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लाज़रूस और धनवान व्यक्ति के दृष्टान्त पर मनन

In Church on May 18, 2016 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 18 मई 2016, (सेदोक, वी.आर.) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को, धर्मग्रन्थ पर आधारित ईश्वर की करुणा विषय पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ते हुए इतालवी भाषा में  कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात,

मैं आप लोगों के साथ आज लाज़रूस और धनवान व्यक्ति के दृष्टान्त पर मनन करना चाहता हूँ। इन दोनों व्यक्तियों की जिन्दगी समांतर मार्ग पर चलती हैं लेकिन उनके जीवन की परिस्थितियाँ एक दूसरे के विपरीत हैं जो एक दूसरे से मेल नहीं खाती है। धनवान व्यक्ति का द्वार गरीब के लिए सदैव बंद रहता है। वह बाहर पड़े रहता और धनी व्यक्ति की मेज में जो कुछ बचाता उसे पाने की कोशिश करता है। धनवान मख़मली वस्त्र पहनता जबकि लाज़रूस मवादों से भरा रहता था। वह रोज दिन दवातें उड़ाया करता लेकिन लाज़रूस दाने-दाने को मोहताज रहता। केवल कुत्ते उसकी चिंता करते जो आकर उसकी घावों को चाटते थे। यह दृश्य हमें न्याय के दिन ईश पुत्र के कठोर वचनों की याद दिलाते हैं, “मैं भूखा था और तुमने मुझे नहीं खिलाया, मैं प्यासा था और तुमने मुझे नहीं पिलाया, मैं नंगा था और तुमने मुझे नहीं पहनाया। (मती.25.24-43) लाजरूस ग़रीबों की शांतिपूर्ण कराह और दुनिया के विरोधाभास स्थिति का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ धन का विशाल भाग और उसके स्रोत कुछेक के हाथों सीमित हो कर रह गये हैं।

येसु कहते हैं कि एक दिन धनवान मर गया और इब्राहीम को पिता के नाम से पुकारते हुए विनय करता है।(24.27) इस तरह वह उसके पुत्र होने का दावा करता है जिसका संबंध ईश्वर के लोगों से है। संत पापा ने कहा कि लेकिन उसने दुनिया में रहते वक्त ईश्वर की चिन्ता नहीं की वरन् अपने को सारी चीजों का मालिक मान विलासिता और बर्बादी की दुनिया में बंद किये रखा। उसने लाजरूस का तिरस्कार कर न तो ईश्वर की चिंता की और न ही उनके नियमों का ध्यान रखा। गरीबों का तिरस्कार करना ईश्वर को तुच्छ समझना है। यह दृष्टान्त हमारा ध्यान इस बात की ओर विशेष रूप से करता है कि धनवान व्यक्ति के नाम का कोई अर्थ नहीं है जबकि गरीब जिसकी पुनरावृत्ति “लाजरूस” के रूप में पाँच बार हुई है जिसका अर्थ है “ईश्वर सहायता करते हैं”। लाजरूस जो धनी व्यक्ति के द्वार के सामने पड़ा रहा हमें इस बात की याद दिलाता है कि धनी को ईश्वर की याद करनी है लेकिन धनी इस शिक्षा को ग्रहण नहीं करता। अतः वह दण्डित किया जायेगा अपने धन के कारण नहीं किन्तु अपनी करुणा, लाज़रूस को नहीं दिखाने और उसे नहीं बचाने के कारण।

दृष्टान्त के दूसरे भाग में लाज़रूस और धनवान की मृत्यु है जहाँ परिस्थिति बदल जाती है। लाज़रूस को स्वर्ग दूत उठा कर स्वर्ग में इब्राहीम के पास ले जाते हैं जबकि धनी यंत्रणा सहता है। धनी व्यक्ति अपनी आँखें ऊपर उठाकर इब्राहीम को देखता और उसकी गोद लाज़रूस को। ऐसा प्रतीत  होता है कि वह लाज़रूस की ओर पहली बार देखता है। वह कहता है, “पिता इब्राहीम मुझ पर दया कीजिए और लाज़रूस को मेरे पास भेज दीजिए जिससे वह अपनी अंगुली का सिरा पानी में भिगो कर मेरी जीभ ठंडी करे क्योंकि मैं इस ज्वाला में तड़प रहा हूँ। अब धनी व्यक्ति लाज़रूस को पहचानता और उसकी मदद माँगता है जबकि जीवन मैं उसने उसे कभी देखने की जुर्रत नहीं की। वह उसे अपनी मेज के टुकड़ों को भी देना नहीं चाहा लेकिन वह अभी उससे प्यास बुझाने की माँग कर रहा है। वह अब तक अपने बीते जीवन के अधिकारों का दावा करता है। उसके अनुरोध को पूरा करने की अंसभावनाओं का जिक्र करते हुए इब्राहीम सम्पूर्ण कहानी के सार के बारे में कहते हैं कि अच्छाई और बुराई दोनों का वितरण दुनिया के अन्याय की क्षतिपूर्ति हेतु की गई है और द्वार जो गरीबों को धनियों के अलग करता वह बृहद् है। जब लाज़रूस धनी के द्वार पर था तो उससे मुक्ति हेतु अवसर प्राप्त था लेकिन अब जब दोनों मर गये हैं तो स्थिति असंशोधनीय है। ईश्वर प्रत्यक्ष रुप में हम से नहीं मिलते लेकिन दृष्टान्त हमें स्पष्ट रुप से चेतावनी देते हैं कि ईश्वर की दया हमारे पड़ोसियों से हमारे संबंध के रुप में आती है और यदि इसकी कमी होती तो कोई हमारे हृदय  में प्रवेश नहीं करता।

संत पापा ने कहा कि इस परिस्थिति में धनवान को अपने भाइयों की याद आती है जिनकी दुर्गति भी उसके समान होने को है अतः वह लाजरूस से निवेदन करता है कि वह उनके पास जाये और उन्हें चेतावनी दे। लेकिन इब्राहीम उत्तर में कहते हैं, “मुसा और नबियों की पुस्तकें उनके पास है वे उनकी सुने।” संत पापा ने कहा कि जीवन में परिवर्तन लाने हेतु हम चमत्कारों की आशा न करें लेकिन ईश्वर के वचनों पर ध्यान दें जो हमें अपने पड़ोसियों को प्रेम करने का निमंत्रण देता है। ईश्वर के वचन हमारे मुरझाये जीवन को सजीव बना सकते और हमारा अंधापन दूर करते हैं। धनवान मनुष्य को ईश्वर का वचन पता था लेकिन उसने उसे नहीं सुना जिसके कारण उसने अपनी आँखें नहीं खोली और गरीब पर दया नहीं दिखलाई। कोई संदेशवाहक और कोई भी संदेश गरीब का स्थान नहीं ले सकता जिससे हमारी मुलाकात रास्ते पर होती है। “जो कुछ तुमने मेरे इन भाइयों में से किसी एक के लिए किया, वह मेरे लिये किया।” (मती.25,40) अतः दृष्टान्त में चर्चित बदलता भाग्य में हमारे मुक्ति का गुप्त रहस्य है जिसके द्वार करुणा में येसु हम से मिलते हैं। सुसमाचार के इस अंश को सुनते हुए आइये हम दुनिया के गरीबों से मिलकर माता मरिया से साथ गायें, “उसने शक्तिशालियों को उनके आसनों से गिरा दिया है और दीनों को महान् बन दिया है। उसने दरिद्रों को सम्पन्न किया और धनियों को खाली हाथ लौटा दिया हैं।” (लूक. 1.52-53)
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थ यात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन करते हुए कहा,

मैं अँग्रेज़ी बोलने वाले तीर्थयात्रियों का जो इस आमदर्शन समारोह में भाग लेने आये हैं, विशेषकर इंग्लैण्ड, आयलैण्ड, माल्टा, रूस,  स्लोवानिया, भारत, हाँग काँग, इन्डोनेशिया, जपान, कनाडा, और संयुक्त राज्य अमरीका से आये आप सभों का अभिवादन करता हूँ। मेरी शुभकामना भरी प्रार्थनाएं  और वर्तमान करुणा की जयन्ती वर्ष आपके परिवारों के लिए आध्यात्मिक नवीकरण का समय हो। येसु ख्रीस्त की खुशी और शांति आप सभों के साथ बनी रहे। इतना कहने के बाद संत पापा ने सब को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

 

 


(Dilip Sanjay Ekka)

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