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करितास इंटरनैशनल के प्रतिनिधि मंडल से संत पापा ने कहा

In Church on November 17, 2016 at 3:27 pm

 


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 17 नवम्बर 2016 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 17 नवम्बर को, वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में करितास इंटरनैशनल के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात कर, कलीसिया में उदार कार्यों के प्रति उनके समर्पण हेतु उन्हें धन्यवाद दिया।

80 सदस्यों के इस प्रतिनिधि मंडल को सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, ″कलीसिया का अस्तित्व सुसमाचार प्रचार करने के लिए है किन्तु सुसमाचार प्रचार विभिन्न परिस्थितियों को स्वीकार करने की मांग करता है, खासकर, परिवार, सामाजिक जीवन एवं शांति, न्याय और विकास के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय जीवन पर भी ध्यान देने की मांग करता है।″ उन्होंने कहा कि यही कारण है कि हमें सबसे कमजोर लोगों का समाज से बहिष्कृत किये जाने के विरूद्ध कार्य करना है ताकि वे भी समाज में सम्मिलित किये जा सकें। संत पापा ने याद दिलाया कि हमारा समाज बहुधा ‘खाई’ की संस्कृति द्वारा शासित होता है। जिसके कारण उदासीनता से बाहर आने एवं एकात्मता की भावना में बढ़ने सीखना आवश्यक है और यह हमें समझने में मदद देता है कि विभिन्न देशों के राष्ट्रीय करीतास तथा कलीसिया में उनकी खास भूमिका प्रेरिताई हेतु कितना महत्वपूर्ण है।

संत पापा ने इस बात को स्पष्ट किया कि करीतास के सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता नहीं किन्तु कलीसियाई संगठन है जो कलीसिया की प्रेरिताई में भाग लेती है। ″आप संत पापा एवं धर्माध्यक्षों को उनके उदारता के कार्यों में सहायता देने के लिए बुलाये गये हैं।″ सुसमाचार एवं कलीसिया के प्रकाश में ही विश्व में न्याय एवं उदारता चमकती है, जिसमें गरीब शामिल होते हैं ताकि अपने विकास के लिए वे स्वयं मुख्य पात्र बन सकें।

संत पापा ने करितास इंटरनैशनल के सभी सदस्यों को उनके सहयोग के लिए पूरी कलीसिया की ओर से धन्यवाद दिया तथा प्रोत्साहन दिया कि वे इस प्रेरिताई को जारी रखें। विश्व में सुसमाचार के आनन्द को फैलाते रहें, विशेषकर, जो पीछे छोड़ दिये गये हैं बल्कि उन लोगों के बीच भी जिनमें चीजों को बदल देने की क्षमता है।

संत पापा ने कहा कि गरीबी, भूख, बीमारी एवं शोषण अपरिहार्य नहीं हैं और न ही ये परिस्थितियाँ स्थायी रह सकती हैं। सुसमाचार की शक्ति पर भरोसा रखकर हम निश्चय ही चीजों में परिवर्तन लाने हेतु मदद कर सकते हैं, कम से कम उन्हें बेहतर बनाने में।

संत पापा ने सदस्यों का आह्वान किया कि वे नबी के समान साहसी बनें तथा उन सभी चीजों का बहिष्कार करें जो व्यक्ति को गौण करता एवं उसे शोषण का शिकार बनाता है।

संत पापा ने करितास इंटरनैशनल द्वारा विस्थापन विषय पर आंदोलन चलाये जाने के प्रति प्रसन्नता जाहिर की तथा आशा व्यक्त की कि यह अच्छा प्रयास शरणार्थियों एवं विस्थापितों के स्वागत हेतु अनेक हृदयों को खोलेगा ताकि वे हमारे समुदाय में पूर्ण रूपेन स्वीकार किये जाने का एहसास कर सकेंगे।

संत पापा ने उन्हें लोगों, समुदायों एवं विश्वासियों के बीच शांति एवं मेल-मिलाप के निर्माता बनने का प्रोत्साहन दिया तथा कहा कि व्यक्ति की प्रतिष्ठा को अपने ध्यान का केंद्रविन्दु बनायें। गरीबी के विरूद्ध संघर्ष करें, साथ ही साथ, ग़रीबों से सीख लें। उनके सादगी भरे जीवन, मूल्यों एवं एकात्मता तथा कठिनाईयों का सामना करने की भावना से प्रेरणा लें, विशेषकर, उनके दुखों से जो ख्रीस्त के दुःख का अनुभव है। इस प्रकार, प्रभु के प्रति उनकी आस्था एवं प्रार्थना द्वारा भी शिक्षा ग्रहण करें।

संत पापा ने उन्हें धर्माध्यक्षों के मेषपालीय कार्यों में सहयोग की आशा करते हुए कहा कि विश्वासी समुदाय में उदारता का साक्ष्य देते हुए वे सुसमाचार की घोषणा करें।


(Usha Tirkey)

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