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संत पापा, स्थायित्व की भावना बहाल करें

In Church on June 17, 2016 at 3:42 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 17 जून 2016 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार को संत जोन लातरेन के महागिरजाघर में रोम धर्मप्रान्तीय कलीसियाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए परिवार और प्रेम की खुशी पर आधारित लोगों के कई सवालों के उत्तर दिये।

कलीसिया और सारे विश्व में विवाह को किस तरह और अच्छा, सफल और फलता फूलता बनाया जा सकता है इस प्रश्न के जबाव में उन्होंने कहा, “हम भी अंतरिम संस्कृति के अंग बन गये हैं।”  अपने उत्तर के संदर्भ में उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसे उन्होंने एक धर्माध्यक्ष के द्वारा सुना था कि एक युवा जो अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुरोहित बनने की इच्छा जाहिर करता है “लेकिन केवल दस वर्षों के लिए।” संत पापा ने कहा, “ यह अस्थायी संस्कृति है और यह सभी जगह व्याप्त  है। यहाँ तक कि पुरोहिताई और धर्मसमाजी जीवन में भी। यही कारण है कि बहुत से वैवाहिक जीवन विखंडित हो जाते हैं। वे एक-दूसरे के प्रति जीवन भर की प्रतिज्ञा करते हैं लेकिन वे नहीं जानते कि वे क्या करार कर रहें है क्योंकि वे एक दूसरी संस्कृति से प्रभावित हैं।”

उन्होंने बतलाया कि बोएनोस आईरिस में एक महाधर्माध्यक्ष के रुप में किस तरह उन्होंने  “मात्रोमोनिवोस दे एपूरो” या “तत्काल विवाह”  पर प्रतिबंध लगाया साधारणतः उन नव अविवाहित दम्पतियों के लिए थी जो विवाह के पूर्व एक नवजात शिशु को जन्म देने की स्थिति में होते थे। संत पापा ने कहा कि उन्होंने इस प्रकार के विवाह  में प्रतिबंध इस लिए लगाया था क्योंकि यह ख्रीस्तीय विवाह की विशेष समझ के बजाय सामाजिक नीति नियमों के दबाव कारण किया जाता था। संत पापा ने कहा, “विवाह में संकट इसलिए आता हैं कि वे इस संस्कार की सुन्दरता को नहीं समझते हैं। लोग नहीं जानते कि यह चिरस्थायी और जीवन भर के लिए है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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