभु को शिक्षा देने की अनुमति दें तो वे आपको कोमलता एवं स्नेह का अधिक सुगम रास्ता दिखायेंगे। वे हमारे हृदय को, न तो दूसरों के द्वारा अधिकार किये जाने और न ही दूसरों पर अधिकार करने बल्कि स्वतंत्रता का रास्ता दिखायेंगे। अधिक सुख प्राप्ति की चाह में हमारे प्यार को स्वाभाविक इच्छा द्वारा भ्रष्ट होने का झुकाव हमेशा बना रहता है और हमारी उपभोक्तावादी संस्कृति द्वारा इस झुकाव को बल मिलता है। फिर भी, यदि हम किसी चीज को दृढ़ता पूर्वक पकड़े होते हैं तो यह झुकाव मुरझाता और मर जाता है और हम अपने अंदर उलझन और खालीपन का एहसास करते हैं किन्तु जब हम प्रभु की आवाज सुनेंगे तो वे प्रेम के रहस्य को प्रकट करेंगे। यह रहस्य है दूसरों की चिंता करना, उनका सम्मान करना, उनकी रक्षा करना तथा उनका इंतजार करना।

संत पापा ने युवाओं से कहा कि जीवन के इस दौर में आप स्वतंत्रता की कामना करते हैं। कई लोग सलाह देते हैं कि स्वतंत्रता का अर्थ हम जो चाहें वही करें किन्तु आपको इन्कार कर सकना चाहिए। स्वतंत्रता का अर्थ ऐसा नहीं है कि मैं जो चाहता हूँ वही करुँ। ऐसा करने से हम आत्मकेंद्रित एवं एकाकी हो जाते हैं तथा यह हमें खुला होने और मित्रों के प्रति वफादार बनने से रोकता है।

वास्तव में, स्वतंत्रता अच्छाई का चयन कर पाने की क्षमता है। स्वतंत्र व्यक्ति वही है जो अच्छाई तथा ईश्वर को प्रसन्न करने वाली चीजों का चुनाव करने की क्षमता रखता है, ऐसे अवसरों पर भी जब उसके लिए उसे प्रयत्न करना पड़े।

संत पापा ने कहा कि साहसी और ठोस निर्णयों द्वारा ही हमारे महान सपनों को साकार किया जा सकता है जो हमारे सम्पूर्ण जीवन को सार्थक कर दे। संत पापा ने युवाओं को मेहनत करने का प्रोत्साहन देते हुए कहा कि वे सामान्य जीवन से संतुष्ट न रहे, प्रवाह के साथ बहने एवं आराम की जिंदगी से संतोष न कर लें। उन लोगों पर विश्वास न करें जो यह कहते हुए वास्तविक खजाने से भटकाते हैं कि यदि आपके पास बड़ी सम्पति है तभी आपका जीवन सुन्दर हो सकता है। उन लोगों पर विश्वास न करें जो आपको यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि आप सिर्फ तभी महत्वपूर्ण व्यक्ति बन सकते हैं जब आप फिल्म के नायकों के समान अभिनय करें अथवा नवीनतम फैशन के कपड़े पहनें। उन्होंने कहा, ″आपके आनन्द की कोई कीमत नहीं है। इसे खरीदा नहीं जा सकता है यह कोई ऐप भी नहीं है जिसको अपने मोबाईल पर डाऊनलोड किया जा सके और न ही कोई नवीनतम अपडेट है जो स्वतंत्रता एवं प्रेम की शोभा बढ़ा सके। यह इसलिए क्योंकि प्रेम मुफ्त वरदान है जो एक उदार हृदय की मांग करता है। यह एक महान जिम्मेदारी है जो जीवन भर बना रहता है। यह उन लोगों के लिए दैनिक कर्तव्य है जो बड़े सपने देखते हैं।

प्रेम निष्ठा, सम्मान तथा क्षमाशीलता द्वारा पोषित होता है। प्रेम इससे उत्पन्न नहीं होता कि हम इसके विषय में बातें करते बल्कि उसे जीने से। यह कोई मधुर कविता नहीं है जिसको पढ़ा और याद किया जाए किन्तु यह जीने हेतु जीवन भर का एक चुनाव है।

संत पापा ने प्रश्न किया कि प्रेम में हम किस तरह प्रगाढ़ हो सकते हैं? येसु के साथ प्रेम में बढ़ने का रहस्य है यूखरिस्त बलिदान में भाग लेना जहाँ वे हमें अपने आपको प्रदान करते हैं। हमें मेल-मिलाप संस्कार द्वारा क्षमा एवं शांति प्रदान करते हैं। यहीं पर हम प्रेम करना सीखते हैं, उसे अपना बनाना तथा दुनिया को देना सीखते हैं।

संत पापा ने सच्चा प्रेम करने हेतु येसु से सहायता मांगने की सलाह दी और कहा, ″जब प्यार करना कठिन जान पड़े, जब दूसरों की गलतियों को न कहने में कठिनाई महसूस हो, तब हम क्रूस पर टंगे येसु को देखें, उनके क्रूस का चूम्बन करें तथा उस अवसर को हाथ से जाने न दें। वे आपको प्रेम की प्रगाढ़ता की ओर बढ़ने हेतु प्रेरित करते तथा हमें सम्भालते हैं जब हम गिरने लगते।

संत पापा ने युवाओं को अच्छाईयों में बढ़ते हुए भविष्य निर्माण करने का परामर्श देते हुए कहा, ″मैं जानता हूँ कि आप मित्रता निभाने एवं अच्छाईयों को अपनाने में सक्षम हैं। इसी के द्वारा आप भविष्य निर्माण हेतु बुलाये गये हैं दूसरों के साथ, दूसरों के लिए किन्तु दूसरों के विरूद्ध कभी नहीं। आप अनोखे कार्य सम्पन्न कर सकते हैं, बशर्ते, कि आप इसकी अच्छी तैयारी करें। इसका शुरूआत अभी ही करें, अपनी जवानी के सभी वरदानों को जीते हुए कठिन परिश्रम करने से न डरें। खेल के कप्तान के समान बनें जो अपना उद्देश्य ऊँचा रखते हुए हर रोज मेहनत और अभ्यास करता है। आपके दैनिक कार्य दया से पूर्ण हों। उत्साह पूर्वक उसका अभ्यास करें जिससे कि आप जीवन के कप्तान बन सकें। इस तरह आप येसु के शिष्य के रूप में पहचाने जायेंगे तथा आपका आनन्द पूर्ण हो जायेगा।


(Usha Tirkey)

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