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युवाओं में सभी चीजों को बदलने की शक्ति है

In Church on July 29, 2016 at 3:53 pm


संत पापा फ्राँसिस को पोलैण्ड की अपनी 5 दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दौरान क्राकोवा के जार्डन पार्क, बालोने में युवाओं ने स्वागत किया और उसके बाद संत पापा ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा

प्रिय युवा मित्रों,

अनंत हम एक सब साथ आ गये। आपके गर्मजोशी रंगारंग स्वागत हेतु धन्यवाद। मैं कार्डिनल दिवीज, धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्म भाइयो और बहनों, गुरुकुलों का धन्यवाद अदा करता हूँ जिन्होंने आप का साथ दिया है। मैं उन सबों का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने आज के दिन, हमारे मिलन को सफल बनाने हेतु अथक प्रयास किया जिससे हम अपने विश्वास को पुख्ता बना सकें।

संत पापा जोन पौल द्वितीय की जन्मभूमि में, मैं उनका विशेष धन्यवाद अदा करना चाहूँगा जिनकी सोच ने इन मिलन समारोहों को गति प्रदान की है। वे स्वर्ग से हम सबों को देख रहें हैं युवाओं की इतनी बड़ी भीड़ जो विभिनन्न देशों, संस्कृतियों और भाषा-भाषी के हैं जो केवल एक ही मकसद, इस खुशी के इजहार में जमा हुए हैं कि येसु हमारे बीच में निवास करते हैं। येसु जीवित हैं और हमारे बीच निवास करते हैं इसका अर्थ यही है कि हम उत्साह के साथ उनका अनुसरण करें, उनके शिष्य होने हेतु अपनी चाह और जोश को नवीकृत करें। येसु के साथ अपनी मित्रता की इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती हैं कि हम एक दूसरों के साथ अपनी मित्रता स्थापित करें। येसु के साथ अपनी मित्रता की खुशी इससे बढ़कर और क्या हो सकती है कि हम उन्हें एक दूसरे के साथ बाँटे। इससे बढ़कर हमारे लिए संक्रामक खुशी और क्या हो सकती है कि हम सुसमाचार को दुःख और मुश्किल सभी प्रकार की परिस्थितियों में प्रसारित करने का प्रयास करते हैं।

येसु ने हमें 31वें विश्व युवा दिवस हेतु निमंत्रण दिया है। वे हमें कहते हैं “धन्य है वे जो दयालु हैं उन पर दया की जायेगी।” वास्तव में धन्य हैं वे जो क्षमा करते हैं, जो हृदय से करुणा प्रकट करते हैं वे अपने को सर्वोतम दान के रूप में दूसरों के लिए देते हैं।

प्रिय युवा मित्रों, इन दिनों पोलैण्ड में उत्साह का माहौल है। इन दिनों पोलैण्ड अपने करुणा के अति युवा चेहरे को प्रस्तुत कर रहा है। युवा मित्रों आप जो इस सम्मेलन में सहभागी नहीं हो पाये विभिन्न संचार माध्यमों से हमारे साथ जुड़े हुए हैं इस तरह हम सब विश्व युवा सम्मेलन को सच्ची जयन्ती का एक महोत्सव बनने वाले हैं।

संत पापा ने कहा कि मेरे धर्माध्यक्ष कार्यकाल में मैंने बहुत सारी बातों के सीखा लेकिन आज मैं एक बात की चर्चा करना चहूँगा। जोश, समर्पण, उत्साह और ऊर्जा को देखने से बड़ी और सुन्दर चीज कुछ भी नहीं हो सकती हैं जिसमें इतने सारे युवा अपना जीवन जीते हैं। यह कितनी सुन्दर बात है। लेकिन यह सुन्दरता कहाँ से आती है? जब येसु एक युवा या युवती के हृदय का स्पर्श करते हैं तो वे सचमुच में महान् कार्यों को करने हेतु समर्थ हो जाता है। आप के सपनों, सवालों और आप के अधैर्य को सुनना रोमांचित करता है क्योंकि आप कहते हैं “चीजों को नहीं बदला जा सकता।” संत पापा ने कहा, “ऐसी बात नहीं है कि चीजें नहीं बदल सकती हैं युवाओं में सभी चीजों को बदलने की शक्ति है। बहुतों को विश्वास नहीं होता।” संत पापा ने युवाओं में विश्वास भरते हुए कहा, “आप अपने में कहें की चीजें बदल सकती हैं? इतने सारे युवाओं के विभिन्न सवालों को देखना मेरे लिए ईश्वरीय कृपा है जो दुनिया को प्रभावित करते हैं। आपकी अधीरता को देखना कितना सुन्दर लगाता जो दिल को सुकून प्रदान करती है। कलीसिया और दुनिया आज आपकी ओर नजरें गड़ाये हुए हैं, वे आप से सीखना चाहते हैं। आप यह निश्चित रुप से जान लें कि पिता की करुणा का चेहरा युवा है जो हमें अपने राज्य में सहभागी होने हेतु सदैव निमंत्रण देता है। यह खुशी का राज्य हैं आनन्द का राज्य जो हमें सदैव आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करता है जो हमें चीजों को बदले की शक्ति प्रदान करता है। संत पापा ने युवाओं से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या चीजें बदल सकती हैं?

आप के प्रेरितिक उत्साह को देखकर मैं अपनी बातों को दुहराते हुए कहता हूँ, करुणा एक युवा चेहरा है क्योंकि करुण हृदय अपने सुखद स्थल के बाहर निकलने को लालायित रहा है। एक करुणामय हृदय अपने से बाहर निकल कर अन्यों से मिलने हेतु जाता और सभों को गले लगाता है। एक करुणामय हृदय उनके लिए एक निवास स्थल बन सकता है जिन्होंने अपने घरों को खो दिया है जो बेघर हैं। यह उनके लिए एक घर और एक परिवार बना सकता है जिन्हें प्रलायन का दंश झेलना पड़ा है क्योंकि यह कोमलता और करुणा के अर्थ को समझता है। एक करुणामय हृदय अपनी रोटी को भूखों के साथ बाँटता और प्रवासियों और शरणार्थियों का स्वागत कर सकता है। आप सबों के लिए करुणा का अर्थ अवसर, भविष्य, समर्पण, विश्वास, खुलापन, अतिथि सत्कार, दया और आप के सपने हैं। संत पापा ने युवाओ से पूछा, “लेकिन क्या आप स्वप्न देख सकते हैं? और क्या उस हृदय में जो खुला और स्वप्न देखता है करुणा के लिए कोई स्थान नहीं होता, दुखों में पड़े लोगों के लिए कोई दया नहीं होती, क्या हम एक अशांत व्यक्ति के साथ खड़ा नहीं हो सकते। संत पापा ने युवाओं का आहृवान करते हुए कहा, “हम एक साथ मिलकर कहें, “करूणा…।” और जोर से क्योंकि दुनिया हमें सुन रही है।”

संत पापा ने कहा कि मैं आप के साथ और एक बात साझा करना चाहता हूँ जिसे मैंने इन वर्षों में सीखा है। उन्होंने कहा, “मेरी यह बात किसी को चोट न पहुँचाये।” मुझे उन युवाओं से मिल कर दुःख होता है जो अपने को तैईस, चौबीस, पचीस… वर्ष की आयु में ही एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के समान पेश करते हैं। यह देख कर मुझे दुःख होता है। मुझे उन युवाओं को देख कर चिन्ता होती है जो खेल शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हैं। मुझे उन युवाओं को देख कर दुःख का अनुभव होता है जो अपने चेहरे में उदासी लिए घूमते हैं मानों उनके जीवन का कोई अर्थ नहीं है। ऐसे युवा विशेषकर अपने जीवन से उबाऊ होते और निराश होते हैं जो दूसरों को भी निराश कर देते जो मुझे दुःखित करता है। और कुछ युवा हैं जो अपने जीवन को व्यर्थ घूमने में बीता देते हैं। क्या आप उन युवाओं को जानते हैं जिन्होंने इस मार्ग का चुनाव कर लिया है। यह आप को सोचने में मदद करे कि कितने ही युवा अपने जीवन के कीमती वर्षों और ताकत को व्यर्थ की चीजें को खोजने में गंवा देते हैं। यह मुझे दुःख देता है। मुझे आशा है हमारे बीच में ऐसा कोई नहीं है लेकिन मैं आप सबों को बतलाना चाहूँगा, कि कुछ युवा कैदी हैं, कुछ युवा हैं जो खेल के पहले ही हार मान चुके हैं और कुछ जो भ्रमित चीजों की खोज में घूमते रहते और अपनी जिन्दगी गंवा देते हैं।

इसलिए प्रिय मित्रों हम एक दूसरे की सहायता करने हेतु एक साथ जमा हुए हैं। हम दूसरों को अपने से अच्छी चीजें को चुराने न दें। हम अपनी शक्ति, अपनी खुशी और अच्छी तमन्नाओं को झूठी भ्रमों में पड़कर न खोयें। संत पापा ने युवा से सवाल करते हुए कहा, “मित्रों क्या आप अपना जीवन भ्रमित झूठी चीजों में खोना चाहते हैं या अपने जीवन को उन चीजों हेतु समर्पित करना चाहते हैं जो आपको सजीव और पूर्ण बनाती है। आप अपने जीवन में क्या चाहते हैं?” जीवन में नई ऊर्जा जो कभी समाप्त नहीं होती, जिसे कभी बेचा नहीं जा सकता, हमें कोई चीज या वस्तु से प्राप्त नहीं होती वरन् एक जीवित व्यक्ति से मिली है और उनका नाम येसु ख्रीस्त है। संत पापा ने युवाओं से पूछा, “क्या आप येसु ख्रीस्त को खरीद सकते हैं? क्या येसु ख्रीस्त दुकानों में बेचे जाते हैं? येसु ख्रीस्त हमारे लिए एक उपहार हैं, पिता की ओर से हमारे लिए दिये गये एक अनमोल उपहार।

य़ह येसु ख्रीस्त हैं जो हमें जीवन की सच्ची शक्ति प्रदान करते हैं। वे हमारा मार्ग प्रदर्शन करते और थोड़ी चीजों से संतुष्ट नहीं वरन् अपना सर्वोतम् देने हेतु कहते हैं। यह येसु हैं जो हमें चुनौती देते हैं, हमें निमंत्रण देते और जब हम गिर जाते तो हमें हर समय उठाते हैं। वे हमें ऊपर अच्छे सपने देखने को कहते हैं। संत पापा ने कहा, “लेकिन क्या मुझे कोई बता सकता है कि ऊंचे सपने देखना इतना कठिन है। क्या ऊपर पहाड़ पर चढ़ना इतना कठिन है। आप कहेंगें लेकिन फादर मैं कमजोर हूँ, मैं गिर जाता हूँ, मैं कोशिश करता हूँ लेकिन बहुत बार असफल हो जाता हूँ।” अलपीने पहाड़ चढ़ते समय एक अच्छा गाना गया करता था जिसके बोल हैं, “पहाड़ चढने के क्रम में, गिरना मायने नहीं रखता, लेकिन आप गिरे न रहें।” यदि आप कमजोर हैं, यदि आप गिर जाते हैं तो चोटी की ओर एक नजर फेरें और वहाँ येसु आप की सहायता हेतु अपने हाथों को बढ़ाते हुए आपसे कहेंगे, “उठो, मेरे साथ आओ।” और मैं पुनः गिर जाता हूँ और पुनः कोशिश करता हूँ।” पीटर ने एक बार येसु से पूछा, “लेकिन प्रभु कितनी बार?” सत्तर गुण सात बार तक। हम जब-जब गिर जाते तब-तब येसु के हाथ हमारी ओर सहायता हेतु बढ़ते हैं।

सुसमाचार में हम ने सुना कि येसु येरूसलेम के मार्ग में मार्था, मरियम और लाजरूस के घर में रुकते हैं जो उनका स्वागत करते हैं। जीवन की बहुत सारी बातें हमें मार्था की तरह चिंतित और व्यस्त कर देती हैं और हम दौड़-धूप करते रहते हैं, लेकिन बहुत बार हम मरियम की तरह भी पेश आते और सभी बातों को भूल कर येसु को सुनने में मगन हो जाते हैं। विश्व युवा दिवस के इन दिनों में येसु हमारे घरों में आना चाहते हैं। मेरे घर में, आप के घर में, हम सभों के दिलों में। वे हमारी दौड़-धूप को देखेंगे जो मार्था की तरह होगी लेकिन वे हम से चाहेंगे की हम मरियम की तरह उनकी बातों को सुने। क्या हम अपने को उन्हें देने का साहस करते हैं।? उनकी बातों को सुनने हेतु, उन्हें स्वीकार करने हेतु जिन से  मैं राह, समुदाय, घर और विद्यालय में मिलता हूँ।

वे जो येसु को स्वीकारते हैं उनकी तरह प्रेम करना सीखते हैं। तब वे हमें पूछते हैं कि क्या हम परिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। मैं येसु के नाम पर आप सबों को पूछता हूँ आप क्या चाहते हैं… क्या आप परिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं? आप अभी से इसका चुनाव करें क्योंकि खुशी के अंकुर करुणा में प्रस्फुटित होते हैं। करुणा का चेहरा सदैव युवा होता है जैसे की बेथनिया की मरिया थी जो येसु के चरणों में एक शिष्य की तरह बैठ कर उनके वचनों का श्रवण की क्योंकि उसे पता था कि इसके द्वारा उसे शांति प्राप्त होगी। नाजरेथ की मरियम जिन्होंने साहस में “हाँ” कहा और जो करुणा का स्रोत बन गई जिस सभी पीढियाँ धन्य कहती हैं क्योंकि वह “करुणा की माता” है।

संत पापा ने कहा कि हम सब मिलकर ईश्वर से निवेदन करें कि वे हमें “करुणा के साहसिक कार्य में संलग्न करें।” वे हम पुलों के निर्माण, दीवारों को ढ़हने, रुकावटों और कांटीलें तारों को हटाने हेतु नियुक्त करें। वे हमें गरीबों, जो अकेलापन और परित्यक्त या जीवन में हताश अनुभव करते हैं उनकी सेवा में नियुक्त करें। हम बेथानिया की मरियम की तरह उसकी बातों को ध्यान पूर्व सुनने हेतु उनके बीच भेजे जाये जिन्हें हम नहीं समझते, दूसरे संस्कृति और लोगों की सेवा हेतु जिन से हमे खतरा का अनुभव होता हैं। वे हमें अपने बुजुर्गों के प्रति सेवा के भाव उत्पन्न करें जैसे कि नाजरेथ की मरियम ने एलिजबेथ की सेवा की जिससे हम उनके ज्ञान से सीख सकें।

येसु हमें अपनी करुणामय प्रेम को दूसरों के साथ साझा करने हेतु भेजा। हम विश्व युवा सम्मेलन में तुझे अपने बीच स्वागत कर सकें। हम अपने में यह अनुभव करें कि हमारा जीवन करुणा के द्वारा परिपूर्ण होता है जो जीवन का उत्तम भाग है जो हम से नहीं लिया जायेगा।


(Dilip Sanjay Ekka)

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