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करुणा के कार्यों पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on November 23, 2016 at 3:44 pm

 


वाटिकन सिटी, बुधवार, 23 नवम्बर 2016 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल 6वें सभागार में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्म शिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात,

करुणा की जयंती वर्ष का समापन हो चुका है और हम सामान्य जीवन की शुरूआत करते हैं लेकिन करुणा के कुछ कार्यों पर चिंतन बाकी हैं अतः इसे जारी रखते हुए हम आज करुणा के दो आध्यात्मिक कार्यों पर चिंतन करेंगे, संदेह में पड़े लोगों को सलाह और आज्ञानियों को शिक्षा। हममें से प्रत्येक करुणा के इन दोनों कार्यों से वाकिफ हैं, विशेषकर, शिक्षा जो मुख्यतः संस्थानों से संबंधित है। हम देख सकते हैं कि आज भी कितने बच्चे हैं जो शिक्षा से वंचित होने के कारण अशिक्षित हैं। यह एक गंभीर अन्याय है इसे हम नहीं समझ सकते हैं। वे अपने अशिक्षा के कारण समाज में सहज ही विभिन्न तरह के अत्याचार और बुराई के शिकार हो जाते हैं।

कलीसिया ने सदियों से शिक्षण कार्य की आवश्यकता और इस प्रेरितिक कार्य पर बल दिया है जिसे ग़रीबों को प्रतिष्ठा पूर्ण जीवन के योग्य बनाया जा सकें। इस तरह रोम में विद्यालय की स्थापना सर्वप्रथम संत जस्टिन के द्वारा द्वितीय सदी में की गई थी। इस तरह हम संतों की एक लम्बी सूची पाते हैं जिन्होंने अनेक अवसरों पर अति संवेदनशील लोगों के मध्य शिक्षा का दीप जलाया जिससे निर्धनता और भेदभाव के अंधकार को उनके बीच से दूर किया जा सके। हम उन पुरोहितों और धर्मबहनों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने बच्चों की शिक्षा का ख्याल रखा है। हम आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। कलीसिया में शिक्षा की शुरूआत करने वालों ने करुणा के कार्य को पूर्णरूपेण समझा और इसे जीवन का अंग बना लिया जिससे समाज में परिवर्तन लाया जा सकें। उनके साधारण कार्य और शिक्षण के छोटे प्ररूप ने बहुत सारे लोगों को सम्मानजनक जिन्दगी प्रदान की। उनके द्वारा लोगों को दी गई शिक्षा जीवन का आधार बन गया और इस तरह विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक स्कूलों का प्रचलन हुआ जिसके द्वारा ख्रीस्तीय जीवन के मूल्यों का प्रचार प्रसार हुआ। अतः शिक्षा निःसंदेह सुसमाचार प्रचार का एक विशेष अंग है।

शिक्षा ने लोगों में जीवन के प्रति एक चेतना जगाई है। एक अच्छी शिक्षा हमें जीवन की घटनाओं और बातों को तर्क पूर्ण ढंग से देखने में मदद करती है जहाँ हमें यदा-कदा संदेह होता और हम सवाल जवाब करते हुए परिणामों की जाँच पड़ताल करते हैं। लेकिन संदेह में पड़े लोगों को सुझाव देना इस प्रकार के संदेह से भिन्न है। संदेह की अवस्था से व्यथित लोगों के दुःख और कष्ट का निवारण जो बहुधा उनमें भय और तकलीफ के कारण होता है करुणा के कार्यों का अंग है। यह एक प्रेम का कार्य है क्योंकि इसके द्वारा हम कमजोरी और अनिश्चितता में पड़े लोगों को साहस और सहारा प्रदान करते हैं।

संत पापा ने कहा, “लेकिन आप में से कुछ मुझे कहेंगे कि मुझे विश्वास को लेकर बहुत सारे संदेह हैं, मैं क्या करूँ”? “वह कभी संदेह नहीं करती”? निश्चय ही एक समय सभी को संदेह होता है। हम अपने संदेह को देखें, सोचें, चिंतन करें और दूसरों से सहायता माँगें। विश्वास से संबंधित हमारा संदेह हमारे विश्वास हेतु एक सकारात्मक चिन्ह है जिसके द्वारा हम ईश्वर के क्रूस और उनके रहस्यमय प्रेम के और करीब आते हैं। इसके द्वारा हमारा संबंध ईश्वर के साथ और भी अधिक मजबूत होता है। यद्यपि हमारे संदेह पर हमें जीत हासिल करने की जरूरत है और इसके लिए हमें धर्मग्रंथ में ईश्वर के वचनों को सुनने की आवश्यकता है कि वे हमें क्या कह रहें हैं। इस संदर्भ में धर्मशिक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है जो हमारे विश्वास को व्यक्तिगत और समुदायिक रुप से घोषित करने में मदद करता है। हम अपने विश्वास को अति जरूरतमंद भाई-बहनो की सेवा करते हुए मूर्त रुप देते हैं। हमारे बहुत से संदेह अपने आप दूर हो जाते हैं जब हम सुसमाचार में सच्चे ईश्वर की उपस्थित और प्रेम से प्रेरित होकर, दूसरों के लिए सेवा के कार्य करते हैं।

संत पापा ने कहा कि करुणा के ये दो कार्य हमारे जीवन से दूर नहीं हैं। हम इसे रोज दिन अपने जीवन में सम्पादित कर सकते हैं। हम येसु की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा जो हमारे जीवन के सारे संदेह को दूर करती है प्रसारित करने हेतु बुलाये गये हैं, “ईश्वर के प्रेम की पहचान इसमें है कि पहले हमने नहीं बल्कि ईश्वर ने हमें प्रेम किया… ”।(1यो. 4.10) आईए हम अपने इस प्रेम की अनुभूति को अपने करुणा के कार्य द्वारा प्रमाणित करें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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