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संत पापा फ्राँसिस दवारा शाँति के लिए प्रार्थना

In Church on September 30, 2016 at 3:45 pm



त्बिलीसी, शुक्रवार, 30 सितम्बर, 2016 ( सेदोक) : अपनी तीन दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के दौरान सन्त पापा फ्राँसिस शुक्रवार 30 सितम्बर को जॉर्जिया में स्थानीय समयानुसार 4 बजे पूर्वाहन त्बिलीसी के संत सिमोन बार साब्बाए गिरजाघर में अस्सिरियाई एवं खलदेई काथलिक समुदायों के करीब 300 ख्रीस्तीयों से भेंट की। गिरजाघर के प्रवेश द्वार पर बबिलोन के खलदेई प्राधिधर्माध्यक्ष और पल्ली पुरोहित द्वारा संत पापा फ्राँसिस का स्वागत किया गया। वहाँ उपस्थित ख्रीस्तीयों ने जुलुस में गाना गाते हुए गिरजाघर में संत पापा का स्वागत किया। संत पापा फ्राँसिस ने शाँति हेतु निम्न प्रार्थना की।

हे प्रभु येसु, हम आपके पवित्र क्रूस की आराधना करते हैं जो हर अलगाव व बुराई की जड़ पाप से हमें मुक्त करता है। हम आपके जी उठने की घोषणा करते हैं जो विफलता और मौत की दासता से हर मनुष्य को मुक्त करता है। हम महिमा में आपके आने का इन्तजार करते हैं जिससे न्याय, खुशी और शांति के राज्य की परिपूर्णता होगी।

हे प्रभु येसु, आपने अपने पवित्र दुःखभोग द्वारा, घृणा और स्वार्थ से भरे हमारे दिल की कठोरता को जीत लिया है। अन्याय और दुराचार के शिकार लोगों को उनकी पीड़ा से बचाया है। आपने इस दुनिया में आकर पाप का नाश किया और मृत्यु पर विजय पाई है।

हे प्रभु येसु, अत्याचार सहते ख्रीस्तीयों, कई निर्दोष बच्चों, बूढ़ों और पीड़ितों की पीड़ाओ को अपने क्रूस में सम्मिलित कीजिए। दुर्व्यवहार के शिकार, स्वतंत्रता और गरिमा से वंचित, गंभीर रुप से घायल लोगों के उपर पुनरुत्थान के प्रकाश से आलोकित कीजिए। निर्वासितों, शरणार्थियों, और जीवन से निराश लोग अपने जीवन की अनिश्चितता में आपके राज्य के स्थायी भक्ति का अनुभव करें।

हे प्रभु येसु, युद्ध से प्रभावित लोगों पर आपके क्रूस की छाया पड़े। वे सुलह, संवाद और क्षमा का तरीका अपना सकें। बमबारी से अक्रांत लोग आपके पुनरुत्थान की खुशी का अनुभव कर सकें । इराक और सीरिया को तबाही से उपर उठाईए। अपने बिखरे हुए बच्चों को अपने कोमल छत्र-छाया में एकत्रित कर लीजिए। प्रवासी ख्रीस्तीयों को संभाले रहिए तथा उन्हें विश्वास और प्रेम में संयुक्त बने रहने की कृपा प्रदान कीजिए।

हे कुँवारी मरिया शाँति की रानी, आप तो क्रूस तले खड़ी थी, हमारे पापों के लिए अपने पुत्र से क्षमा की याचना कीजिए। आप जिन्होंने उनके क्रूस विजय और पुनरुत्थान पर कभी संदेह नहीं किया, हमारी आशा और विश्वास को मजबूत कीजिए। आप महिमा में रानी के रूप में सिहासन पर विराजमान हैं, हमें सेवा का मार्ग और प्रेम की महिमा सिखाएँ। आमेन


(Margaret Sumita Minj)

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