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मदर तेरेसा की संत घोषणा के अवसर पर कोलकाता स्थित मूल मठ में प्रार्थना सभा का आयोजन

In Church on September 5, 2016 at 3:04 pm


कोलकाता, सोमवार, 5 सितम्बर 2016 (ऊकान): संत तेरेसा की वाटिकन में संत पापा फ्राँसिस द्वारा संत घोषित किये जाने के अवसर पर कोलकाता के मिशनरीस ऑफ चैरिटी के मूल मठ में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

ऊका समाचार के अनुसार 4 सितम्बर को संत पापा द्वारा मदर तेरेसा को संत घोषित किये जाने की घटना को लोगों ने बड़े पर्दे पर सीधे प्रसारण में देखा। उन्होंने खुशी से ताली एवं घंटी बजायी तथा धर्मबहनों ने गाना गाया।

मिशनरीस ऑफ चैरिटी के मूल मठ में धर्मबहनों एवं स्वयंसेवकों के साथ सैकड़ों स्थानीय लोग संत घोषणा की घटना को देखने एवं प्रार्थना करने के लिए एकत्र थे जहाँ 19 साल पहले मदर तेरेसा का निधन हो गया था।

संत घोषणा समारोह को प्रसारण के माध्यम से दिखाये जाने हेतु तीन बड़े पर्दों का प्रबंध किया था, एक संत तेरेसा की कब्र के पास, दूसरा घर के आँगन में तथा तीसरा प्रार्थनालय में।

शहर के नागरिक अधिकारियों ने भी मूलमठ के निकट एक बड़े स्क्रीन की व्यवस्था की थी ताकि लोग मदर तेरेसा की संत घोषणा को देख सकें।

मूलमठ में लोगों के संचालन में धर्मबहनों की मदद हेतु सैन्य बलों को भी प्रदान किया गया था।

सिगनीस इंडिया के अध्यक्ष सुनिल लूकस ने ऊका समाचार से कहा, ″जब संत पापा ने मदर तेरेसा को संत घोषित कर सम्मानित किया तो मैंने एक भारतीय के रूप में गौरवान्वित महसूस किया।″

उन्होंने कहा, ″संत तेरेसा को हम आवासहीन लोगों के लिए आशा के प्रतीक के रूप में पाकर मैंने सम्मानित तथा आशीषित महसूस किया। उनसे मुलाकात करने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं दीनता महसूस कर रहा हूँ तथा उनकी निःस्वार्थ सेवा को आगे बढ़ाने हेतु चुनौती दिये जाने का अनुभव कर रहा हूँ।

मदर तेरेसा की संत घोषण के अवसर पर मूल मठ में रहने की इच्छा से स्पेन से कोलकाता आयीं अना पारेज़ ने कहा, ″लोगों से प्रेम करने एवं उन्हें स्वीकार करने के उनके रास्ते का हमें अनुसरण करना चाहिए।″

इस अवसर पर संत तेरेसा की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु अन्य धर्मों के नेता भी उपस्थित हुए। एड्रिक अली नामक एक मुस्लिम ने कहा, ″संत तेरेसा जिसने बहुत कुछ किया, वे ग़रीबों की मित्र थीं। उन्होंने सभी से प्रेम किया, हमारी स्थानीय भाषा बंगाली में बातें कीं और वे हमारे साथ एक थीं।″ हमने उन्हें खो दिया किन्तु उनमें हमने एक संत को पाया है।

हिन्दू नेता स्वामी सारादातमनन्दा ने कहा, ″संत तेरेसा ने मानवता की सेवा की, धर्म की हर सीमा को पार किया। जिन्हें हम कुरूप और गंदे समझते हैं उनके साथ उन्होंने अपना सा व्यवहार किया।″

भारत के लिए वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष सालवातोरे पेन्नाक्यो ने संत तेरेसा की कब्र पर उनकी संत घोषणा के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने कहा, ″वे भारत के लिए एक महान उपहार थी तथा आशा, आनन्द एवं शांति की साक्षी। संत तेरेसा की महान रहस्यात्मक शक्ति जरूरतमंद लोगों, भूखों, घायलों तथा कैदियों की मदद में निहित थी क्योंकि वे सभी उनके लिए ख्रीस्त के प्रतिरूप थे। वे कद में छोटी थीं किन्तु उनका विश्वास चट्टान के समान मजबूत था।″

उन्होंने बतलाया कि संत पापा ने संत तेरेसा को करुणा का प्रतीक कहा है तथा उनकी संत घोषणा करुणा की असाधारण जयन्ती वर्ष में किया जा रहा है।

धर्मबहनों ने समारोह का समापन गाना गाते हुए तथा ताली बजाकर एवं लोगों के बीच केक बांट कर किया।


(Usha Tirkey)

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