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भ्रष्टचार ईशनिंदा है जो हमें धन का सेवक बनाता है

In Church on November 25, 2016 at 3:38 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 25 नवम्बर 2016 (वी आर) भ्रष्टचार एक तरह का ईश निंदा है जो धन की सेवा और दूसरे का शोषण करने हेतु हमें प्रभावित करता है उक्त बातें संत पापा ने गुरुवार को वाटिकन के अपने निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान कही।

दैनिक पाठों के आधार पर उन्होंने दुनिया के अंत, न्याय और विश्वासियों की मुक्ति पर अपना चिंतन व्यक्त करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार बाबीलोन शहर के विनाश का कारण बना। उन्होंने कहा कि भ्रष्टचार ईश निंदा जीवन जीने के समान है जो बाबीलोन शहर की भाषा और दुनियादारी जीवन का प्रतीक है। इस भ्रष्टचार के कारण हम अपने ईश्वर से दूर चले जाते और अन्यों का शोषण करते हुए धन के पूजक बन जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस दुनियावी धन के प्रति हमारी आसक्ति नष्ट हो जायेगी जिस प्रकार हम प्रकाशना ग्रंथ में स्वर्गदूत के विजयी पुकार को सुनते हैं जो बाबीलोन के दिखावे, घंमड और बुराई का साम्राज्य के विनाश की घोषणा करता है।

इसके विपरीत एक शक्तिशाली आवाज जहाँ असंख्य लोगों ईश्वर की स्तुति और गुणगान यह कहते हुए करते हैं-“मुक्ति, महिमा और शक्ति ईश्वर को प्राप्त हो”। यह उन ईश्वर भक्त लोगों की आवाज है जो पापी हैं लेकिन भ्रष्ट नहीं हुए हैं जिन्हें ईश्वर ने मुक्ति प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि एक पापी ईश्वर से क्षमा की याचना करना जानता है। वह येसु ख्रीस्त में ईश्वर की महिमा करना जानता है यद्यपि यह ख्रीस्तीयों के लिए एक सहज कार्य नहीं है। जब हमें किसी चीज की जरूरत होती है तो हम एक अच्छी प्रार्थना करते हैं लेकिन हमें ईश्वर की महिमा करना भी सीखना है। संत पापा ने जोर देते हुए कहा कि हमें इसे अभी सीखने की जरूरत है न कि हम इसे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में जल्दी बाजी में सीखें। उन्होंने पवित्र यूखारीस्त के सामने एक सुन्दर विन्ती की चर्चा करते हुए कहा, “आप सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं और मैं आपके प्रेम में एक प्यारी संतान”।

उन्होंने दैनिक पाठ में दूत के द्वारा लेखक को फुसफुसाई एक तीसरी आवाज की चर्चा करते हुए कहा, “धन्य हैं वे जो ईश मेमने के विवाह भोज में सहभागी होने हेतु बुलाये गये हैं”। ईश्वर की वाणी शोर नहीं वरन एक धीमी आवाज है जो हमारे हृदयों में कही जाती है, ठीक उसी तरह की आवाज जहाँ ईश्वर नबी एलियस से बातें करते हुए कहते हैं। ईश्वर की आवाज शांतिमय तरीके से हमारे हृदयों में आती है।

उन्होंने कहा कि येसु के दृष्टान्तानुसार विवाह भोग हमारी मुक्ति का दृश्य होगा जहाँ अंधे, लगड़े, बहरे, गूँगे और हम सभी निमंत्रित पापी अपनी नम्रता पूर्ण हृदय से कह पायेंगे, “मैं एक पापी हूँ और ईश्वर मुझे बचाते हैं”।

सुसमाचार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,“जब तुम इन सारी चीजों को घटित होते देखोगें- जो कि दिखावे और घमंड का विनाश है, उठकर खड़े हो जाओ क्योंकि तुम्हारी मुक्ति निकट है। ईश्वर हमें अपनी कृपा से भर दे जिससे हम उनकी आवाज को सुनने हेतु अपने को तैयार कर सकें, “आओ, आओ, आओ मेरे विश्वासी सेवकों, तुम कमजोर हो लेकिन विश्वासी बन रहें, अपने ईश्वर के विवाह भोज में सम्मिलित हो”।


(Dilip Sanjay Ekka)

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