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उदास और दुःखी लोगों को आनन्द प्रदान करना भी करुणा का कार्य

In Church on June 16, 2016 at 3:19 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 16 जून 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने सर्कस, मेला, तथा सड़कों पर कला का प्रदर्शन करने वाले, कलाकार, चित्रकार तथा बैंड के 7,000 सदस्यों से कहा कि वे एक पड़े परिवार का निर्माण करते हैं।

वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में बृहस्पतिवार 16 जून को विभिन्न कलाओं से दक्ष लोगों द्वारा मेले अथवा सड़क किनारे अपनी कला का प्रदर्शन कर, जीविका अर्जित करने वाले लोगों से मुलाकात करते हुए संत पापा ने कहा, ″आप कलाकार हैं पार्टियों में अनूठा एवं सुन्दर प्रदर्शन द्वारा, पूरे समाज को समृद्ध बनाते तथा लोगों में आशा एवं साहस का संचार करते हैं। अपने प्रदर्शन के माध्यम से आत्मा को ऊपर उठाते और चुनौतीपूर्ण तमाशा दिखाकर सुन्दरता के विस्मय एवं स्वस्थ मनोरंजन प्रस्तुत करते हैं।″ उन्होंने कहा कि उत्सव एवं आनन्द के चिन्ह द्वारा आपकी अलग पहचान, पेशा एवं जीवन है जिसे करूणा की जयन्ती में छोड़ा नहीं जा सकता। सभी लोगों के लिए आप ईश प्रेम, उनके आलिंगन एवं दया को प्रकट कर सकते हैं। आप यात्री ख्रीस्तीय समुदाय और ख्रीस्त के साक्षी हैं जो मुलाकात करने के लिए दूर तक की यात्राएँ करते हैं।

करुणा के इस जयन्ती वर्ष में जरूरतमंद लोगों, ग़रीबों, बेघर, कैदियों एवं विकलांग लोगों के प्रति उनकी उदारता के लिए संत पापा ने उन्हें धन्यवाद दिया तथा कहा कि उदास और दुःखी लोगों को सुन्दरता एवं आनन्द प्रदान करना भी करुणा के कार्य हैं।

चलते-फिरते एवं लोकप्रिय प्रदर्शन मनोरंजन का एक बहुत पुराना तरीका है। यह धनी गरीब एवं छोटे बड़े सभी लोगों खासकर, परिवारों के लिए अच्छा है। यह मुलाकात की संस्कृति एवं समाज में आमोद-प्रमोद को प्रोत्साहन देता है क्योंकि प्रदर्शन स्थल मुलाकात करने एवं मित्रता में बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। अतः संत पापा ने उन्हें सहानुभूतिपूर्ण शब्दों एवं व्यवहारों द्वारा बच्चों एवं जरूरतमंद लोगों का सदा स्वागत करने हेतु प्रोत्साहन दिया।

संत पापा ने विश्वास के जीवन की देखभाल करने की सलाह देते हुए कहा कि चूंकि वे अपने कार्यों में व्यस्तता के कारण पल्ली समुदाय में भाग नहीं ले पाते हैं उन्हें अपने विश्वास के जीवन की देखभाल खुद करना है। वे संस्कारों में भाग लेने के अवसरों का फायदा उठायें। अपने बच्चों को ईश्वर एवं पड़ोसी के प्रति प्रेम की शिक्षा दें। कलीसिया एवं लोगों की आवश्यकताओं का ख्याल रखें। कलीसिया समस्याओं में उनका ख्याल रखती है तथा उसके समाधान में उनका साथ देना चाहती है। संत पापा ने शुभकामनाएँ दी कि वे सदा अपने कार्यों को प्रेम से करें, उदारता के कार्यों में सहभागी हों तथा ईश्वर अपनी कृपा द्वारा उनकी सहायता करेंगे।


(Usha Tirkey)

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