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कन्धामाल ख्रीस्तीय बने अमरीकी फिल्म के केन्द्र

In Church on November 15, 2016 at 2:33 pm


इन्डियाना, अमरीका, मंगलवार, 15 नवम्बर 2016 (ऊका समाचार): ओडिशा के कन्धामाल में हिन्दु चरमपन्थियों की हिंसा का शिकार बने लोगों की समुत्थान शक्ति पर अमरीका में निर्मित तथा जेसन कोहेन द्वारा निर्देशित फिल्म को केन्द्रित रखा गया है।

इन्डियाना के नोत्र दाम विश्वविद्यालय के तत्वाधान में निर्मित अमरीकी फिल्म “अन्डर सीज़र्स सोर्ड” समस्त विश्व में अपने विश्वास के कारण उत्पीड़ित ख्रीस्तीयों की कहानी पर केन्द्रित है। फिल्म के सहनिर्माता तथा नोत्र दाम विश्वविद्याल में विज्ञान के प्राध्यापक डेनिएल फिलपोट ने कहा, “उत्पीड़न के शिकार ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों की समुत्थान शक्ति उल्लेखनीय है। वे केवल उत्पीड़ित और प्रताड़ित नहीं हैं। इस तथ्य के प्रति समझदारी से ही उनके प्रति हमारी एकात्मता शुरु हो सकती है।”

26 मिनटों वाली उक्त फिल्म में भारत, तुर्की तथा विश्वास के ख़ातिर अन्य देशों में उत्पीड़ित  ख्रीस्तीय समुदायों की दिनचर्या को दर्शाया गया है। इसमें ख्रीस्तीय परिवारों, शरणार्थियों, प्रान्तीय मानवाधिकार संगठनों के कार्यकर्ताओं तथा साथ ही विद्धानों के साथ भेंटवार्ताएँ शामिल हैं।

न्यूज़ रिपोर्टों के अनुसार, “अन्डर सीज़र्स सोर्ड” फिल्म सताये हुए लोगों के “रचनात्मक रवैये” पर केन्द्रित है। इसमें दर्शाया गया है कि किस तरह प्रताड़ना के बावजूद ये लोग फिर से उठने तथा अपने जीवन को नये सिरे से शुरु करने के लिये तैयार हुए हैं।”

कन्धामाल में 2007 एवं 2008 के दौरान हुई ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा में कम से कम एक सौ लोगों के प्राण चले गये थे तथा लगभग 80 गिरजाघरों को आग के हवाले कर दिया गया था। फिल्म में एक विधवा के साथ बातचीत को दर्शाया गया है जिसके पति को हिन्दू धर्म न स्वीकार करने के लिये उसके दो बच्चों एवं पत्नी के समक्ष घोर यातनाएँ देकर मार डाला गया था। विधवा कहती हैं “वे मेरे पति को बुरी तरह पीटते रहे और हम बन्द करने के लिये उनसे अनुनय –विनय करते रहे। उन्होंने साईकिल की चेन मेरे पति के गले में डाली तथा उसे एक किलो मीटर तक घसीटते ले गये।”

जॉर्ज टाऊन के प्राध्यापक एवं मानवाधिकार विशेषज्ञ तिमोथी शाह ने कहा, “ख्रीस्तीय धर्मानुयायी उत्पीड़न का किस प्रकार प्रत्युत्तर देते हैं यह जानना सम्पूर्ण विश्व के लिये महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि इस फिल्म से लोगों में अन्यों के दुखों के प्रति चेतना जागृत होगी तथा एकात्मता का प्रसार हो सकेगा।

काथलिक न्यूज़ एजेन्सी के अनुसार फिल्म ऑनलाईन पर निशुल्क उपलब्ध है।


(Juliet Genevive Christopher)

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