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दक्षिणी सूडान में शांति स्थापना हेतु संत पापा ने विशेष दूत भेजा

In Church on July 22, 2016 at 3:53 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 22 जुलाई 2016 (सेदोक) संत पापा ने दक्षिणी सुडान में गृह युद्ध दलों के बीच हिंसा की समाप्ति और शांति वार्ता हेतु विशेष एक विशेष दूत भेजा।

न्याय और शांति स्थापना हेतु गठित परधर्मापीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन इस सप्ताह राजधानी जूबा की यात्रा की और महाधर्माध्यक्ष और देश के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने राष्ट्रपति सेल्भा क्कीर और उपराष्ट्रपति रियेक मकार, जिनके बीच ऐतिहासिक दुश्मनी है जो विभिन्न जातीय समूहों के प्रतिनिधित्व करते हैं, के नाम संत पापा द्वारा लिखित संदेश को भी अपने साथ लिया।

ज्ञात हो कि विगत एक साल से दक्षिणी सूडान में गृह युद्ध विराम और शांति स्थापना के प्रयास जारी हैं जिसका मुख्य कारण राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के बीच राजनीतिक वैमनस्य है। सन् 2013 से देश हो रहे युद्ध के कारण हज़ारों की संख्या में लोग मारे गये हैं और वर्तमान युद्ध की स्थिति से जान-माल की और भी अधिक क्षति हुई हैं जिसके कारण विस्थापन और मानवता संबंधी एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई हैं।

कार्डिनल टर्कसन ने बतलाया कि वे पिछले सप्ताह राजधानी जूबा पहुँचे जहाँ फिलहाल युद्ध विराम की स्थिति बनी हुए है। उन्होंने ने रविवार को विश्वासियों, महाधर्माध्यक्ष, पुरोहितों और धर्मसमाजियों के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया। उन्होंने कहा, “नरम शब्दों में कहा जाये तो स्थिति गम्भीर है”। उन्होंने बतलाया कि देश की 5वीं स्वतंत्रता की वर्षगाँठ के समय हुए युद्धों के दौरान असंख्य नागरिक मारे गयें। उन्होंने कहा कि युद्ध के समय लोगों को अपने घरों को छोड़ा कठिन हो जाता है क्योंकि उन्हें लूटा, कब्जा किया जाता या नष्ट कर दिया जाता है। “बहुत सारे महिलाएँ और बच्चे गिरजाघरों और विद्यालयों में शरण लिये हुए हैं जिन्हें पुरोहित, धर्मबन्धु और धर्मसमाजी बहनें आवश्यक सहायता प्रदान कर रही हैं।

कार्डिलन टर्कसन ने कहा, “हम ने संत पापा की ओर से राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के नाम एकता का संदेश लाया है। हमने व्यक्तिगत तौर से यह प्रयास किया कि वे दोनों एक मंच के तहत एक दूसरे के साथ मिले जिससे दोनों समुदायों के बीच शांति, विश्वास और भरोसा की भावना स्थापित की जा सके।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वाटिकन के उदारता संगठनों एवं लोकोपारी संस्थाओं का समन्वयन करने वाली परमधर्मपीठीय समिति को इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण सहायता करने की जरूरत है जिससे लोगों को आवश्यकता की चीजें मुहैया कराई जा सके।


(Dilip Sanjay Ekka)

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