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सबसे अधिक दुःख का कारण, विश्वासघात

In Church on November 17, 2016 at 3:29 pm

 


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 17 नवम्बर 2016 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में, बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने प्रवचन में कहा कि येसु के हृदय को सबसे अधिक पीड़ा विश्वासघात से होती है।

संत पापा ने प्रवचन में संत लूकस रचित सुसमाचार के उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु येरूसालेम मंदिर के निकट पहुँचकर उसपर विलाप करते हैं क्योंकि उसने ईश्वर के आगमन को नहीं पहचाना।

संत पापा ने कहा, ″उन्होंने विलाप किया क्योंकि उन लोगों ने उनके आगमन को नहीं पहचाना।″ यह घटना न केवल इतिहास में घटी और येसु के साथ समाप्त हो गयी किन्तु यह प्रत्येक दिन की घटना है।

संत पापा ने कहा कि हम में से प्रत्येक इस्राएली लोगों की तरह पाप में गिर सकते हैं। येरूसालेम की तरह हम भी हम ईश्वर के आगमन को पहचानने से चूक सकते हैं। प्रभु प्रत्येक दिन हमारे पास आते हैं, वे हरेक दिन हमारे हृदय द्वार खटखटाते हैं अतः हमें इसे पहचानने सीखना है। हम अपनी दुखद परिस्थिति में ही पड़े न रहें।

प्रभु के आगमन को पहचानने हेतु संत पापा ने अंतःकरण की जाँच प्रत्येक दिन करने की सलाह दी। ″क्या आज प्रभु मुझसे मिलने आये? क्या मैंने कुछ आवाज सुनी? उनका अनुसरण अधिक करीबी करने की प्रेरणा पर क्या मैंने ध्यान दिया? उदारता के कार्य करने एवं अधिक प्रार्थना करने की प्रेरणा को क्या मैं सुन पायी? हम बहुधा प्रभु के पुकार के प्रति सचेत नहीं रहते हैं जो हमें कई घटनाओं के माध्यम से हमसे मुलाकात करने आते हैं।″

येसु ने न केवल येरूसालेम के लिए वरन हम सभी के लिए विलाप किया। उन्होंने अपना जीवन अर्पित किया ताकि हम उनके आगमन को पहचान सकें। संत पापा ने संत अगस्टीन के कड़े शब्दों का स्मरण दिलाते हुए कहा, ″मैं ईश्वर से भयभीत हूँ, येसु से, जब वे पार होते हैं किन्तु आप किस चीज से भयभीत हैं? मैं इसलिए भय रखता हूँ कि कहीं मैं इस आगमन से न चून जाऊँ। संत पापा ने कहा कि यदि हम अपने हृदय में सचेत नहीं हैं तो हम येसु के आगमन को सभी नहीं जान पायेंगे। उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर हमें उनके आगमन को समझने की कृपा प्रदान करे।


(Usha Tirkey)

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