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प्रकृति के अपने प्रथम प्रेरितिक संबोधन में करुणा के नये काम का जिक्र, संत पापा

In Church on September 2, 2016 at 3:37 pm


वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 02 सितम्बर 2016 (वी आर) संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 01 सितम्बर को प्रकृति हेतु विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर प्रकृति में दिये गये अपने प्रथम प्रेरितिक संबोधन में विश्वासियों को करुणा के एक नये कार्य, “हमारे सामान्य घर धरती और उसके निवासियों की देखभाल” का आहृवान किया।

बृहस्पतिवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मानवीय संपूर्ण विकास हेतु गठित नये परमधर्मपीठ कार्यालय के अधिकारी कार्डिलन पीटर टर्कसन ने ख्रीस्तीय एकता समिति के धर्माध्य़क्ष बयान फरेल और आयरलैण्ड के लेखक टेरेन्स वार्ड के साथ मिल कर संत पापा के संदेश की घोषणा की। वाटिकन प्रेस के नये प्रवक्ता ग्रेग बुर्के ने संत पापा के संदेश, “हमारे सामान्य घर के प्रति करुणा के भाव रखे” की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि कलीसिया में प्रतिदिन हमें करुणा के नये कार्य करने हैं। उन्होंने धर्मग्रंथ पर आधारित करुणा के छः कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि भूखों को खिलाना, प्यासों को पिलाना, प्रवासियों का स्वागत करना, नंगों को पहनना, बीमारों और कैदियों की भेंट करना और सातवाँ मुरदों को दफनाना जो मध्यकालीन अवधि में जोड़ा गया।

संत पापा ने करुणा के इन कार्यों की कड़ी में 8वें कार्य को जोड़ दिया है जिसे “द गार्जियन ऑफ मर्सी” के लेखक आयरलैण्ड के टेरेन्स वार्ड ने करुणा के उन कार्यों में से एक सबसे महत्वपूर्ण कार्य की संज्ञा दी है। धर्माध्यक्ष बयान फरेल ने बतलाया कि इस मुद्दे पर सम्पूर्ण अन्तर धार्मिक वार्ता केन्द्रित होती है जिसके तहत प्रधिधर्माध्यक्ष बाथोलोमियो और अन्य आराथोडोक्स कलीसियाई नेतागण पर्यावरण के विकट परिस्थिति के प्रति लोगों को सचेत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कार्डिनल टर्कसन ने बतलाया कि यह स्तर दर स्तर एक प्रक्रिया है जहाँ हम अपने स्वार्थ, अनुत्तरदायित्व और लोभ के कारण प्रकृति का दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम हमें नम्रतापूर्वक स्वीकार करने की जरूरत है कि हमने पृथ्वी को हानि पहुंचाया और इसे दूषित किया है जो दिन व दिन विकराल होती जा रही है। इसके साथ हमें यह भी अनुभव और स्वीकार करने की जरूरत है कि जब हम पृथ्वी को हानि पहुँचाते तो हम ग़रीबों को भी हानि पहुँचाते हैं जिन्हें ईश्वर प्रेम करते हैं। अपने इस व्यवहार को स्वीकारते हुए हमें अपने पापों के लिए क्षमा याचना करने की जरूरत है और अपने जीवन में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। इसके साथ-साथ हमें अर्थव्यवस्था और राजनीति व्यवस्था में भी परिवर्तन लाने की जरूरत है जिससे सभी चीजों का अल्पकालीन नहीं वरन न्यायपूर्ण सतत विकास हो सके। कार्डिनल में प्रेस विज्ञाप्ति के अंत में कहा कि हम में सेकितने हैं जो स्वेच्छा से इन सभी चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

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