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माता मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व पर संत पापा का संदेश

In Church on August 15, 2016 at 3:48 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 15 अगस्त 16 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने रोम स्थिति संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में माता मरियम के स्वर्गोदग्रहण महापर्व के उपलक्ष्य में देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी विश्वासियों को पर्व की मंगलकामनाएँ अर्पित की।

उन्होंने देवदूत प्रार्थना के पूर्व दिए गये संदेश में माता मरियम की जीवन यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ″मरियम उठी और शीघ्रता से यूदा की एक पहाड़ी प्रदेश की ओर चल पड़ी।″ उन्होंने कहा कि मरियम येरूसालेम के निकट एक शहर में अपनी कुटुम्बनी एलिजाबेथ से मिलने गयी। आज हम उनके पिता ईश्वर से मुलाकात करने एवं अपने पुत्र को पुनः देखने के लिए स्वर्गीय येरूसालेम में प्रवेश करने की घटना पर चिंतन कर रहे हैं।

अपने जीवन काल में उन्होंने कई पहाडियों को पार किया था जिसमें उन्होंने कलवारी पहाड़ पर अपने पुत्र ख्रीस्त के दुःखभोग में सहभागी भी हुई थीं। आज हम देख रहे हैं कि वे सूर्य सा श्वेत वस्त्र पहने तथा पाँवों पर चंद्रमा धारण कर, ईश्वर के पर्वत पर पहुँच गयी हैं।

संत पापा ने कहा कि माता मरियम ही हैं जिन्होंने ईश्वर के पुत्र पर सर्वप्रथम विश्वास किया तथा सबसे पहले शरीर एवं आत्मा सहित स्वर्ग में उठा ली गयीं। उन्होंने येसु को एक बालक के रूप में सबसे पहले अपनी बाहों में लिया और ईश्वर के राज्य का ज्ञान प्राप्त किया। दुनिया में कई लड़कियाँ थी किन्तु किसी को यह सौभाग्य नहीं मिला, इस तरह यह दर्शाता है कि ईश्वर शक्तिशालियों को नहीं किन्तु दुर्बलों को चुनते हैं।

माता मरियम का स्वार्गोदग्रहण एक बड़ा रहस्य है जो हम सभी के भविष्य पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। वास्तव में, माता मरियम एक ऐसे रास्ते का सबका नेतृत्व करती हैं जिसपर बपतिस्मा प्राप्त करने वाले विश्वासी आगे बढ़ते हैं, जिन्होंने येसु के साथ अपने को जोड़ दिया है जैसा कि माता मरियम ने अपने जीवन को येसु के साथ जोड़ा था। आज का महापर्व हमें आकाश की ओर निहारने हेतु प्रेरित करता है, एक नये आकाश एवं नयी पृथ्वी की ओर। जिसपर ख्रीस्त ने मृत्यु और शैतान पर विजय पायी है। यही कारण है कि गलीलिया की विनम्र बालिका को महान गौरव प्रदान किया गया है जिसको वे अपने भजन में गाती हैं।

संत पापा ने मरिया के भजन पर गौर करते हुए कहा कि उनका भजन हमें आज की दुःखद परिस्थितियों की याद दिलाती है, विशेषकर, महिलाएँ जो हिंसा और गुलाम की शिकार हैं तथा बालिकाएं जो अमानवीय कार्यों के लिए बाध्य हैं। लड़कियाँ जो उन लालची पुरूषों के लिए अपना शरीर और आत्मा निछावर करने के लिए मजबूर हैं। यह भजन उनके जीवन में शांति, न्याय एवं प्रेम लेकर आये। माता मरियम जो एक युवत्ती थीं उन्होंने भी अपने जीवन में बहुत दुःख सहा है, हमें उन महिलाओं की याद दिलाती हैं जो बहुत पीड़ा सह रहे हैं। संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु उन्हें जीवन के रास्ते पर ले चले तथा उन्हें हर बंधन से मुक्त करे। संदेश के अंत में उन्होंने स्वर्ग की रानी धन्य कुँवारी मरियम को सम्मान देते हुए देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।


(Usha Tirkey)

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