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स्वयं सेवकों की जयन्ती के अवसर पर संत पापा का संदेश

In Church on September 3, 2016 at 4:32 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 सितम्बर को स्वयंसेवकों के लिए करुणा की जयन्ती मनाने हेतु संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित सभी विश्वासियों को सम्बोधित कर उन्हें प्रेम का साक्ष्य देने की सलाह दी।

कोरिन्थियों को लिखे संत पौलुस के पत्र पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि संत पौलुस ने कई बार अपने पत्र में प्रेम और विश्वास के बारे लिखा है। आज के इस पाठ में भी वे कहते हैं कि प्रेम अमर है। इस बात को हमें अच्छी तरह जानना चाहिए कि ईश्वर का प्रेम हमारे जीवन और मानव इतिहास में कभी नहीं घटेगा। यह एक ऐसा प्रेम है जो हमेशा ताजा, सक्रिय, गतिशील तथा आकर्षक रहता है। यह एक निष्ठापूर्ण प्रेम है जो हमारी अस्थिरता के बावजूद कभी विश्वासघात नहीं करता। यह हमारे आलस्य पर विजय पाता है। संत पापा ने कहा कि हम इस प्रेम के साक्षी हैं। ईश्वर का प्रेम निश्चय ही हमारी ओर आता है यह एक भरी हुई नदी के समान है जो हमपर भार डाले बिना हमें अपने में समाहित कर लेता है। संत पौलुस ने बिलकुल सही कहा है कि अगर मुझ में प्रेम का अभाव है तो मैं कुछ भी नहीं हूँ। हम अपने आप को जितना अधिक प्रेम किये जाने देते हैं हमारा जीवन उतना ही अधिक विशुद्ध हो जाता है। हमें अपने पूरे अस्तित्व से कह सकना चाहिए कि मेरा अस्तित्व है क्योंकि मैं प्रेम किया गया हूँ।

संत पापा ने संत पौलुस के शब्दों की सार्थकता बतलाते हुए कहा कि उनकी ये बातें काल्पनिक नहीं हैं इसे देखना, छूना और अनुभव करना सम्भव है। प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण येसु ख्रीस्त हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन पिता के ठोस प्रेम का चिन्ह है जिसकी पराकाष्ठा है क्रूस। ईश्वर इसके द्वारा हमें अपना प्रेम प्रकट करते हैं जब हम पापी थे और हमारे पापों के लिए ख्रीस्त मर गये। (रोम.5:8) प्रेम द्वारा उन्होंने हमारे सभी पापों को धो दिया तथा सब कुछ को नया बना दिया। अतः प्रेम ही जीवन की महान अभिव्यक्ति है जो हमारे अस्तित्व को बनाये रखता है।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया विश्वास की इस सच्चाई के सामने उस पुरोहित या लेवी की तरह व्यवहार नहीं कर सकता जो अधमरे व्यक्ति को छोड़कर पास से गुजर गया। कलीसिया विभिन्न प्रकार की गरीबी तथा करुणा की पुकार को सुनकर पीछे नहीं हट सकती। कलीसिया अथवा ख्रीस्तीय इसके लायक नहीं है कि वह ऐसे लोगों को देख कर अपना मुह फेर ले और मात्र प्रार्थना करने के कारण शुद्ध हृदय होने का ढोंग करे।

संत पापा ने इस बात पर बल दिया कि ईश्वर का प्रेम मानव की पीड़ा से होकर बहता है जिसकी आवाज आज भी गुँज रही है कि हम करुणा के नये चिन्हों की खोज करें। ईश्वर की दया कोई सुन्दर विचार नहीं है अपितु एक ठोस कार्य है तथा मानवीय दया तब तक प्रमाणिक नहीं कहा जा सकता है जब तक कि हमारे दैनिक जीवन में इसका कोई ठोस अभिव्यक्ति न हो।

संत पापा ने करुणा के सभी स्वयंसेवकों को सम्बोधित कर कहा कि वे विश्व के सभी स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे कलीसिया के लिए अत्यन्त मूल्यवान हैं क्योंकि वे करुणा को ठोस आकार देते हैं। एक दूसरे को सुनने के द्वारा वे ख्रीस्त के प्रेम के नियम को प्रकट करते हैं।

स्वयं सेवकों के कार्यों की सराहना करते हुए संत पापा ने उन्हें सलाह दी कि वे हमेशा सहानुभूति रखने, दूसरों के करीब होने, उन्हें आनन्द बांटने तथा दूसरों को सहायता देने में सदा खरे हों। दुनिया को एकात्मता के ठोस चिन्ह की आवश्यकता है। वे जो सेवा देते हैं उसमें हमेशा आनन्द भरा हो बल्कि दूसरों से बढ़कर वे अपने को कभी न सोचें। विनम्र बनें तथा येसु का अनुसरण करें जो पीड़ितों की सेवा हेतु उनके स्तर तक झुक गये।

संत पापा ने करुणा मय मदर तेरेसा की संत घोषणा का स्मरण दिलाते हुए कहा कि हम उनके उदाहरणों पर चलें। हम ईश्वर के हाथों एक विनम्र औजार के रूप में समर्पित हों ताकि दुनिया के दुखों को दूर करने में मदद दे सकें तथा पुनरूत्थान के आनन्द एवं उसकी आशा बांट सकें।


(Usha Tirkey)

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