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पवित्र आत्मा के प्रति खुला रहें जो आगे ले चलता है, संत पापा

In Church on October 6, 2016 at 3:38 pm

 


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 अक्तूबर 2016 (वीआर सेदोक): सच्चा धार्मिक सिद्धांत कानून का कठोर पालन मात्र नहीं है जो विचारधारा को खुशामद करता बल्कि यह ईश्वर की प्रकाशना है और जो लोग पवित्र आत्मा के प्रति उदार होते हैं वे इस प्रकाशना को अधिक समझ सकते हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में की।

संत लुकस रचित सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए उन्होंने ″पिता के महान वरदान″ पवित्र आत्मा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यही वह शक्ति है जो कलीसिया को साहस प्रदान करता है। यह कलीसिया का सितारा है जो उसके आगे चलता है उनके बिना रास्ते बंद और भय युक्त हैं।

संत पापा ने तीन मनोभावों को प्रकट किया जो आत्मा स जुड़े हैं।

पहला जैसा कि संत पौलुस गलातियों को फटकारते हैं क्योंकि वे विश्वास करते थे कि नियमों के अर्थ प्रदान करने वाले येसु नहीं किन्तु नियम द्वारा हम न्यायसंगत ठहराये जायेंगे। इस तरह वे अत्यधिक कठोर थे। वे उन्हीं लोगों की तरह थे जिन्होंने येसु पर आक्रमण किया था और येसु ने उन्हें ढोंगी की संज्ञा दी थी।

संत पापा ने कहा, ″नियम के प्रति आसक्ति पवित्र आत्मा की अवहेलना है। पवित्र आत्मा के साथ आने वाली ख्रीस्त की मुक्ति को अस्वीकार करना है। यह उचित है कि हम संहिता का पालन करें  आज्ञाओं को मानें किन्तु पिता द्वारा प्राप्त महान वरदान से अलग नहीं किन्तु उनके पुत्र एवं पवित्र आत्मा के द्वारा, जिनके माध्यम से हम नियमों को गहराई से समझ सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि हम नियमों को समझते हैं किन्तु उसकी भावनाओं को कम नहीं करते और यही उन लोगों की समस्या थी जो पवित्र आत्मा की अवहेलना करते एवं अपने रास्ते आगे बढ़ते थे। संत पापा ने कहा कि इसके द्वारा हम प्रलोभन में पड़ सकते हैं और जिसके लिए संत पौलुस ने गलातियों को फटकारा था जो विचारधारा के साथ प्रचार करते थे जबकि ईश्वर की प्रकाशना अस्पष्ट थी। ईश्वर प्रतिदिन प्रकट होते हैं किन्तु हमें उन्हें पहचानने का रास्ता निकालना है।

पवित्र आत्मा के दूसरे मनोभाव के बारे संत पापा ने बतलाया कि यह ‘उत्साह’ का मनोभाव है। उन्होंने कहा कि जब हम पवित्र आत्मा की प्रेरणा को ध्यान दिए बिना अपना काम करने लगते हैं तो हम गुनगुने बन जाते हैं।

तीसरे मनोभाव के बारे संत पापा ने कहा कि जब हम पवित्र आत्मा के प्रति खुले होते हैं तो वह हमें साहस के साथ आगे ले चलता है जैसा कि प्रेरितों ने पेंतेकोस्त के दिन अनुभव किया। उनका भय दूर हो गया तथा उन्होंने पवित्र आत्मा को ग्रहण किया। संत पापा ने कहा कि ईशवचन को समझने के लिए हमें पवित्र आत्मा के प्रति खुला होना है।

संत पापा ने विश्वासियों को चिंतन हेतु निमंत्रण देते हुए कहा कि हम अपने आप से पूछ सकते हैं कि क्या हमने दिनभर में पवित्र आत्मा की अवहेलना की है? क्या मेरा जीवन उदासीनता का जीवन है जो पवित्र आत्मा को अस्वीकार करता और मुझे आगे बढ़ने नहीं देता है? मैं अपने आपको सतत् प्रार्थना द्वारा पवित्र आत्मा के लिए खोल दूँ ताकि वे मेरे लिए सुसमाचार का आनन्द प्रदान करें, येसु के सच्चे सिद्धांतों के समझने की शक्ति प्रदान करें। इस प्रकार, हम दूसरों के लिए भी येसु को बांट सकेंगे एवं उन्हें मुक्ति प्राप्त करने में सहायता दे सकें।

उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर हमें कृपा दे ताकि हम पवित्र आत्मा के प्रति खुला हो सकें तथा लोगों को खुशामद करने हेतु पवित्र आत्मा की अवहेलना न करें।


(Usha Tirkey)

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