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पर्यावरणीय आपदा के विरोध में प्रदर्शन पर काथलिकों की पीटाई

In Church on August 18, 2016 at 3:21 pm


हानोई, बृहस्पतिवार, 18 अगस्त 2016 (एशियान्यूज़): वियेतनाम में मछलियों के मरने को लेकर सरकार के प्रति विरोध प्रदर्शन कर रहे केयान्थ शहर के करीब 4 हज़ार काथलिकों को पुलिस ने रोककर उनकी पीटाई की। मछलियों के मर जाने के कारण मछवारों की जीविका नष्ट हो चुकी है।

एशियान्यूज़ के अनुसार फोरमोसा प्लास्टिक समूह, ताइवान के इस्पात कंपनी द्वारा उत्पन्न प्रदूषण एवं अपशिष्ट को समुद्र में फेंकने के कारण 70 टन मछली मर चुकी है। चार महीनों तक अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त कार्यकर्ताओं की भरपाई नहीं की और न ही परिवारों की मदद की है।

प्रदर्शनकारियों में से एक फूओंग ने कहा, ″15 अगस्त को हमने शहर के कार्यालयों में प्रदर्शन करने का निश्चय किया किन्तु पुलिस ने मुख्य मार्ग को अवरोध कर दिया। लगभग 200 पुलिसों को प्रदर्शन को रोकने के लिए तैनात किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने घेरा पार करने का प्रयास किया किन्तु पुलिस ने लोगों को डंडे से पीटना शुरू कर दिया जिसमें एक महिला घायल हो गयी।″

उसने कहा कि प्रदर्शनकारी जन आयोग कार्यालय तक पहुँचने में सफल हो गये थे किन्तु उन्हें रोक दिया गया अतः मुझे घर वापस आना पड़ा।

क्वी होवा पल्ली के निदेशक गुएन थान्ह लंग ने कहा, ″पुलिस की हिंसा के कारण एक बूढ़े व्यक्ति की बांह टूट गयी है। कुछ अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। केयान्ह के एक अधिकारी ने इस बात से इन्कार किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीटा। उसने कहा कि लोग इसलिए घायल हो गये क्योंकि वहाँ बड़ी भीड़ थी।

वियेतनाम के केंदिय प्रांत के अधिकतर लोग मछवारे हैं और नमक उत्पादन द्वारा अपनी जीविका चलाते हैं किन्तु पारिस्थितिकीय आपदा के कारण उनकी कुछ भी आमदनी नहीं हो रही है। कलीसिया तथा समाज के लोग महीनों से हानोई के सरकार का विरोध कर रहे हैं जो जाँच पड़ताल में देरी कर रही है तथा नागरिकों के स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं दे रही है जबकि शांति पूर्ण प्रदर्शन में उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।

काथलिक करीतास ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जो केवल चैरीटी पर ही निर्भर कर रहे हैं। फूओंग ने कहा कि आपदा के चार महीने हो जाने तक हमने प्रतिमाह केवल 15 पौंड चावल प्राप्त किया है जो बहुत घटिया है और जिसे खाया नहीं जा सकता। हमने अधिकारियों से सहायता अथवा समर्थन की कोई एक शब्द भी नहीं सुनी है।


(Usha Tirkey)

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