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विभिन्न कलीसियाओं का अखिल ऑर्थोडोक्स सिनॉड में भाग लेने से इन्कार 

In Church on June 11, 2016 at 3:52 pm


मोस्को, शनिवार, 11 जून 2016 (एशियान्यूज़): मोस्को प्राधिधर्माध्यक्षीय असाधारण धर्मसभा में रूसी ऑर्थोडोक्स कलीसिया के शामिल होने पर निर्णय हेतु क्रेप अखिल ऑर्थोडोक्स परिषद की सभा 13 जून को सम्पन्न होगी। उक्त बात की जानकारी प्राधिधर्माध्यक्ष के वेबसाईट में दी गयी है।

9 जून को सेरविया के प्राधिधर्माध्यक्ष ने कुस्तुनतुनिया के ग्रीक ऑर्थोडोक्स धर्मगुरू बार्थोलोमियो प्रथम को समिति की तैयारी हेतु यह कहते हुए एक पत्र प्रेषित किया था कि ″उनकी सहभागिता में बाधा दिखाई पड़ रही है तथा जो प्रस्तावना एवं नियुक्तियाँ निश्चित की गयी हैं वे वास्तविक समिति के दृष्टिकोण से, अखिल ऑर्थोडोक्स परामर्श में अधिकतर दस्तावेज कई कलीसियाओं में असंतोष उत्पन्न करती हैं।″

ज्ञात हो कि सेरविया के पूर्व बुल्गेरिया तथा अंतियोख की कलीसिया ने क्रेप में अपनी अनुपस्थिति की घोषणा कर चुकी है। ये सभी कलीसियाएँ जोर्जियन कलीसिया द्वारा एक दूसरे से जुड़े थे उनमें से खासकर एक दस्तावेज में समिति को कार्य करना है जो ऑर्थोडॉक्स एवं अन्य ख्रीस्तीय समुदायों के बीच संबंध पर आधारित है। इसका विरोध करने वाले, ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता का विरोध  करते हुए उसे कलीसियाओं के रूप में नहीं किन्तु काथलिक एवं प्रोटेस्टंट विरोधी के रूप में परिभाषित करने पर जोर दे रहे हैं।

इस विखंडन के मद्देनजर कुछ दिनों पहले मोस्को प्राधिधर्माध्यक्षीय धर्मसभा ने अखिल ऑर्थोडोक्स की असाधारण सभा बुलाने की मांग की थी।

एशियान्यूज़ के अनुसार वेबसाईट में इस बात की भी जानकारी दी गयी है मोस्को ने 9 जून को एक अधिकारिक पत्र प्राप्त किया जिसमें कुस्तुनतुनिया के प्रधिधर्माध्यक्ष ने अखिल ऑर्थोडोक्स असाधारण सभा में भाग लेने से इनकार किया है तथा अपनी इच्छा जाहिर की है कि वह कलीसियाओं के बारे सावधानी से अध्ययन करना एवं उनकी राय सुनना चाहती है। मोस्को के ख्रीस्तीय एकता वर्धक प्राधिधर्माध्यक्षीय समिति, रूसी कलीसिया द्वारा उठाये गये मुद्दों के प्रति सचेत है तथा उसका समाधान करने का प्रयास कर रही है ताकि अंत में सभी कलीसियाएँ समिति में भाग ले सकें।

विदित हो कि धर्मसभा में 6 दस्तावेजों को घोषित किया जाएगा जिसमें ऑर्थोडोक्स कलीसिया का अन्य कलीसियाओं के साथ संबंध, उपवास एवं धार्मिक अभ्यास, विवाह संस्कार, आधुनिक युग में कलीसिया की प्रेरिताई, विदेशों में आध्यात्मिक गुरु आदि मुद्दे प्रमुख हैं।


(Usha Tirkey)

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