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“वी लव दी अनलाभल्ड”, मदर तेरेसा पर प्रकाशित पुस्तिका हेतु संत पापा की प्रस्तावना

In Church on July 22, 2016 at 3:55 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 22 जुलाई (सेदोक): संत पापा फ्रांसिस ने वाटिकन द्वारा प्रकाशित मदर तेरेसा पर एक पुस्तिका “वी लव दी अनलाभल्ड” पर अपनी प्रस्तावना जारी की।
संत पापा ने प्रस्तावना में मदर तेरेसा की पुस्तिका के 25वें अध्याय का हवाला देते हुए ग़रीबों की सहायता को ईश्वर के करीब आने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा है कि गरीब वे लोग हैं जो प्रेम से वंचित एवं उपेक्षित हैं… हम प्रेम द्वारा न्याय किये जायेंगे तथा गरीब स्वंय येसु हैं।″
अपनी प्रस्तावना में संत पापा ने क्राकोवा में जमा हो रहे युवा को संबोधित करते हुए लिखा है, “आप सेतु के निर्माता बने जिसे आप तर्क के विभाजन, अस्वीकृति और आपसी भय पर विजय पायें और ग़रीबों के साथ खड़े होयें।” उन्होंने पुस्तिका में लिखित मदर तेरेसा के वचनों के बारे में लिखा, “सबसे खतरनाक बीमारी कोढ़ या टी बी. नहीं वरन् अकेलापन हैं…जिसके करण दुनिया में अशांति, बिखराव और युद्ध की महामारी फैली है।” (G. G. V.)
अपने प्रस्तावना में संत पापा ने कोलकता की मदर तेरेसा के विचारों को अंगीकृत करते हुए लिखा, “हम एक एजीओ नहीं हैं। एजीओ एक परियोजना के तहत कार्य करता हैं जबकि हम सभी के लिए कार्य करते हैं” इसलिए मैंने कहा कि कलीसिया एक एजीओ नहीं हैं क्योंकि यह प्रभु के लिए और गरीबों के लिए कार्य करती है जिनमें वे निवास करते हैं। इन पंतियों के आधार पर संत पापा ने पाँच मुख्य बिन्दुओं प्रार्थना, प्रेम, करुणा, परिवार और युवा पर अपनी टिप्पणी जारी की। पहली प्रार्थना जो उनके जीवन का केन्द्र था। वे अपने दिनचर्या की शुरूआत यूखरिस्तीय बलिदान से करते और अंत पवित्र यूखरिस्त की आराधना से। इस प्रकार कार्य को प्रार्थना में परिणत किया जा सकता है। संत पापा कहते हैं, ″यदि हम येसु के मनोभाव को अपनाते हैं तो हम जीवन का आनन्द ले सकते हैं तथा जिनके साथ हमारी मुलाकात होती है हम उनमें नये प्रेरणा जगा सकते हैं।″
दूसरी बिंदू प्रेम पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि इसका अर्थ है उन लोगों के करीब आना जिनसे हम प्रतिदिन मुलाकात करते हैं तथा सहानुभूति का अनुभव करना जो शारीरिक एवं भावनात्मक रूप से कमजोर हैं। प्रत्येक घायल व्यक्ति के लिए ईश्वर के प्रेम का साक्ष्य बनें तथा जो लोग ईश्वर की उपस्थिति एवं उनके सामीप्य की कामना करते हैं उन्हें इसे पाने में मदद करना।
‘दया’ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने स्मरण किया कि दया के भौतिक एवं आध्यात्मिक कार्यों द्वारा हम सभी लोगों की सेवा हेतु बुलाये गये हैं। यह बहुधा गरीबी के नाटक के सामने ऊँघती, हमारी चेतना को जगाने का एक रास्ता है ताकि सुसमाचार की गहराई में प्रवेश कर सकें जहाँ गरीब दिव्य करुणा के भागीदार हैं। संत पापा न कहा कि मदर तेरेसा ने यही किया है।
‘परिवार’ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने लिखा कि यहाँ हम अपने माता-पिता से मुस्कुराना, क्षमा करना, स्वागत करना, एक-दूसरे के लिए त्याग करने, पाने की आशा किये बिना देने, प्रार्थना करने, एक साथ दुःख सहने, खुशी मनाने एवं एक-दूसरे की मदद करना सीखते हैं, जैसा कि मदर तेरेसा हमें निमंत्रण देती है।
प्रस्तावना में संत पापा ने युवाओं को निमंत्रण देते हुए कहा है कि वे विभाजन, उपेक्षा, एक-दूसरे के प्रति भय के तर्क को तोड़ने एवं ग़रीबों के बीच आने हेतु सेतु का निर्माण करें। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया है कि वे जीवन को साहस के साथ जीयें, जो ईश्वर का वरदान है।
ज्ञात हो कि पुस्तिका “वी लव दी अनलाभल्ड”मदर तेरेसा के दो अप्रकाशित व्याख्यानों पर आधारित हैं जिन्हें उन्होंने सन् 1973 में इटली के मिलान शहर में युवाओँ और धर्मसमाजियों के सम्मेलन में दिया था।


(Usha Tirkey)

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