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संत पापा फ्रांसिस का गुमरी में ख्रीस्तीयाग

In Church on June 25, 2016 at 2:52 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 25 जून 2016 (सेदोक) काथलीक धर्म के सार्वभौमिक धर्म गुरु संत पापा फ्रांसिस ने आर्मेनिया की अपनी त्रिदिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन गुमरी में ख्रीस्तीयाग अर्पित किया।

“वे पुराने खँडहरों और नष्ट किये हुए स्थानों का पुननिर्माण करेंगे…वे उन नगरों में बस जायेंगे। (इसा. 61.4) नबी इसासय के ग्रंथ से इन वचनों से संत पापा ने अपने प्रवचन की शुरूआत की और सभी विश्वासियों को संबोधित करते हुए कहा, भाई एवं बहनों ईश्वर का वचन हम लोगों पर खरा उतरा है। एक विनाशकारी भुकम्प के बाद हम सभी ईश्वर को उनके पुनः निर्माण कार्य हेतु धन्यवाद देने के लिए जमा हुए हैं।

संत पापा ने कहा कि यद्यपि यह हमारे लिए आश्चर्य की बात है कि प्रभु हमारे जीवन में किन चीजों का निर्माण और उससे भी महत्वपूर्ण हमें किसी नींव पर अपने जीवन का निर्माण करने हेतु कहते हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए मैं तीन मूलभूत चीजों को आप के साथ साझा करना चहूँगा जिसके आधार पर आप अथक रूप से ख्रीस्तीय जीवन का निर्माण और इसका पुनः निर्माण कर सकते हैं।

पहली नींव है हमारी यादगारी। हम ईश्वर से यादगारी की कृपा हेतु विनय करें जिससे हम उन सारी चीजों को याद कर सकें जिसे ईश्वर ने हममें और हमारे लिए किये हैं जैसे की आज का सुसमाचार कहता है कि उनसे हमें नहीं भूला अपितु “याद” किया है। (लूक.1.72) ईश्वर ने हमें चुना और प्रेम किया है, उन्होंने हमें बुलाया और क्षमा किया है। ईश्वर के साथ हमारे जीवन की प्रेम कहानी में महान घटनाएँ हुई हैं जिन्हें हमें अपने मन और दिल में सहेज कर रखना है। हमारी यादों के आलावे और एक याद है हमारे लोगों की याद जिसे हमें संभाल कर रखने की जरूरत है। आपके अपने लोगों की यादें पौराणिक और क़ीमती हैं। आप के सुर में पुराने ऋषि-मुनियों और संतों के स्वर गुंजित होते हैं। आप के शब्दों और गीतों के बोल में ऐतिहासिक दुःख और आनन्द का मधुर समिश्रण है। जब आप इन पर मनन चिंतन करते तो स्पष्ट रूप में आप ईश्वर की उपस्थिति का एहसास करते हैं जिन्होंने आप को नहीं त्यागा है। जीवन की कठिनतम् परिस्थितियों में जैसे कि हम आज के सुसमाचार में सुनते हैं ईश्वर अपने लोगों से मिलने आते हैं।(लूक.1.68) सुसमाचार के प्रति, आप के पुरखों की निष्ठा को ईश्वर ने याद की है, उन्होंने अपने रक्त को प्रथम फल के रूप में बहाकर उनके प्रति अपने प्रेम का साक्ष्य दिया, जो यह प्रदर्शित करता है कि ईश्वर का प्रेम जीवन से महान है। (स्त्रो.63.4) यह उचित है कि हम कृतज्ञता के साथ ख्रीस्तीय विश्वास की याद करें जो आप के जीवन की सांस और ऐतिहासिक यादगारी बन गई है।

विश्वास भविष्य की आशा और हमारे जीवन मार्ग की ज्योति है। विश्वास दूसरी नींव हैं जिसके बारे में मैं जिक्र करना चाहूँगा। विश्वास के धूमिल होने का खतरा हमारे जीवन में हमेशा बना रहता है और यह तब होता है जब हम यह सोचने लगते हैं कि यह तो वर्षों पहले की एक महत्वपूर्ण बात है मानो एक जगमगाता किताब जो संग्रहालय में रखने के योग्य हो। एक बार जब यह इतिहास के अभिलेखागार में बंद हो जाती तो इसकी सारी परिवर्तनशील शक्तियाँ, सुन्दरता और खुलापन नष्ट हो जाती हैं। विश्वास यद्यपि येसु से मिलने पर जन्म लेता और पुनः जन्मता है जहाँ हम यह अनुभव करते हैं कि कैसे उनकी दया हमारे जीवन को सजीव बना देती है। हम अपने इस विश्वास में प्रतिदिन मजबूत हो और आगे बढ़ने की कोशिश करें। हम अपने जीवन में ईश्वर के वचनों को सुनें और शांतिमय प्रार्थना द्वारा अपना दिल उनके प्रेम हेतु खोलें। हम अपने जीवन में ईश्वर की कोमलता का अनुभव करें जो हमारे हृदयों में खुशी का दीप प्रज्वलित करती, जो हमारी उदासी से बढ़कर है जो हमारे दुःखों में भी हमें शांति प्रदान करती है। जीवन का यह नयापन हमें स्वतंत्र करता और आश्चर्यों से भर देता है जहाँ हम येसु और अन्यों के लिए अपने को देने हेतु सदैव तैयार हो जाते हैं।

येसु हमें और अधिक निकटता से अनुसरण करने का निमंत्रण देते हैं। वे हमें अपना जीवन अपने भाई-बहनों हेतु देने को कहते हैं। संत पापा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब वे आपको बुलाते हैं, तो आप न डरें, आप उन्हें “हाँ” कहें। वे हमें जानते हैं और सचमुच में हमें प्यार करते हैं। वे हमारे दिल से डर और घमंड को दूर करते हुए हमें स्वतंत्र करना चाहते हैं जिससे वे हमारे दिल में रह सकें और हम उनके प्रेम को प्रसारित कर सकें। इस तरह आप अपने सुसमाचार के महान प्रेरितिक कार्य को अपने जीवन में पूरा कर सकेंगे। यह कार्य कलीसिया का है जिसे अभी के मुश्किल समय में करने की जरूरत है क्योंकि यह करुणा का एक समय है।

 

यादगारी और विश्वास के बाद तीसरा मूलभूत आधार करुणामय प्रेम है। यह चट्टान है इस प्रेम रूपी चट्टान को हम येसु में पाते और अपने पड़ोसियों को प्रदान करते हैं। प्रेमपूर्ण कार्य में कलीसिया का चेहरा फिर से युवा और सुन्दर बन जाता है। प्रेम के ठोस कार्य ख्रीस्तीय हेतु एक पहचान पत्र है क्योंकि प्रेम से किये गये कार्यों के द्वारा लोग यह जानते हैं कि हम येसु ख्रीस्त के अनुयायी हैं। (यो.13.35) हमें एकता के मार्ग का निर्माण और उसके पुनः निर्माण हेतु बुलावा मिला है, जहाँ हम अथक रूप से आपसी मिलन के लिए सेतुओं का निर्माण करते और विभाजनों में विजयी होते हैं।

आज के पहले पाठ में नबी इसायस हमें याद दिलाते हैं कि ईश्वर का आत्मा सदैव हमारे साथ है जो हमें निर्धनों को सुसमाचार सुनाने, टूटे दिलों और दुःखियों को सांत्वना प्रदान करने हेतु मदद करता है।(इसा.61.1-2) ईश्वर उन दिलों में निवास करते हैं जो उन्हें प्रेम करते हैं। वे सभी जगहों में जहाँ प्रेम का निवास है जो निर्बलों और गरीबों के प्रति दया और सहयोग के रुप में प्रकट होता है। हमें इसकी कितनी जरूरत है। हमें उन ख्रीस्तीय की जरूरत है जो विकट परिस्तिथियों में अपने को चिंता और निराश नहीं होने देने बल्कि खुले दिल से अपने को दूसरों की सेवा हेतु देते हैं। हमें उन भाई-बहनों की आवश्यकता है जो न केवल वचनों बल्कि कर्मों के द्वारा जरूरतमंद की सेवा हेतु तत्पर रहते हैं। हमें और अधिक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करने की जरूरत है जहाँ हरएक व्यक्ति सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके विशेषकर उन्हें उनके कामों का उचित श्रम मिल सके।

फिर भी हम अपने से पूछ सकते हैं कि अपनी खाम्मियाँ और गलतियाँ जिसे हम अपने जीवन में और अपने इर्दगिर्द रोज दिन देखते हैं, कैसे करुणामय बन सकते हैं? मैं आप सबों के लिए विश्व माता कलीसिया, नारेक के संत गेग्रोरी का मूर्त उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ जो करुणा के महान दूत और आर्मेनियाई कलीसिया हेतु ईश्वर के वचन और स्वर हैं। उन्होंने मानवीय कमजोरी और ईश्वर की कृपा के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए, कृतज्ञपूर्ण हृदय से, बड़े विश्वास में ईश्वर को अपनी प्रार्थना चढ़ाई जो सभी दानों के दाता, अच्छाई, सांत्वना के स्वर, खुशी और ढाढ़स के स्रोत हैं। वे इस बात से आश्वस्त थे कि ईश्वरीय करुणा की ज्योति क्रोध के बादलों से धूमिल नहीं होती । नारेक के संत ग्रेगोरी जीवन के मालिक थे क्योंकि वे हमें ईश्वर की करुणा को पहचानने की शिक्षा देते जो अति महत्वपूर्ण है। हमारी असफलताओं और दुःखों के बावजूद हम अपने जीवन में आत्मा केन्द्रित न हो लेकिन विश्वास और निष्ठा में अपना हृदय ईश्वर हेतु खोले, “जो सदैव हमारे निकट रहते, हमें प्रेम करते हैं। मानव के लिए प्रेम से भरा…एक आग जो पाप की भूसी को भस्म कर देती है।”

संत ग्रेगोरी के शब्दों में मैं ईश्वरीय करुणा और अनंत प्रेममय उपहार पवित्र आत्मा का आहृवान करता हूँ जो शक्तिशाली रक्षक, मध्यस्थ और शांतिदाता हैं, हम अपनी प्रार्थना तुझे चढ़ाते हैं हमें कृपा दे कि हम प्रेम में एक दूसरे की मदद अच्छे कामों के द्वारा कर सकें। मधुरता की आत्मा, करुणा, प्रेम, दया और क्षमा से तू जो भरा है, हम पर दया कर, जिससे हे ईश्वर हम तेरी महिमा में जी सकें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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