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आरमेनिया की ख्रीस्तीय धरोहर की प्रशंसा, 1915 की “महाबुराई” पर खेद

In Church on June 25, 2016 at 2:53 pm


येरेवन, आरमेनिया, शनिवार, 25 जून सन् 2016 (सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को भूतपूर्व सोवियत संघीय गणतंत्र आरमेनिया में अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक आरम्भ करते हुए  आरमेनिया की समृद्ध ख्रीस्तीय धरोहर की प्रशंसा की तथा 1915 ई. में ऑटोमन साम्राज्य काल में मारे गये लगभग 15 लाख आरेमेनियाई लोगों का स्मरण किया। येरेवन स्थित एख्टमियादज़ीन के महागिरजाघर में प्रार्थना समारोह के अवसर पर “नरसंहार शब्द का उच्चार किये बिना सन्त पापा ने 1915 ई. की इस घटना को “शहादत का पवित्र चिन्ह” निरूपित किया।

आरमेनिया के प्रेरितिक प्राधिधर्माध्यक्ष कारेकिन द्वितीय के साथ प्रार्थना समारोह के अवसर पर सन्त पापा ने अन्धकारपूर्ण समय में भी “विश्वास की लौ” प्रज्वलित रखने के लिये आरमेनिया के लोगों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। स्मरण रहे कि सन् 301 ई. में ख्रीस्तीय धर्म को राज्य धर्म घोषित करनेवाला आरमेनिया पश्चिम एशिया का पहला देश था।

आरमेनिया ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीय बहुल देश है जहाँ काथलिक धर्मानुयायी अल्पसंख्यक हैं तथापि आरमेनिया की जनता द्वारा काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष का ससम्मान स्वागत किया गया इसलिये कि आर्जेन्टीना में महाधर्माध्यक्ष रहते हुए भी सन्त पापा फ्राँसिस ने कई अवसरों पर आरमेनिया की व्यथाओं को विश्व मंच पर रखा है तथा उनकी त्रासदी को 20 वीं शताब्दी के  सर्वाधिक बर्बरतापूर्ण प्रदर्शन का नाम दिया है।

शुक्रवार को येरेवन के रास्तों के ओर-छोर जयनारों एवं करतल ध्वनि की गूँज के बीच श्वेत टी- शर्ट्स एवं पीले रंग के गलाबन्द धारण किये स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक विश्व के एक अरब बीस करोड़ काथलिक धर्मानुयायियों के परमधर्मगुरु का अपने देश आरमेनिया में स्वागत किया। हवाई अड्डे पर एक बडे से बैनर पर इताली भाषा में लिखा थाः “आरमेनिया सन्त पापा फ्राँसिस का स्वागत करता है।” आरमेनिया के राष्ट्रपति सैर्ज़ सारगास्यान, प्राधिधर्माध्यक्ष कारेकिन द्वितीय तथा अन्य गणमान्य अधिकारियों सहित गीत गाती किशोरियों के एक दल ने हवाई अड्डे पर सन्त पापा का अभिवादन किया।

साईमन समसोन्या नामक एक स्थानीय निवासी ने सन्त पापा के आगमन के क्षण के विषय में  कहा, “वह घड़ी धन्य है जब सन्त पापा फ्राँसिस ने हमारी धरती पर पैर रखे। सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में आरमेनियाई लोगों के नरसंहार की 100 वीं बरसी की याद कर उन्होंने आरमेनिया के लोगों का प्यार पा लिया है।” विगत वर्ष 12 अप्रैल को सन्त पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में 1915 के नरसंहार की पहली शताब्दी की स्मृति में ख्रीस्तयाग कर इस घटना को “20 वीं शताब्दी का प्रथम नरसंहार” निरूपित किया था।


(Juliet Genevive Christopher)

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