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खोर विराप मठ की भेंट से सन्त पापा करेंगे आरमेनियाई यात्रा समाप्त

In Church on June 26, 2016 at 2:32 pm


येरेवन, आरमेनिया, रविवार, 26 जून सन् 2016 (सेदोक): तुर्की-आरमेनिया के बीच बन्द सीमा पर निर्मित “खोर विराप” नामक मठ की भेंट से सन्त पापा फ्राँसिस ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीय बहुल देश आरमेनिया में अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर रविवार सन्ध्या लगभग नौ बजे पुनः वाटिकन लौट रहे हैं।

आरमेनियाई भाषा के “खोर विराप”  का अर्थ है गहराई में निर्मित बन्दीगृह। बाईबिल धर्मग्रन्थ में उद्धृत अरारात पहाड़ी के पायदान पर, तुर्की की सीमा से संलग्न यह “खोर विराप” आरमेनियाई प्रेरितिक कलीसिया का पवित्रतम स्थल है। यह वही स्थल है जहाँ ईश प्रकाश से आलोकित प्रबुद्ध सन्त ग्रेगोरी को सम्राट तिरिदेट तृतीय के दमनकाल में 13 वर्षों तक अन्धेरी खाई में क़ैद रखा गया था। बाद में एक महामारी से ग्रस्त सम्राट तिरिदेट ने सन्त ग्रेगोरी से प्रार्थना की थी और चंगाई प्राप्त करने के बाद अपने परिवार सहित ख्रीस्तीय धर्म का आलिंगन कर लिया था। इसी के परिणामस्वरूप सम्राट तिरिदेट ने सन् 301 ई. में आरमेनिया में ख्रीस्तीय दर्म को राज्य धर्म घोषित कर दिया था। सन्त ग्रेगोरी की क़ैद की जगह ही पाँचवी शताब्दी में एक मठ की स्थापना कर दी गई थी तथा इसे “खोर विराप” का नाम दे दिया गया था।

आज तुर्की-आरमेनिया के बीच बन्द सीमा खोर विराप मठ से सटी हुई है जिसे तुर्की ने सन् 1992 में अज़रबैजान का साथ देते हुए नागरनो-काराबाख युद्ध के दौरान बन्द कर दिया था। बन्द के कारण आरमेनिया आर्थिक समस्याओं से घिरा चला जा रहा है।

रविवार की दैवीय धर्मविधि के दौरान इस सन्दर्भ में प्राधिधर्माध्यक्ष कारेकिन ने न्याय के पक्ष में अपनी आवाज़ बुलन्द करने के लिये सन्त पापा फ्राँसिस के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा आशा व्यक्त की कि तुर्की भी साहसपूर्वक अपने इतिहास का सामना करने के लिये तैयार होगा आरमेनिया पर लगाये अवैध बन्द को समाप्त करने के साथ-साथ स्वतंत्रता में जीवन यापन के लिये नागरनो-काराबाख के लोगों के विरुद्ध अज़रबैजान की सैन्य कार्रवाईयों पर रोक लगायेगा।

रविवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सन्त पापा “खोर विराप”  मठ से सटी सीमा पर शांति के प्रतीक रूप में एक कपोत को मुक्त करेंगे। सन्त पापा फ्राँसिस, जो विश्व के राष्ट्रों का आह्वान करते रहे हैं कि वे अपनी-अपनी सीमाओं पर दीवारों का नहीं सेतुओं का निर्माण करें, तुर्की द्वारा बन्द की गई सीमा को भी खुला हुआ देखने की अभिलाषा करते हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

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