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धर्माध्यक्षों की भूमिका लोगों को विश्वास में बढ़ने हेतु मदद देना है

In Church on April 26, 2016 at 3:02 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 26 अप्रैल 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने लातीनी अमरीका के लिए परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल मार्क क्वेलेत को एक पत्र प्रेषित कर, ″सार्वजनिक जीवन में लोकधर्मियों के मूलभूत समर्पण″ पर आधारित सभा की बातों का स्मरण दिलाते हुए उनके प्रेरितिक कार्यों की याद दिलायी।

ज्ञात हो कि लातीनी अमरीका के लिए परमधर्मपीठीय समिति की आम सभा 1 से 4 मार्च तक बोलोन्या स्थित प्रेरितिक भवन में सम्पन्न हुई थी जिसकी विषयवस्तु थी लातीनी अमरीकी देशों में ″सार्वजनिक जीवन में लोकधर्मियों के मूलभूत समर्पण″। सदस्यों ने सभा के अंत में 4 मार्च को संत पापा से मुलाकात की थी।

कार्डिनल अर्मन्ड मार्क क्वेलेत को लिखे पत्र में संत पापा ने कहा, ″मैं स्मरण दिलाना चाहता हूँ कि जो कुछ सभा में विचार किया गया था उसपर चिंतन जारी रखें ताकि ईश्वर की पवित्र प्रजा की बेहतर सेवा हेतु मदद करने का प्रोत्साहन देने वाले पवित्र आत्मा की प्रेरणा बहरों के कानों न पड़े।″

संत पापा ने धर्माध्यक्षों एवं विश्वासियों के बीच गहरे संबंध को बतलाते हुए कहा, ″ईश्वर की पवित्र प्रजा ही हैं जिनके लिए हम चरवाहे उनकी देखभाल करने, उनकी रक्षा करने, उनका साथ एवं समर्थन देने तथा सेवा करने के लिए निरन्तर बुलाये जाते हैं। जिस तरह संतान हीन व्यक्ति, एक अच्छा मजदूर, पेशेवर, पति तथा मित्र होने के बावजूद एक पिता नहीं कहला सकता, उसी तरह, विश्वासी समुदाय के बिना धर्माध्यक्षों का अस्तित्व नहीं है जो सेवा के लिए बुलाये जाते हैं।″

संत पापा ने कहा कि एक धर्माध्यक्ष लोगों का चरवाहा होता है तथा लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करता है। वह कभी राह दिखलाने हेतु लोगों के आगे चलता तो कभी उनके पीछे, ताकि एक भी व्यक्ति पीछे न छूट जाए। अतः संत पापा ने चरवाहों को लोगों के जीवन में सहभागी होने की सलाह दी।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को याद दिलाया कि कलीसिया के सभी सदस्य एक समान हैं चाहे वे याजक हों अथवा लोकधर्मी क्योंकि सभी को एक ही बपतिस्मा प्राप्त हुआ है और धर्माध्यक्ष बनने के पूर्व वे भी एक लोकधर्मी थे। उन्होंने कहा, ″हमारा प्रथम और मूल समर्पण बपतिस्मा में है क्योंकि किसी ने भी एक पुरोहित अथवा धर्माध्यक्ष के रूप में बपतिस्मा प्राप्त नहीं किया है।″

संत पापा ने प्रेरिताई के दौरान धर्माध्यक्षों को दो चीजों की याद रखने का परामर्श दिया, येसु तथा पूर्वज। उन्होंने कहा कि पूर्वजों की याद इसलिए किया जाना चाहिए क्योंकि हम सभी ने उन्हीं के द्वारा विश्वास के वरदान को प्राप्त किया। वे हमारे घरों में ख्रीस्त के साक्षात् यादगार हैं जिन्होंने हमें प्रार्थना करना, प्रेम करना तथा विश्वास को जीना सिखाया। उन्होंने कहा कि जब लोगों को विश्वास से अलग किया जाता है तब उन्हें बपतिस्मा की पहचान से अलग कर दिया जाता है और उन्हें कृपा एवं पवित्र आत्मा से भी वंचित कर दिया जाता है।

संत पापा ने कहा कि चरवाहों की भूमिका और उनका आनन्द, लोगों को विश्वास में बढ़ने हेतु मदद एवं प्रोत्साहन देने में है।


(Usha Tirkey)

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