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जोर्जिया के सरकारी अधिकारियों से संत पापा की मुलाकात, शांति बनाये रखने की अपील

In Church on September 30, 2016 at 3:43 pm


त्बिलीसी, शुक्रवार, 30 सितम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 30 सितम्बर से 2 अक्टूबर की अपनी प्रेरितिक यात्रा के प्रथम पड़ाव, जोर्जिया एवं अज़रबैजान की राजधानी त्बिलीसी स्थित राष्ट्रपति भवन में, वहाँ के राष्ट्रपति जोर्जी मारगवेलाशविली, राजनयिकों, तथा सरकारी एवं सामाजिक अधिकारियों से मुलाकात की।

अपने वक्तव्य में उन्होंने उस देश की यात्रा का सुअवसर देने हेतु ईश्वर को धन्यवाद दिया तथा संत पापा जॉन पौल द्वितीय के शब्दों का स्मरण करते हुए जोर्जिया के ख्रीस्तीय समुदाय को लगातार विकसित हो रही जोर्जियाई संस्कृति का बीज कहा जो अब फलने लगी है।

जोर्जिया एवं अज़रबैजान के इतिहास एवं उसके मूल्यों पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा, ″आपके देश का सदियों पुराना इतिहास दिखलाता है कि यह अपनी संस्कृति, भाषा और परम्परा के मूल्यों पर टिका है। यह आपके देश को पूर्णतया एवं खासकर, यूरोपीय सभ्यता के मूल में स्थापित करता है। साथ ही साथ, इसके भौगोलिक स्थिति से स्पष्ट है कि जोर्जिया कुछ हद तक यूरोप एवं एशिया के बीच सेतु है, एक कड़ी जो लोगों के बीच सम्पर्क एवं संबंध को प्रोत्साहित करता है। कई सालों से इसने व्यापार, वार्ता तथा विभिन्न संस्कृतियों के बीच विचारों एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया है।″

संत पापा ने देश की आजादी की याद कर कहा, ″जोर्जिया की आजादी की घोषणा के 25 साल गुजर चुके हैं। इस अवधि में जब जोर्जिया ने अपनी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त किया है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण किया है, उसे मजबूती प्रदान की है एवं विकास के सबसे समावेशी और प्रामाणिक रास्ते की खोज की है। ये सब कुछ, महान त्याग के बिना सम्भव नहीं था जिसका सामना जनता ने स्वतंत्रता की तीव्र अभिलाषा को पूरा करने के लिए साहस पूर्वक किया है। मैं आशा करता हूँ कि शांति एवं विकास का रास्ता समाज के सभी लोगों की संयुक्त प्रतिबद्धता द्वारा आगे बढ़ेगा तथा स्थिरता, न्याय तथा कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित होगी। इस प्रकार सभी के लिए विकास एवं अवसर को प्रोत्साहन मिलेगा।

जनता एवं राज्यों के बीच शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, क्षेत्र में प्रामाणिक और स्थायी प्रगति के लिए अपरिहार्य एवं प्रथम शर्त है जो एक-दूसरे को सम्मान एवं महत्व दिये जाने की मांग करता है और जो अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे के भीतर, हर देश के संप्रभु अधिकारों के लिए सम्मान को कभी अलग नहीं रखता। इस प्रकार, स्थायी शांति और सच्चे सहयोग की ओर ले जाने वाले मार्ग को  तैयार किया जा सकेगा। राष्ट्रों में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए हमें राज्यों के बीच न्यायपूर्ण एवं स्थायी रिश्तों के लिए प्रासंगिक सिद्धांतों की याद करनी होगी।

संत पापा ने सबसे बढ़कर मानव प्राणी को प्राथमिकता देने की सलाह देते हुए कहा, ″हमें पूर्ण हृदय से मानव प्राणी एवं उनकी वास्तविक परिस्थिति को प्राथमिकता देनी होगी तथा हिंसा को बढ़ावा देने वाली विविधताओं के प्रलोभन में पड़ने से बचना होगा। लोगों के बीच एवं समाज में जो विनाशकारी परिस्थिति उत्पन्न करता है शोषित किये जाने, कलह का संघर्ष में तथा संघर्ष का अनन्त त्रासदी में परिणत हो जाने से दूर, जाति, भाषा, राजनीति अथवा धर्म के हर विभाजन सार्वजनिक हित के पक्ष में सभी के लिए आपसी समृद्धि का एक स्रोत बन सकता है। यह मांग करता है कि प्रत्येक अपनी पहचान, सम्भवनाओं और उन सब से बढ़कर, अपनी मातृभूमि में शांति पूर्ण सहअस्तित्व के साथ जीवन यापन करे। अथवा स्वतंत्र रूप से अपनी मातृभूमि में लौट सके यदि किसी कारण से वह उसे छोड़ने के लिए मजबूर था।

संत पापा सरकारी अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा, ″मैं आशा करता हूँ कि सरकारी अधिकारी अनसुलझे राजनीतिक सवालों के बावजूद ऐसी परिस्थिति में भी लोगों का ख्याल रखें तथा ठोस समाधान ढूँढ़ने हेतु पूर्ण रूपेन समर्पित हों। यह दूरदर्शिता तथा लोगों की प्रमाणिक अच्छाई को पहचानने के साहस की मांग करता है जो दृढ़ संकल्प और विवेक के साथ उसका पालन करने के द्वारा सम्भव है। इस तरह यह आवश्यक है हम हमारी नजरों के सामने दूसरों की पीड़ा को रखें ताकि दृढ़ता के साथ उस रास्ते पर आगे बढ़ सकें जो धीमी और श्रमसाध्य होने के बावजूद आकर्षक एवं स्वतंत्र है एवं शांति की ओर ले चलता है।

संत पापा ने स्थानीय काथलिक कलीसिया की सराहना करते हुए कहा कि यह इस देश में सदियों से उपस्थित है तथा मानव विकास एवं उदार कार्यों के प्रति समर्पण की अपनी खासियत को बनाये रखी है, जोर्जिया के लोगों के सुख-दुःख में शामिल है, देश के कल्याण एवं शांति के लिए अधिकारियों एवं समाज के लोगों को अपना बहुमूल्य योगदान देने हेतु कृतसंकल्प है।

संत पापा ने जोर्जिया की काथलिक कलीसिया से आग्रह किया कि वे जोर्जियाई समाज के विकास हेतु अपने सच्चा सहयोग को जारी रखे। उन्होंने ख्रीस्तीय परम्परा का साक्ष्य देने के लिए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की जिसके द्वारा जरूरतमंद लोगों की मदद हेतु एकता एवं समर्पण को प्रोत्साहन मिलती है जो देश की प्राचीन जोर्जियाई ऑर्थोडॉक्स कलीसिया तथा अन्य धार्मिक समुदायों के बीच वार्ता को नवीकृत तथा बलिष्ठ करता है। संत पापा ने जोर्जिया के लिए ईश्वर के आशीर्वाद एवं शांति की याचना की।


(Usha Tirkey)

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