Vatican Radio HIndi

संत पापा ने विश्व युवा दिवस हेतु समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया

In Church on July 31, 2016 at 3:59 pm


क्राकॉव, रविवार, 31 जुलाई 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने क्राकॉव की प्रेरितिक यात्रा के अंतिम दिन 31 जुलाई को, क्राकॉव स्थित कम्पुस मिसेरिकोरदिए के विशाल मैदान में विश्व युवा दिवस के उपलक्ष्य में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में कहा, ″प्रिय युवाओ, आप क्राकॉव आयें हैं ताकि येसु से मुलाकात कर सकें। आज का सुसमाचार उसी तरह के एक मुलाकात को प्रस्तुत करता है जिसमें जेरिखो के जकेयुस नामक व्यक्ति येसु से मुलाकात करता है। (लूक.19:1-10) येसु वहाँ न केवल लोगों को उपदेश दिये अथवा उनका अभिवादन किया किन्तु एक सुसमाचार प्रचारक के समान शहर से पार हुए, दूसरे शब्दों में, येसु लोगों से व्यक्तिगत मुलाकात करना चाहते हैं, वे हमारी जीवन यात्रा में अंत तक हमारा साथ देना चाहते हैं जिससे कि हमारा उनके जीवन में सचमुच समाहित हो जाए।″

जकेयुस की येसु से एक अनोखी मुलाकात हुई जो एक प्रमुख चुंगी जमा करने वाला व्यक्ति था। वह एक धनी व्यक्ति था जिसे लोग घृणित दृष्टि से देखते थे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो अपने ही लोगों पर शोषण करता है। अपने कुख्याति के कारण वह प्रभु के करीब आने में असमर्थ था किन्तु येसु से मुलाकात ने उसका जीवन बदल दिया, ठीक उसी तरह जिस तरह वे हमारा जीवन बदल देते हैं। येसु से मुलाकात करने हेतु जकेयुस को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा उन बाधाओं में से तीन हमें भी प्रेरणा प्रदान करते हैं।

जकेयुस येसु को नहीं देख पा रहा था क्योंकि उसका कद छोटा था। आज हम भी येसु के करीब नहीं आने का खतरा मोलते हैं क्योंकि हम अपने को छोटा एवं अयोग्य पाते हैं। यह एक बड़ा प्रलोभन है, न केवल आत्म सम्मान को लेकर किन्तु विश्वास हमें सिखलाती है कि हम ईश्वर की संतान हैं। (1 Jn 3:1).

हम ईश्वर के प्रतिरूप में गढ़े गये हैं येसु ने हमारे मानवीय स्वभाव को अपने ऊपर धारण कर लिया है और उनका हृदय हम से कभी अलग नहीं हो सकता। पवित्र आत्मा हम में निवास करना चाहते हैं। हम इसलिए बुलाये गये हैं ताकि ईश्वर के साथ अनन्त आनन्द के सहभागी हो सकें। हमारी सच्ची पहचान इस में है कि हम ईश्वर के प्रिय संतान हैं। संत पापा ने कहा कि जब हम अपने आप को स्वीकार नहीं करते, उदासी में जीते तथा नकारात्मक विचारों को पनाह देते हैं तब हम अपनी असल पहचान को नहीं समझते हैं। यह उसी प्रकार है जैसा कि ईश्वर हमें निहारते हैं किन्तु हम उनपर ध्यान दिये बिना वहाँ से गुजर जाते हैं तथा हमारे लिए उनकी योजना को नष्ट करने का प्रयास करते हैं। हम जैसी हैं उसी स्थिति में ईश्वर हमसे प्यार करते हैं और न ही कोई पाप, बुराई अथवा गलती उनके मन को प्रेम करने से रोक सकता है। येसु के लिए जैसा कि सुसमाचार बतलाता है कोई भी उनके मन से दूर नहीं है और न अयोग्य ही। कोई व्यक्ति महत्वहीन नहीं होता। वे हम सभी को विशेष रूप से प्रेम करते हैं। उनके लिए हम सभी महत्वपूर्ण हैं। ईश्वर हमें देखते हैं, न कि हमारे पास क्या है उसे। उनकी नजरों में हम क्या पहनते हैं अथवा किस तरह के सेल फोन का प्रयोग करते हैं उसका कोई मतलब नहीं। वे इस बात पर भी ध्यान नहीं देते कि हम कितने स्टाइलिश हैं या नहीं। उनकी आँखों में आप बहुमूल्य हैं तथा आपका मूल्य अपरिमेय।

कई बार हमारे जीवन में हम उच्च के बदले निम्न लक्ष्य रखते हैं। उन क्षणों में हम यह स्मरण रखें कि ईश्वर हमारे प्रति विश्वस्त रहते तथा हमसे प्रेम करने में उत्साहित रहते हैं। वास्तव में, हम अपने आपसे जितना प्रेम करने के उससे कहीं अधिक वे हमें प्रेम करते हैं। हम अपने आप पर जितना विश्वास करते हैं उससे कहीं ज्यादा वे हम पर विश्वास करते हैं। वे हमें सदा खुश रखना चाहते हैं क्योंकि वे हमें बहुत अधिक पसंद करते हैं। वे बड़ी आशा और धीरज से हमारा इंतजार करते हैं ऐसी घड़ियों में भी जब हम अपने आप में बंद हो जाते, कठिनाइयाँ मोल लेते हैं अथवा अपने आपको घायल कर लेते हैं। ये चुनौतियाँ हमारी आध्यात्मिकता के योग्य नहीं हैं ये हम में  विषाणु के आक्रमण एवं हमारे जीवन के अवरूद्ध हो जाने के समान है। यह हमारे द्वार बंद कर देता तथा हमें उठने और आगे बढ़ने से रोक देता है। दूसरी ओर, ईश्वर पूर्ण आशा के साथ हमारा इंतजार करते हैं वे विश्वास करते हैं कि हम सदा उठकर आगे बढ़ेंगे। वे हमें उदास या हताश देखना नहीं चाहते हैं क्योंकि हम उनके प्रिय पुत्र-पुत्रियाँ हैं। आइये, हम हर नये दिन की सुबह इस बात की याद करें। यह हमें प्रत्येक प्रातः प्रार्थना करने में मदद करेगा, ″हे प्रभु, मैं धन्यवाद देता हूँ मुझे प्रेम करने के लिए, मुझे अपने जीवन से प्रेम करने में सहायता दे। अपनी गलतियों से नहीं जिसपर मुझे सुधार करने की आवश्यकता है किन्तु मेरे जीवन से जो एक महान वरदान है क्योंकि यह प्रेम करने एवं प्रेम किये जाने का समय है।″

जकेयुस ने येसु से मुलाकात में दूसरी बाधा का अनुभव किया, वह है लज्जा। हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि जब वह पेड़ पर चढ़ा तो उसके दिल में क्या गुजर रहा था होगा। यह सचमुच कठिन था। एक ओर येसु को देखने एवं उनके बारे जानने की उत्कंठा तथा दूसरी ओर, मजाक का पात्र बनने का खतरा। जकेयुस एक जाना पहचाना व्यक्ति था अतः वह इस बात से पूरी तरह अवगत था कि पेड़ पर चढ़ने के कारण वह लोगों के हंसी का कारण बनेगा किन्तु उसने अपनी लज्जा पर जीत पायी क्योंकि येसु के प्रति आकर्षण अधिक प्रबल थी। हम जानते है कि क्या होता है जब कोई अत्यन्त खूबसूरत व्यक्ति से हमारी मुलाकात होती है, हम उसके प्रेम में दीवाने हो जाते और ऐसी स्थिति में हम वह सब कुछ कर डालते हैं जिसको करने की हमने कभी सोचा ही न था। जकेयुस के दिल में कुछ ऐसा ही हुआ जब उसने एहसास किया कि येसु अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं और वे उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो गये क्योंकि येसु ही उन्हें पाप और असंतोष के महागर्त से बाहर निकाल सकते थे। शर्म की शक्ति बड़ी नहीं थी। सुसमाचार हमें बतलाता है कि जकेयुस दौड़ कर पेड़ पर चढ़ गया और जब येसु ने उसे नीचे बुलाया तो वह शीघ्र नीचे उतर गया (4.6) उसने अपने जीवन को खतरे में डाला। हमारे लिए भी यह आनन्द का रहस्य है कि हम स्वास्थ्य उत्कंठा को न दबायें किन्तु जोखिम उठायें क्योंकि जीवन सिमटे रहने के लिए नहीं हैं। जब येसु हमारे पास आते हैं हम हाथ बांधकर नहीं बैठ सकते, वे हमें जीवन प्रदान करते हैं जिसका प्रत्युत्तर हम सोचकर अथवा चंद शब्दों में नहीं दे सकते हैं।

संत पापा ने युवाओं को मेल-मिलाप संस्कार में अच्छी तरह भाग लेने की सलाह देते हुए कहा, ″प्रिय युवा मित्रो, मेल-मिलाप संस्कार में प्रभु के पास अपना सब कुछ लाने में लज्जा का अनुभव न करें, खासकर, अपनी कमजोरियों, संघर्षों एवं अपने पापों को। वे आपको अपनी क्षमाशीलता एवं शांति से भर देंगे। अपने पूरे हृदय से हाँ कहने, उदारता पूर्वक उनका अनुसरण करने एवं उनका अनुसरण करने से न डरें। आपका हृदय शून्य न हो जाए किन्तु सर्वोत्तम प्रेम का लक्ष्य रखें जो त्याग की मांग करता है। नशीली पदार्थों की विजय, सिर्फ अपनी चिंता एवं अपने आराम की चिंता को किसी भी कीमत पर दृढ़ता पूर्वक न कहें।

संत पापा ने जकेयुस का येसु से मुलाकात में तीसरी बाधा के बारे बतलाते हुए कहा, ″एक तीसरी बाधा थी जिससे जकेयुस को संघर्ष करना था जो आंतरिक न होकर बाह्य थी अर्थात भीड़ की आलोचना।″ लोगों ने कहा कि ″येसु किस तरह इस पापी के घर प्रवेश कर सकते हैं। निश्चय ही, येसु को अपने घर में स्वागत करना कठिन था, उन्हें ईश्वर स्वीकार करना जो दया के धनी थे।″ संत पापा ने कहा कि लोग हमें रोकने की कोशिश कर सकते हैं यह दिखाने के लिए कि वे हमसे दूर, हट्ठी और असंवेदनशील हैं जबकि हमारे स्वर्गीय पिता अच्छे और बुरे दोनों पर अपना सूरज उगाते हैं। (5:45) वे हमसे सच्चे साहस की मांग करते हैं, सभी से प्रेम करते हुए, बुराई से अधिक शक्तिशाली होने के साहस की। कोमल और विनम्र दयालुता पर विश्वास करने के कारण लोग हमारा मजाक कर सकते हैं किन्तु हम न डरें। आदर्श वाक्य की याद करें, ″धन्य हैं वे जो दयालु हैं उनपर दया की जायेगी।″ लोग हमें स्वप्न द्रष्टा कह सकते हैं क्योंकि हम नवीन मानवता पर विश्वास करते हैं। एक व्यक्ति जो लोगों से घृणा करना छोड़ देता है जो सीमाओं को दीवार के रूप में देखना नहीं चाहता है वह आत्मकेंद्रित न होकर अपनी परम्पराओं को संवार सकता है। संत पापा युवाओं को प्रोत्साहन देते हुए कहा, हतोत्साहित न हों बल्कि मुस्कान एवं खुली बाहों से आशा एवं मानव परिवार के लिए आशीर्वाद की घोषणा करें जिसको आपने यहाँ बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया है।

उस दिन भीड़ ने जकेयुस की आलोचना की तथा उन्हें तीखी नजरों से देखा किन्तु येसु ने ऐसा नहीं किया, उन्होंने उसे स्नेहिल नजरों से देखा और उसकी गलतियों से ऊपर दृष्टि लगायी। येसु हमें गलतियों के साथ नहीं किन्तु अच्छाईयों के साथ देखते हैं। उनकी दृष्टि हमें स्मरण दिलाती है कि यह संयुक्ति और एकता का रास्ता ढूँढ़ती है। वे बाह्य रूप रंग नहीं देखते किन्तु हृदय देखते हैं। येसु के इन नजरों द्वारा हम, दूसरों से स्वीकृति की आशा किये बिना दूसरों की मदद कर सकते हैं अपने भलाई की आशा किये बिना शुद्ध हृदय से शांति हेतु ईमानदारी एवं न्याय के लिए संघर्ष कर सकते हैं। चीजों की ऊपरी सतह तक ही सीमित न रहें किन्तु सभी के साथ अच्छा संबंध बनाये रखें, चिंता किये बिना अच्छाई बांटें। जिस आनन्द को आपने ईश्वर से मुफ्त में पाया है उसे मुफ्त में दें क्योंकि कई लोग इसका इंतजार कर रहे हैं।

अंत में हम जकेयुस के लिए येसु द्वारा कहे गये शब्दों को सुनें जो हमारे लिए भी अर्थपूर्ण हो सकता है। ‘नीचे उतर आओ क्यों आज मैं तुम्हारे यहाँ ठहरना चाहता हूँ।’ (v.5) येसु वही निमंत्रण आज हमें दे रहे हैं, ″आज, मैं तुम्हारे यहाँ ठहरना चाहता हूँ।″ हम कह सकते हैं कि विश्व युवा दिवस की शुरूआत आज हो रही है और यह हमारे घरों में कल भी जारी रहेगी क्योंकि अब येसु हमसे मुलाकात करना चाहते हैं। संत पापा ने कहा, ″प्रभु इस सुन्दर शहर में ठहरे रहना नहीं चाहते हैं और न ही मात्र यादों को संजो कर रखना चाहते हैं। वे आपके घरों में प्रवेश करना चाहते हैं आपके दैनिक जीवन में आना चाहते हैं, आपके अध्ययन, कार्यों, मित्रों, स्नेह, आशा एवं भविष्य की कल्पनाओं में।″ वे कितनी तीव्र अभिलाषा करते हैं कि प्रार्थना में हम अपना सब कुछ उनके पास लायें। वे कितनी आशा करते हैं कि हमारे सम्पर्क एवं वार्तालाप में प्रार्थना को स्थान मिले। वे हमें अपने शब्द सुनाना चाहते हैं ताकि सुसमाचार को हम अपना बना सकें ताकि यह जीवन के चौड़े मार्गों में दिशा-निर्देशक के रूप में कार्य कर सके। आपके घर आने की बात कहते हुए येसु आपका नाम लेते हैं जिस तरह उन्होंने जकेयुस का नाम लिया था। आपका नाम बहुमूल्य है। संत पापा ने युवाओं से कहा, ″ईश्वर की स्मरण शक्ति पर भरोसा रखें जो कोई ‘हार्ड डिस्क’ के समान नहीं है जो ‘सेव’ करता एवं ‘अरकाईव’ में रखता है किन्तु एक कोमल हृदय है जो कोमलता और दया से पूर्ण है। जो हमारी सभी बुराईयों को मिटाने में आनन्द लेता है। हम भी ईश्वर के विश्वस्त स्मरण शक्ति का अनुसरण करें तथा इन दिनों प्राप्त सभी अच्छी चीजों को संजोकर रखें। मौन होकर उनकी मुलाकात की याद करें, उनकी उपस्थिति एवं उनके वचन की याद को सुरक्षित रखें। येसु की आवाज को जो हमारा नाम लेकर पुकार रहा है। हम उस प्रभु को धन्यवाद दें जिन्होंने हमें यहाँ बुलाया और हमसे मुलाकात करने आये।


(Usha Tirkey)

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: