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भूकम्प के एक साल, कार्डिनल ताग्ले ने किया नेपाल दौरा

In Church on April 26, 2016 at 2:59 pm

नेपाल, मंगलवार, 26 अप्रैल 2016 (वीआर अंग्रेजी): नेपाल में विनाशकारी भूकम्प के एक साल पूरा होने पर अंतरराष्ट्रीय कारितास के अध्यक्ष कार्डिनल लुईस ताग्ले ने काठमाण्डु की यात्रा कर वहाँ के लोगों से मुलाकात की तथा तीन दिवसीय कारितास सभा में भाग लिया।

गत वर्ष आये विनाशकारी भूकम्प ने करीब 9,000 लोगों की जानें ले ली थी तथा लाखों लोगों को आवासहीन कर दिया था किन्तु कारितास नेपाल द्वारा आपातकालीन स्थिति के मामले में सबसे आगे किये जाने तथा लोगों के लगातार मदद द्वारा अब काफी सुधार हो रहा है। कारितास नेपाल इस समय पुनर्निर्माण के कार्यों में संलग्न है तथा अन्य कारितास सदस्यों की सहायता से विकास के दीर्घकालीन कार्यों की योजना बना रही है।

वाटिकन सूत्रों के अनुसार बीते 12 महिनों में कलीसिया ने लाखों लोगों को मदद पहुँचायी है किन्तु अब भी बहुत कुछ करना बाकी है तथा पुनर्निर्माण के कार्य की गति बहुत धीमी है।

कार्डिनल ताग्ले ने वाटिकन रेडियो से कहा, ″हम यहाँ विनाशकारी और घातक भूकम्प जिसने एक साल पहले इस सुन्दर देश को नष्ट कर दिया उसकी यादगारी मनाने हेतु कारितास फेडेरेशन के रूप में उपस्थित हैं।″

उन्होंने कहा कि इस दौरा का मुख्य केंद्र बिन्दु है एकात्मता प्रदर्शित करना। यह निश्चय ही सहानुभूति पूर्ण है तथा विभिन्न कारितास सदस्यों एवं संगठनों को देखने का अवसर मिल रहा है जो अपने प्रेम एवं सेवा का भाव प्रकट कर रहे हैं। वे प्रेम के दृश्यमान चिन्ह हैं जो निश्चय ही आशा प्रदान करता है।

कार्डिनल ने कहा कि रास्तों पर भूकम्प के स्पष्ट चिन्ह देखे जा सकते हैं। लोग अब भी अपने जीवन के पुनः निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने कलीसिया के उदारता संगठन कारीतास के बारे में कहा कि उन्हें देखना सचमुच प्रेरणादायक है कि वे किस तरह प्रेम से कार्य कर रहे हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग न केवल मदद एवं तात्कालिक सहायता पहुँचा रहे हैं किन्तु उनका उत्साह एवं उनकी सेवा भावना, मात्र नेपाल की कलीसिया के लिए नहीं वरन मानवता की सेवा है।

उन्होंने नेपाल के लोगों के बारे बतलाते हुए कहा कि उनके चेहरों पर अब मुस्कान देखे जा सकते हैं। यद्यपि उन्होंने दुःख झेला किन्तु उनमें मानवता है। उनमें एक सच्चा आनन्द देखा जा सकता है जो आशा का चिन्ह है, खुद के लिए नहीं किन्तु अपने बच्चों के भविष्य की आशा।


(Usha Tirkey)

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