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शैतान के पास कलीसिया को नष्ट करने के दो हथियार

In Church on September 12, 2016 at 3:59 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए कहा कि विभाजन कलीसिया का विनाश कर देता है और शैतान कलीसिया के मूल पर आक्रमण करना चाहता है।

संत पापा ने प्रवचन में कुरिंथियों को लिखे संत पौलुस के पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि शैतान के पास कलीसिया को नष्ट करने के दो हथियार हैं, विभाजन एवं धन।

उन्होंने कहा कि विचारधारा में विभाजन तथा ईशशास्त्रीय समझ में असहमति आरम्भ से ही था जिसने कलीसिया को तोड़ दिया। शैतान मतभेद लाने के लिए ईर्ष्या, महत्वाकांक्षा एवं विचारों का बीज बोता है जिसके द्वारा युद्ध से, सब कुछ नष्ट हो जाता और शैतान आनंदित होता है। हम उस युद्ध के शिकार बनते हैं। संत पापा ने कहा कि यह मलिन विभाजन आतंकवादी के समान है तथा समुदाय में बकवास की भाषा द्वारा प्रहार करता है, बम फेंकता, नष्ट करता तथा एक-दूसरे से दूर कर देता है।

उन्होंने विभाजन का अर्थ एक दूसरे के विरूद्ध होना बतलाया तथा कहा कि कलीसिया में गहरी एकता है किन्तु शैतान उससे भी अधिक गहराई में चला जाता है। वह न केवल ख्रीस्तीय समुदाय में किन्तु ख्रीस्तीय एकता के मूल तक पहुँच जाता है।

संत पापा ने कुरिंथ की कलीसिया पर गौर करते हुए कहा कि वहाँ की कलीसिया में ख्रीस्तयाग के समय धनी और गरीब के बीच विभाजन था। येसु ने पिता से एकता के लिए प्रार्थना की थी किन्तु शैतान उसका नाश करने के प्रयास में लगा रहता है।

संत पापा ने विश्वासियों से अपील की कि वे कलीसिया को फूट द्वारा नष्ट न करें किन्तु उसकी एकता की रक्षा हेतु प्रार्थना करें। उन्होंने विश्वासियों को सचेत करते हुए कहा कि संत पौलुस ने 2000 वर्षों पर ख्रीस्तीयों से जो कहा था आज हमारे लिए भी लागू हो सकता है, ″भाइयो मैं आपकी प्रशंसा नहीं कर सकता क्योंकि आप अच्छाई के लिए नहीं किन्तु बुराई के लिए एकत्र होते हैं। कलीसिया जो ख्रीस्त के शरीर और रक्त को आपसी विभाजन के कारण अयोग्य रीति से ग्रहण करती है वह उसे अशुद्ध करती है। संत पौलुस के शब्दों में वे अपने लिए दण्डाज्ञ कमाते हैं। संत पापा ने विश्वासियों से एकता हेतु प्रार्थना करने की सलाह दी ताकि कलीसिया की जड़, जो ख्रीस्त का क्रूस बलिदान है जिसे हम प्रत्येक दिन मनाते हैं उसमें किसी तरह का विभाजन न हो।


(Usha Tirkey)

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