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ख्रीस्तीय आशा में दुःख की अनुभूति जीवन में खुशी का द्वार खोलती है

In Church on May 7, 2016 at 7:28 am

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 मई 2016 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि ख्रीस्तीय दुःख से स्तब्ध नहीं वरन् ईश्वर में इस विश्वास के साथ जीते हैं कि वे उसे खुशी प्रदान करेंगे जिसे कोई नहीं छीन सकता।
संत पापा ने साप्ताहिक पाठों से लिये गये सुसमाचार पर मनन करते हुए कहा कि आज के सुसमाचार में येसु अपने दुःखभोग के पहले अपने शिष्यों को आगाह कहते है यद्यापि वे दुःखित हो जायेंगे तथापि उनका यह दुःख आनन्द में परिणत हो जायेगा। वे उस स्थिति की तुलना नारी के प्रसव की स्थिति से करते हुए कहते हैं, “प्रसव का समय आने पर वह वेदना के दौर से होकर गुज़रती लेकिन जब वह शिशु को जन्म देती तो वह अपनी वेदना को भूल जाती है।”

उन्होंने कहा हमारे जीवन में भी यही होता है। जब हम मुसीबतों के दौर से हो कर गुजरते, जब हम तकलीफों में होते तो हमें कष्ट होता है किन्तु खुशी और आशा में जीना, जीवन में खुशी के नये द्वारों को खोलती और नया फल लेकर आती है। येसु के द्वारा कठिनाईयों का यह चित्रण हमारे विश्वास को आतंकित कर देती हैं किन्तु खुशी और आशा में हम आगे बढ़ते है क्योंकि तूफान के बाद एक नया व्यक्ति का जन्म होता है जैसा कि नारी की पीड़ा के बाद एक शिशु का जन्म होता है। येसु कहते है कि ये ही खुशी और आशा हमारे जीवन में बने रहते हैं और ये कभी समाप्त नहीं होते।

संत पापा ने कहा कि हमारी खुशी और आशा साधारण खुशी और आशा नहीं है क्योंकि इन्हीं के द्वारा माता कलीसिया का विस्तार होता है। येसु हमें से कहते हैं कि हमारे जीवन में तकलीफ़ें होंगी। खुशी और आशा त्यौहार नहीं लेकिन एक सिक्के के दो पहलू के समान हैं। खुशी हमारे लिए सुदृढ़ आशा है और आशा खुशी में फलता-फूलता है। इस तरह यह सदैव चलता रहता है। ये ख्रीस्तीय सदगुण हैं। खुशी अपने में बन्द नहीं है आशा इसे बाहर निकालती है।

संत पापा ने कहा कि मानवीय खुशी किसी भी चीज से अथवा कठिनाई से समाप्त हो सकती है किन्तु येसु हमें वह खुशी देना चाहते हैं जिसे कोई नहीं ले सकता है, जीवन के अति अंधकारमय क्षणों में भी। येसु के स्वर्गारोहण में यही होता है। येसु स्वर्ग की ओर आरोहित कर लिए गये और चेले एकटक उनकी ओर उदासी से निहारते रहे लेकिन स्वर्ग दूतों ने उन्हें उत्साह प्रदान किया। संत लूकस रचित सुसमाचार हमें बतलाता है, “वे आनन्द से परिपूर्ण लौट आये।” उन्होंने कहा, “यह ज्ञान की खुशी है कि हमारी मानवता पहली बार स्वर्ग में प्रवेश कर गई है। येसु के साथ रहने और उसे पाने की आशा माता कलीसिया में खुशी का कारण बनती है।” संत पापा ने यह कहते हुए अपने प्रवचन का अन्त किया कि येसु हमें वह खुशी प्रदान करें, जो दृढ़ आशा की अभिव्यक्ति हो और जिसे कोई नहीं छीन सकता हैं।


(Usha Tirkey)

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