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संत पापा ने अपने कथन अनुसार नहीं चलने वाले धर्मगुरूओं का विरोध किया

In Church on June 9, 2016 at 3:18 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 9 जून 2016 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग प्रवचन में कहा कि जब कलीसिया के लोग अपने कथन के विपरीत कार्य करते हैं तो ईश प्रजा को हानि उठानी पड़ती है। उन्होंने उन रूढ़िवादी विचारधाराओं को तोड़ने की सलाह दी जो हमें आपस में मेल-मिलाप करने नहीं देते।

प्रवचन में संत पापा ने ‘स्वास्थ्य यथार्थवाद’ पर प्रकाश डाला जिसकी शिक्षा येसु अपने शिष्यों को देते हैं।

संत पापा ने प्रवचन में संत मती रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने शिष्यों से कहते हैं कि उनकी धार्मिकता फ़रीसियों एवं सदुकियों की धार्मिकता से बढ़कर होनी चाहिए।

संत पापा ने कहा, ″वे लोग खानाबदोश की तरह थे क्योंकि संहिता की जो शिक्षा वे लोगों को देते थे उसका साक्ष्य अपने जीवन से देने में वे खुद तर्कयुक्त नहीं थे। अतः येसु ने अपने शिष्यों को उनसे बेहतर आचरण करने की सलाह दी। इस प्रकार उन्होंने प्रथम आज्ञा का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘ईश्वर को प्रेम करना तथा पड़ोसी को प्रेम करना’ इस ओर इंगित करता है कि अपने भाई पर क्रोध करने वाले की दण्डाज्ञा के योग्य है।″

संत पापा ने कहा कि अपने भाई अथवा बहन का अपमान करना उसकी आत्मा पर प्रहार करना है। जब कोई दूसरों का अपमान करने में माहिर हो अथवा रचनात्मक शब्दों का धनी हो तो सुननेवालों को यह भले ही आनन्द दे सकता है किन्तु यह पाप है, एक हत्या के समान है क्योंकि यह उस व्यक्ति की आत्मा को थप्पड़ मारना है, उसकी प्रतिष्ठा पर प्रहार है। हम व्यंग्यात्मक रूप से बहुधा कई बातें बोल देते हैं मानो कि सुनने वाले का बड़ा उपकार कर रहे हों।

संत पापा ने कलीसिया के उन धर्मगुरूओं का विरोध किया जो अपने कथन अनुसार नहीं चलते। उन्होंने कहा, ″हम कलीसिया में ऐसी बात कितनी बार सुनते हैं। पुरोहित, धर्माध्यक्ष अथवा धर्मगुरू लोगों को सलाह देते हैं कि ऐसा करना चाहिए किन्तु खुद उसके विपरीत चलते हैं। यह ठोकर है जो लोगों को दुःख देता है तथा ईश प्रजा को इसके द्वारा आगे बढ़ने में बाधा पहुँचती है।″

संत पापा ने ख्रीस्तीयों को परामर्श दिया कि वे कलीसिया के स्वास्थ्य यथार्थवाद का अनुसरण करें न कि रूढ़िवादी विचारधारा का। संत पापा ने दूसरों का अपमान करने के बदले उनके साथ मेल-मिलाप करने की सलाह दी जो आपसी समझौता की पवित्रता है।


(Usha Tirkey)

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