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रोगियों के मित्र, बहनें एवं माता बनने से कभी न थकें, संत पापा

In Church on September 24, 2016 at 2:59 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 24 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): ″कलीसिया उन लोगों के प्रति समर्पित होना और उनके करीब रहना चाहती है जो दुःख सह रहे हैं ताकि उन्हें सांत्वना, शांति और साहचर्य प्रदान कर सके।″ उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 24 सितम्बर को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में, करुणा को समर्पित अस्पताल धर्मबहनों से कही।

130 धर्मबहनों से मुलाकात करते हुए संत पापा ने उन्हें पिता की करुणा का ठोस चिन्ह कहा तथा बतलाया कि उनकी संस्थापिका प्रभु सेविका तेरेसा ओरसीनी डोरिया पमफीली लान्दी को प्राप्त प्रेरणा दिखलाता है कि ईश वचन उन लोगों का जीवन बदल देता है जो उनके शिष्य बन जाते हैं। येसु के वचन, ″जब मैं बीमार था और तुम मुझसे भेंट करने आये,″ से प्रेरित होकर उन्होंने बीमारों की सेवा के प्रेरिताई को अपनाया।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया उन्हीं की तरह पीड़ित लोगों के प्रति समर्पित होना तथा उनके करीब रहने की जिम्मेदारी को बनाये रखना चाहती है।

उन्होंने धर्मबहनों को सम्बोधित कर कहा, ″उन्होंने अपना जीवन सबसे बढ़कर उन भाई बहनों की सेवा के लिए अर्पित किया है जो अस्पताल में हैं ताकि उनकी उपस्थिति एवं सेवा द्वारा रोगी आराम महसूस कर सकें।″ उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए उन्हें लम्बे भाषण की आवश्यकता नहीं है बल्कि अपना स्नेह, चुम्बन, रोगी के निकट शांत खड़े होकर और मुस्कान देकर उसे पूरा कर सकती हैं।

संत पापा ने धर्मबहनों को चुनौतियों में धीर बने रहने की सलाह देते हुए कहा कि कठिनाईयों के बावजूद वे अपनी इस महत्वपूर्ण सेवा को कभी न त्यागें। कभी-कभी दुनियादारी की संस्कृति धर्मबहनों की उपस्थिति के बावजूद अस्पताल से धार्मिक उदाहरण को ले जाना चाहती है। जब ऐसा होता है तब यह अपने साथ मानव सम्पर्क के दुखद अभाव को साथ लेकर आती है।

संत पापा ने कहा कि धर्मबहनें रोगियों के मित्र, बहनें एवं माता बनने से कभी न थकें। प्रार्थना हमेशा एक जीवन रक्त के समान है जो हमारे मिशन को मजबूती प्रदान करता है। जब वे बीमार लोगों के पास जाएँ जो सदा अपने साथ शांति और आनन्द लेकर जाएँ जो कि पवित्र आत्मा का फल है।

संत पापा ने कहा, ″अस्पताल के पलंग पर सदा येसु रहते हैं उस व्यक्ति के रूप में जो पीड़ित है तथा वे ही हैं जो हम प्रत्येक से सहायता की मांग करते हैं।″ उन्होंने धर्मबहनों के लिए प्रार्थना की कि करुणा की पवित्र माता रोगियों की सेवा में प्रतिदिन उनका साथ दे।


(Usha Tirkey)

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