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माता मरियम के सम्मान में वाटिकन में जागरण प्रार्थना

In Church on October 10, 2016 at 3:27 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 10 अक्तूबर 2016 (वीआर सेदोक):  संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार संध्या को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में माता मरियम के सम्मान में जागरण प्रार्थना का नेतृत्व किया।

माता मरियम की जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित इस जागरण प्रार्थना का शुभारम्भ शोभायात्रा से की गयी जिसमें विश्व के 94 तीर्थस्थलों के प्रतिनिधियों ने माता मरियम की प्रतिमा, तस्वीर, बैनर और ध्वज आदि लेकर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में प्रवेश किया।

रोजरी माला, भक्तिगीतों एवं माता मरियम के सम्मान में विभिन्न स्मारकों के साथ एकत्रित विश्वासियों को सम्बोधित कर संत पापा ने माता मरियम के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति पर प्रकाश डाला। अपने संदेश में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रोजरी प्रार्थना हमारे जीवन की समस्याओं को दूर नहीं कर लेती है बल्कि इस बात की मांग करती है कि हम अपने दैनिक जीवन में हमारे बीच ख्रीस्त की उपस्थिति के चिन्ह को पहचान सकें।

उन्होंने रोजरी माला के भेदों पर गौर करते हुए कहा, ″इस जागरण प्रार्थना में हमने मरियम के साथ येसु के जीवन के आधारभूत पलों पर चिंतन किया है, दुनिया में ख्रीस्त के मिशन के पूरा होने पर मनन किया है। पुनरुत्थान जो पिता के असीम प्रेम की निशानी है जो सब कुछ को जीवन में सुरक्षित रखना चाहते हैं तथा जो हमारे भावी स्थिति का पूर्वाभास है। स्वर्गारोहण जो ख्रीस्त का पिता की महिमा में सहभागी होना है जहाँ हमारी मानवता को भी विशेष स्थान प्राप्त होगा। पेंतेकोस्त, इतिहास में पवित्र आत्मा के नेतृत्व में कलीसिया की प्रेरिताई की अभिव्यक्ति है तथा अंतिम भेद जिसमें माता मरियम को स्वर्गीय महिमा प्राप्त होती है उस पर हमने चिंतन किया है। इस प्रकार आरम्भिक शताब्दियों से ही माता मरियम को करुणा की माता के रूप में पहचाना जाता है।″

संत पापा ने कहा कि रोजरी प्रार्थना कई दृष्टिकोणों से इतिहास में ईश्वर की करुणा का सारांश है जो उन लोगों के लिए मुक्ति इतिहास बन जाता है जो अपने आप को ईश्वर की कृपा हेतु खोलते हैं।

माता मरियम हमें ख्रीस्त के शिष्य होने के अर्थ को समझने में मदद करती हैं। उनकी अनन्त माता चुनी जाकर उन्होंने उनका शिष्य बनना सीखा। उनका पहला काम था ईश्वर को सुनना। उन्होंने दूत के संदेश का पालन किया तथा दिव्य मातृत्व के रहस्य को स्वीकार करने के लिए अपने को उदार बनाया। उन्होंने येसु का अनुसरण किया तथा उनके मुख से निकले हर शब्द पर ध्यान दिया और सभी बातों को अपने हृदय में संचित रखा। इस प्रकार, वे ईश पुत्र द्वारा किये गये कार्यों के प्रति विश्वास जगाने हेतु जीवित स्मारक बन गयी हैं। संत पापा ने कहा किन्तु सुनना मात्र काफी नहीं है, यह निश्चय ही, पहला कदम है किन्तु सुनने के बाद उसे ठोस कार्य में परिणत करना जरूरी है। माता मरियम ने इसका उदाहरण देते हुए अपनी कुटुम्बनी एलिजाबेथ की सेवी की।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना का आह्वान करते हुए कहा कि हम इस संध्या बेला में हमारी स्वर्गीय प्यारी माता मरियम से अर्जी करें ताकि वे हमारी रक्षा करें, मदद दें एवं हमारे जीवन के प्रत्येक दिन हमारे लिए आशीष की कामना करें।


(Usha Tirkey)

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