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भारतीय आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट होने का आह्वान

In Church on August 11, 2016 at 2:50 pm


नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 11 अगस्त, 2016 (ऊकान): कलीसिया के धर्मगुरूओं ने भारत के आदिवासियों की एकता का आह्वान किया है ताकि वे एकजुट होकर सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु संघर्ष कर सकें।

9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में, काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के आदिवासी विभाग के सचिव फा. स्तानिसलास तिरकी ने करीब 1,000 आदिवासियों को सम्बोधित कर कहा, ″भारत की आदिवासी जनता ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है किन्तु वर्तमान में यह आवश्यक है कि वे एक साथ आयें ताकि विस्थापन एवं शोषण के विरूद्ध संघर्ष कर सकें।″

आदिवासी समाज से आने वाले फादर स्तानिसलास ने कहा, ″हमारी समस्या एक समान है हम भेदभाव के शिकार होते हैं अतः जब तक हम एकजुट नहीं होंगे यह समस्या बनी रहेगी।″ सरकारी आँकड़ा अनुसार भारत में करीब 104 मीलियन आदिवासी लोग हैं जो करीब 600 से दलों में विभाजित हैं।

कई आदिवासी समुदाय केवल अपनी जाति और उपजाति तक ही सीमित हैं जबकि कई जगहों में आपसी प्रतिद्वंद्विता और प्रभुत्व के लिए हिंसा तक की घटनाएँ सुनने को मिलती हैं।

फा. तिर्की ने ऊका समाचार से कहा कि सामाजिक, आर्थिक एवं विकास संबंधी अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिए सभी आदिवासियों को एक साथ आना होगा। उन्हें अपने अधिकारों के लिए हिंसा किये बिना संघर्ष करना तथा लोकतंत्र की नीति को अपनाना होगा।

भारतीय सामाजिक संस्थान में आदिवासी अध्ययन विभाग के प्रमुख जेस्विट फा. रंजित तिग्गा ने कहा कि भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए कई प्रावधान हैं लेकिन उन्हें लागू करने में राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है। उन्होंने कहा कि कई नीतियाँ आदिवासियों के खिलाफ हैं खासकर, जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के खिलाफ।

झारखंड की दयामनी बारला ने कहा कि आदिवासियों को अपने समाज की सेवा करने एवं एकता में बढ़ने के लिए अपनी पृथक्कृत मानसिकता से बाहर आना होगा। पश्चिम बंगाल की अभिनेत्री रोमा एक्का ने कहा कि जो लोग शिक्षा देते हैं उन्हें अधिकारों के बारे सिखाना चाहिए, जब हम समानता की बात करते हैं तो सभी लोगों को एक साथ लेकर चलना होगा।

कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के युवाओं के सहयोग से जेस्विट पुरोहितों द्वारा संचालित इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट ने किया था।


(Usha Tirkey)

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