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नीस में आक्रमण के शिकार लोगों के परिवारवालों से संत पापा की मुलाकात

In Church on September 24, 2016 at 3:02 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 24 सितम्बर 2016 (वीआर सदोक): ″मैं करुणावान ईश्वर से सभी प्रकार के घायल लोगों के लिए प्रार्थना करना चाहता हूँ तथा उन लोगों को भी नहीं भूलता हूँ जो अस्पताल में होने के कारण यहाँ नहीं आ सके। कलीसिया आपके अति करीब है तथा महान करुणा द्वारा आपका साथ देना चाहती है। इन दिनों जो आप कठिन दौर से गुजर रहे हैं मैं प्रभु से सहायता की याचना करता हूँ कि वे आपके हृदय को शांति और भाईचारे की भावना से भर दे।″ यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में फ्राँस के नीस शहर में हुए हमले के शिकार लोगों के परिवारवालों से मुलाकात करते हुए कही।

फ्रांस के नीस शहर में 14 जुलाई को राष्ट्रीय दिवस ‘बास्तील डे’ पर, आतिशबाज़ी देखने के लिए पहुंची भीड़ पर एक लॉरी के हमले में 84 लोगों की मौत हो गई थी।

संत पापा ने कहा, ″मैं गहरे दुःख के साथ आपसे मुलाकात कर रहा हूँ जो शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से पीड़ित हैं क्योंकि उत्सव के अवसर पर हिंसा ने अंधे रूप से उन पर आक्रमण किया। मैं आपके दुखों में शामिल होना चाहता हूँ। यह दुःख और बढ़ जाता है जब में उन बच्चों और उनके पूरे परिवार की याद करता हूँ जिनका जीवन बहुत ही नाटकीय ढंग से अचानक तोड़ दिया गया। मैं आप प्रत्येक को अपने सहचर्या, सामीप्य एवं प्रार्थना का आश्वासन देता हूँ।

संत पापा ने हमले में मृत सभी लोगों की याद करते हुए उनकी आत्मा की आनन्द शांति हेतु प्रार्थना की तथा घायल एवं दुखित सभी प्रियजनों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि कलीसिया उनके अति करीब है तथा महान करुणा द्वारा उनका साथ देना चाहती है।

संत पापा ने इस दुखद घटना में भी एक आशा की किरण की ओर इंगित कर कह कि इस घटना के बाद नीस के चारों ओर लोगों में एकात्मता एवं सहचर्या का भाव दिखाई दिया। उन्होंने उन लोगों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने वहाँ तत्काल राहत सेवा प्रदान की। संत पापा ने वहाँ की काथलिक समुदाय, धर्माध्यक्ष अंद्रेया मारकू एवं स्वयंसेवक के प्रति भी अपनी कृतज्ञता प्रकट की जिन्होंने अपनी बहुमूल्य सेवा प्रदान की जो आशा का एक सुन्दर चिन्ह है। संत पापा ने अंतरधार्मिक संबंध की भी सराहना की तथा कहा कि यह बहुत अधिक सजीव है और यही इस नाटकीय घटना के दुःख को दूर कर सकता है।

संत पापा ने सभी लोगों के बीच उदार वार्ता एवं भाईचारा पूर्ण संबंध को प्रोत्साहन देने का परामर्श दिया तथा कहा कि यह सभी राजनीतिक एवं धार्मिक नेताओं के लिए तात्कालिक प्राथमिकता है। जब कभी अपने आप की ओर मुड़ने तथा घृणा का जवाब घृणा एवं हिंसा का जवाब हिंसा से देने का प्रलोभन होता है तो हमें हृदय के सच्चे परिवर्तन की आवश्यकता होती है और यही संदेश है जिसको येसु ने सुसमाचार में हमें बतलाया है। हम बुराई का प्रत्युत्तर ईश्वर के कार्य, क्षमा, प्रेम तथा दूसरों के प्रति सम्मान द्वारा दें।


(Usha Tirkey)

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