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न्याय पर आधारित विश्व की रचना हेतु सन्त पापा ने युवाओं को दी चुनौती

In Church on July 31, 2016 at 3:58 pm


ब्रेज़ेगी, पोलैण्ड, रविवार, 31 जुलाई 2016 (सेदोक): पोलैण्ड के क्रेकाव शहर के निकटवर्ती ब्रेज़ेगी गाँव में, शनिवार सन्ध्या, अस्त होते सूर्य की गुलाबी रोशनी तथा लाखों टिमटिमाती मोमबत्तियों से जगमगाते “काम्पुस मिज़ेरिकोर्दिये” विशाल मैदान में एकत्र विश्व के लाखों युवा प्रतिनिधियों को सन्त पापा फ्रांसिस ने चुनौती दी कि वे “आरामदायक सोफे” पर बैठे विडियो गेम्स एवं कम्प्यूटर के पर्दे के गुलाम न बनें। उन्होंने आग्रह किया कि इसके बजाय युवा व्यक्ति सामाजिक एवं राजनैतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए और अधिक न्यायिक विश्व की रचना करें।

आयोजकों के अनुसार विश्व के कोने कोने से क्रेकाव में इन दिनों 31 वें विश्व युवा दिवस के लिये एकत्र लगभग 16 लाख युवाओं ने शनिवार को उत्साह और उमंग के साथ सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना।

सन्त पापा ने उस पक्षाघात अथवा लकुए का ज़िक्र किया जो सुविधाजनक जीवन की चाह का परिणाम होता है। उन्होंने कहा कि आत्मसन्तुष्टि की जीवन शैली खुशी का भ्रम उत्पन्न कर देती है जो व्यक्तियों को उनके भाग्य निर्धारण की क्षमता से वंचित कर देती है। उन्होंने कहा, “प्रिय युवाओ, हम इस दुनिया में आसान जीवन की तलाश में नहीं आयें हैं हमारे जीवन का अर्थ है एक अमिट छाप छोड़ना। उन्होंने आग्रह किया कि युवा व्यक्ति राजनीतिज्ञ, दर्शनशास्त्री, विचारक एवं समाज के कार्यकर्त्ता बन कर ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में मदद दें जो “एकात्मता से प्रेरित रहे”।

उपभोक्तावाद और कंप्यूटर में आधुनिक पलायनवाद की सन्त पापा कड़ी निन्दा की। सन्त पापा के प्रवचन से कुछ ही देर पहले समारोह के रंगमंच पर एक नृत्य नाटिका का प्रदर्शन किया गया जिसमें एक एकल महिला मानवीय सन्दर्भों की तलाश करती है किन्तु सैल फोन तथा टैबलेट लिये लोग उसे भगा देते हैं, बाद में रंगमंच की पृष्ठभूमि से एक व्यक्ति बाहर आता है तथा अड़चनों को पार कर महिला से सम्पर्क करता है।

पोलिश अख़बारों में इन दिनों यह प्रश्न दुहराया जाता रहा है कि क्या पोलैण्ड के लोग सन्त पापा फ्राँसिस के सन्देशों पर अमल कर सकेंगे?  पत्रकारों से क्रेकाव के 32 वर्षीय युवा सिमोन वेरनर ने कहा, “सन्त पापा हमें किसी प्रकार का आदेश नहीं देते हैं वे प्रोत्साहन देते हैं। यह सच है कि वर्तमान विश्व में कई प्रलोभन हैं, जीवन की दुर्बलताएँ हैं और इनके विषय में हमें कुछ करना चाहिये। मसलन, अब मैं अपने परिवार पर अधिक ध्यान दूँगा।” और फिर उन्होंने कहा, “कल रात मैंने कुछ विदेशी तीर्थयात्रियों अपनी मोटर गाड़ी से पहुँचाया क्योंकि उनकी बस चूक गई थी… तो मैं समझता हूँ कि सन्त पापा फ्राँसिस की उपस्थिति काम कर रही है।


(Juliet Genevive Christopher)

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