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कलीसिया और विश्वासी नियम क़ानूनों के दायरे से बाहर निकले

In Church on May 30, 2016 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 30 मई 2016 (सेदोक) संत पापा ने सोमवार को वाटिकन, संत मार्था के प्रार्थनालय में अपने प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन में कहा कि विश्वास की अपनी यात्रा में कलीसिया और विश्वासी नियम क़ानूनों के दायरे से बाहर निकल ईश्वर प्रदत्त कृपाओं की याद करें और उसके लिए उनका धन्यवाद करें।

उन्होंने कहा कि आज का सुसमाचार पट्टाधारियों के दृष्टान्त की चर्चा करता है जो स्वामी द्वारा भेजे गये सेवकों और स्वयं दाखबारी के स्वामी के पुत्र की हत्या कर देते हैं, धर्मग्रंथ में नबियों और येसु के जीवन के साथ घटित कथित घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। यह अपने में एक बंद देश का चित्रण हमारे सामने प्रस्तुत करता है जो अपने को ईश्वर की प्रतिज्ञा हेतु खोलना नहीं चाहता जो ईश्वर की प्रतिज्ञाओं को अपने में ग्रहण नहीं चाहता, जहाँ लोग याददाश्त विहीन, भविष्यवाणी के बिना निराशा में जीवन यापन करते हैं।

आप की यादें महत्वपूर्ण नहीं हैं, अच्छा होता कि कोई नबी नहीं होता लेकिन सभी आशा में बने रहना चाहते हैं। ये सारी चीजें हैं जिन्हें वकील और ईशशास्त्रीगण बहुधा कानून का रूप देते और पवित्र आत्मा की स्वतंत्रता को खारिज कर देते हैं। वे ईश्वर से मिले उपहारों को नहीं मानते क्योंकि वे आशा में की जाने वाली भविष्यवाणी को नहीं स्वीकारते हैं।

येसु ऐसी ही अधार्मिक प्रणाली की बात करते हैं जिसकी चर्चा संत पेत्रुस का पत्र करता है जहाँ दुनियादारी, भ्रष्टाचार और काम-वासना भरी हुए है।

संत पापा ने कहा कि येसु को स्वयं अपने प्रेरितिक याददाश्त को खोने, भविष्यवाणी को स्वीकार नहीं करने की चुनौती, आशा के बदले सुरक्षा में बने रहने की परीक्षा ली गई थी जो मरुभूमि में तीन परीक्षाओं का सार है।
संत पापा ने कहा, “दाखबारी ईश्वर की प्रजा का प्रतीक है, यह कलीसिया और हमारी आत्मा का भी प्रतीक है जिसकी चिंता पिता अपने असीम करुणा और प्रेम में करते हैं।” उनके खिलाफ विद्रोह की भावना जैसे कि पट्टाधारियों ने किया, ईश्वर से मिले कृपाओं को खोना है जबकि कृपा दानों की याद और अपने जीवन के राह में गलतियाँ नहीं करना हमें हमारी जड़ों तक ले चलता है।

हमें अपने जीवन में ईश्वर के द्वारा किये गये आश्चर्यजनक कामों की याद करनी है। हमें अपना दिल ईश्वर के नबियों हेतु खोलना है जो हमें बतलाते हैं कि हमारे जीवन में क्या गलत है। हमें ईश्वर की प्रतिज्ञा पर विश्वास करने की जरूरत है जिस तरह इब्राहीम ने किया था, उसने बिना जाने कि उसे कहाँ जाना है अपना घर-बार छोड़ दिया, यह इसलिए संभव हुआ कि उन्होंने ईश्वर पर विश्वास किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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