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संत पापा का रिमीनी में लोकधर्मियों के साथ मित्रता की 37वें संगोष्ठी हेतु संदेश

In Church on August 19, 2016 at 2:48 pm



वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 अगस्त 2016 (सेदोक) संत पापा ने रिमीनी में लोगों के साथ मित्रता की 37वीं संगोष्ठी के अवसर पर रिमीनी के धर्माध्यक्ष फ्राँसिस लम्बीयासी ने नाम अपना संदेश प्रेषित किया।
“आप मेरे लिए अच्छे हैं” शीर्षक से प्रेषित संदेश में वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलीन ने लिखा कि दुनिया में हो रहे उत्थल-पुथल की स्थिति में जब हम यह पाते हैं कि लोग अपने में सीमित और संकुचित होते जा रहे हैं ऐसे परिवेश में आप हमारे लिए साहस का कारण बनते हैं। यह हमारे मानवीय संबंध और हमारी प्रकृति को प्रदर्शित करता है जहाँ हम स्वर्गीय पिता के बेटे-बेटियों के समान एक परिवार का निर्माण करते और सदस्य होते हैं। जबकि हमारा अपने आप में सीमित होकर रहना हमारे जीवन में हमारी खम्मियों और कमजोरियों को दिखलाता है जो समाज को कमजोर बनाता है। हम एक दूसरे की विभिन्नता में मेल प्रेम और खुशी में रहने हेतु बुलाये गये हैं।

दुनिया में और शंका कि परिस्थिति हमें अपने अस्तित्व की असुरक्षा के अनुभवों पर चिंतन करने की मांग करती है जो हम में सदैव भय उत्पन्न करती है। दुनिया की चुनौतियों के सामने हम में से अकेले कौन अपने आप की सुरक्षा कर सकता है? येसु के उदाहरण हमें कहते हैं कि ख्रीस्तीय सदैव अपने को दूसरों के लिए खोलता है जहाँ कोई हमेशा के लिए नहीं खोता है। सुसमाचार में उड़ाव पुत्र का दृष्टांत हमें इसकी झलक देता है, पुत्र सूअर चरता और पिता घर के छज्जे में चढ़कर अपने पुत्र के आने की राह देखता है। चुंगी जमा करने वाला जकेयुस और भला डाकू जिनकी ओर येसु प्रेम भरी नजर से देखते हैं क्योंकि वे पिता के सृष्टि प्राणी हैं जिन्हें करुणा की जरूरत है जो हम सबों को बचाता है। यहाँ तक कि युदस जिन्होंने येसु को शत्रुओं के हवाले कर दिया येसु उसे “मित्र” कह कर बुलाते हैं।

आज हमें वार्ता हेतु खुला रहने और इसका साक्ष्य देन की जरूरत है। हमारा खुलापन हमें कमजोर नहीं वरन हमें दूसरों के गुणों और उनके मनोभावों का ज्ञान कराते हुए धनी बनाता है। एक सच्चा आपसी मिलन का तात्पर्य अपनी स्पष्ट पहचान पेश करना है जिसके द्वारा हम अपने को दूसरों के परिवेश में रखते और उनके मनोभावनाओं से अपने हृदयों को स्पर्श होने देते हैं। इस तरह वार्ता की शुरुआत हमें आपसी समझ की एक नई ऊँचाई तक पहुँचने में मदद करती है। यह हम सबों के लिए एक चुनौती है।

जीवन की चुनौतियाँ जहाँ हम अपने को शक्तिहीन पाते हमें रहस्यात्मक तौर से निमंत्रण देती है कि हम अपने को अन्यों के साथ संयुक्त करते हुए नये जीवन की शुरूआत करें। इस तरह चुनौतियों का सामना करते हुए हम येसु के शिष्य के रुप में एक साक्ष्य पेश करते हैं जिससे लिए हमें ईश्वर की ओर से जीवन मिला है- जो हमारे जीवन के द्वार सुसमाचार की घोषणा है।

संत पापा की अभिलाषा यही है कि हम जो इस मिलन समारोह में भाग ले रहे हैं अपने व्यक्तिगत जीवन के द्वारा सृजनात्मक साक्ष्य दें। यह ईश्वरीय करुणा, पिता का प्रेम है जो सबों के लिए विशेषकर युखारीस्त और पापस्वीकार संस्कार में व्याप्त है। वे हम से निवेदन करते हैं कि हम एक दूसरे के निकट रहें और एक दूसरे की प्रेममय सेवा करें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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