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भारत के घरेलू कामकाजी महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग कीं

In Church on August 18, 2016 at 3:17 pm


नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 18 अगस्त 2016 (ऊकान): नई दिल्ली में 16 अगस्त को करीब 4,000 घरेलू कामकाजी महिलाओं ने धरना देकर सरकार से उचित मजदूरी एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

ये घरेलू कामकाजी, दिल्ली महाधर्मप्रांत के समाज सेवा विभाग ‘चेतनालय मंच’ से जुड़े हैं जिन्होंने ‘नो राईट, नो वर्क डे’ रखते हुए जुलूस निकाला था।

इस दिवस को मनाने हेतु ‘चेतनालय’ ने दो सालों से लोगों का अह्वान किया है। वे घरेलू कामकाजी समुदाय के लिए न्याय चाहते हैं जिन्हें, शोषण, उत्पीड़न तथा कम वेतन आदि का सामना करना पड़ता है।

चेतनालाय मंच की सचिव नीलिमा तिरकी ने ऊका समाचार से कहा, ″घरेलू कामकाजी लोगों के कार्यों का भारत में कोई पहचान और सम्मान नहीं है, वे मालिकों के हाथों शोषण की शिकार बनती हैं।″

मंच ने मानव तस्करी, लड़कियों के विस्थापन तथा काम की खोज में गाँवों से आदिवासी लड़कियों के शहर की ओर पलायन आदि विषयों पर भी चिंता व्यक्त की।

चेतनालय मंच के निदेशक फादर सावारी राज ने कहा, ″घरेलू कामकाजी महिलाओं पर मानव तस्करी जारी है और यह इसलिए हो रहा है क्योंकि सुदूर गाँवों के लोग अनभिज्ञ हैं। शहर में घरेलू कामों में लगी लड़कियाँ बहुधा गरीब तथा अशिक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि ये पलायन जानकारी के साथ होनी चाहिए जहाँ निर्दोष लड़कियाँ शहर आकर उचित घरेलू कार्यों में लगायी जा सकें तथा अपने परिवार, मित्रों, गाँव के प्रमुख तथा पड़ोसियों के सम्पर्क में रहें ताकि वे शोषण के शिकार होने से बचें।

भारत की राजधानी दिल्ली में झारखण्ड, बिहार एवं अन्य आदिवासी क्षेत्रों से जवान युवतियाँ घरेलू कार्यों में लगायी गयी हैं जिनमें से कई ख्रीस्तीय हैं जो बेहतर जिंदगी, शहर की नौकरी एवं अपने परिवार को आर्थिक मदद देने के मकसद से शहर गये हैं।

 


(Usha Tirkey)

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