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संत पापा ने की प्रेरितिक राजदूतों के लिए ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान

In Church on September 17, 2016 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): दुनिया के कोने-कोने में सुसमाचार का प्रचार करने हेतु अपने आप से बाहर निकलें। इन्हीं शब्दों से संत पापा ने विश्व के विभिन्न हिस्सों से करुणा की जयन्ती मनाने हेतु रोम में एकत्रित प्रेरितिक राजदूतों के लिए ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान करते हुए उन्हें प्रोत्साहन दिया।

वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था में शनिवार को प्रेरितिक राजदूतों को सम्बोधित कर संत पापा ने आनन्द एवं उत्साह से विश्व के विभिन्न देशों में प्रेरिताई हेतु उनके समर्पण की चाह के लिए उन्हें धन्यवाद दिया तथा गौर किया कि बहुधा उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करनी पड़ती है। स्थानांतरण के इस क्रम में उन्हें उस स्थान, मित्रों, प्रिय वस्तुओं एवं कई अन्य चीजों को जिनको उन्होंने बनाया था छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है।

संत पापा ने कहा कि जब वे नये देश में पहुँचते हैं उन्हें और एक चीज से बाहर निकलना है वह है अपने आप से बाहर आना। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे वार्ता करें, संस्कृति एवं विचार करने के तरीकों का अध्ययन करें।

प्रवचन में उन्होंने बीज बोने के दृष्टांत पर चिंतन करते हुए कहा, ″ईशवचन को बिना किसी कृत्रिमता से बांटें।″

संत पापा ने इस बात को स्पष्ट किया कि लोग इस प्रेरिताई को एक नौकरी की तरह देख सकते हैं और यह सोच सकते हैं कि इस  प्रशासनिक कार्य को लोकधर्मी भी सम्पन्न कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि उन्हें समाज के सम्मानित लोगों के साथ काम करने का अवसर मिलता है किन्तु इसमें भी वे दुनियादारी की भावना से रहित, सादगी के साथ बर्ताव कर सकते हैं और इसके द्वारा लोगों को ईशवचन की सच्चाई की ओर प्रेरित कर सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि बीज बोने वाला बीज बोता है और रात को आराम करने चला जाता है किन्तु येसु कहते हैं कि बीच में अंकुरण होता तथा वह बढ़ता है। उन्होंने कहा कि एक प्रेरितिक राजदूत को भी ऐसा ही होना है उसे अपने आप से बाहर आकर प्रभु के पास आना है जो विकास की शक्ति प्रदान करते तथा बीज को बढ़ाते हैं। संत पाप ने उन्हें प्रार्थना करने की सलाह दी।

काम की शुरूआत उन्होंने आनन्द एवं उत्साह से करने का परामर्श दिया कठिनाई के समय में भी क्योंकि यह एक महान साक्ष्य है।

संत पापा ने कहा कि प्रेरितिक राजदूत तीन तरह से निकलने के द्वारा अपनी सेवाएँ देते हैं, शारीरिक श्रम, यात्रा एवं खानाबदोश की जिन्दगी द्वारा।

संत पापा ने प्रेरितिक राजदूतों द्वारा कलीसिया की सेवा हेतु उन्हें धन्यवाद दिया तथा कहा कि यह एक भ्रातृत्व का कार्य है वे जहाँ कहीं भी हैं अपने भाइयों के लिए प्रार्थना करें। वे प्रार्थना करना न भूलें क्योंकि वे जो बोते हैं उन्हें बढ़ाने वाले ईश्वर हैं।


(Usha Tirkey)

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