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चरनी और क्रिसमस ट्री भेंट करने वालों से संत पापा की मुलाकात

In Church on December 9, 2016 at 4:18 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 9 दिसम्बर 2016 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में निर्मित चरनी और क्रिसमस ट्री भेंट करने वालों से मुलाकात की।

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में निर्मित चरनी और क्रिसमस ट्री को माल्टा एवं लागोराई जंगल संगठन ने प्रदान किया है।

संत पापा ने क्रिसमस चरनी के उद्घाटन के अवसर पर माल्टा के धर्माध्यक्ष और सरकार का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने चरनी का दान करते हुए उनके सिंगार की व्यवस्था की। उन्होंने लागोराई जंगल संगठन का भी धन्यवाद किया जिन्होंने विशाल फर वृक्ष के अलावे अन्य छोटे वृक्षों की व्यवस्था को उपलब्ध किया है। उन्होंने तेन्त्रो के महाधर्माध्यक्ष, प्रतिनिधियों के साथ-साथ निचली वालसुगाना के नगरपालिका को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने विशेष रुप से उन बच्चों की याद की और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित की जिन्होंने “लेने तुन संगठन ” की सहायता द्वारा क्रिसमस ट्री का सिंगार किया जो मुक्तिदाता येसु के आगमन पर जीवन के मूल्यों, प्रेम और शांति के संदेश को व्यक्त करता है।

गोजो के मानुवेल गेरेथ जिन्होंने चरनी का आवरण तैयार किया जो माल्टावासियों के जीवन, संस्कृति, रीतियों की एक झलक पेश करता है। माल्टा का क्रूस और “लूजू”  माल्टा का एक विशिष्ट नाव, जो प्रवासियों के दुखदायी हकीकत को चित्रित करता है जो विभिन्न प्रकार की समुद्री कठिनाइयों का सामना करते हुए इटली आये। हमारे उन प्रवासी भाई-बहनों के दुःखद अनुभव हमें येसु के जन्म काल की उस कठिन परिस्थिति का पुनरावलोकन करने में मदद करता है जहाँ उन्हें सराय में जगह नहीं मिली और वे बेतलेहम के गोशाले में जन्म लिये, इसके बाद हेरोद की क्रूर राजाज्ञा के कारण उन्हें मिस्र देश पलायन करना पड़ा। विश्वासी और तीर्थयात्री जो इस चरनी के दर्शन हेतु आयेंगे वे भातृत्व के संदेश, जीवन का दान, एकता में एक-दूसरे का स्वागत जैसे  प्रतीकात्मक मूल्यों की प्रस्तुतिकरण को देख पायेंगे। संत पापा ने कहा कि गिरजा घरों, हमारे घरों और चौराहों में बनाई गई चरनी हमें अपने जीवन और समाज में ईश्वर एवं उन लोगों के लिए एक जगह तैयार करने का निमंत्रण देता है जो अपने जीवन में विकट परिस्थितियों, गरीबी और कठिनाइयों में पड़े हैं।

उन्होंने कहा कि चरनी के बगल में खड़ा क्रिसमस का वृक्ष सकुरेले के जंगल से आता है जो लागोराई की तराई में पहाड़ों की एक श्रृंखला है, जो सुन्दर प्रकृति छटा से घिरा है जहाँ पेड़-पौधे और निर्मल जलधारा प्रवाहित होती है। प्रकृति का यह सुन्दर दृश्य हमें ईश्वर की सुन्दर सृष्टि और उनके कार्यों पर मंथन करते हुए सृष्टि का सम्मान करने हेतु आह्वान देता है।

इस तरह चरनी और वृक्ष हमारे लिए आशा और प्रेम के संदेश हैं जो ख्रीस्त जन्म के अवसर पर हमें विश्वास के रहस्य को मुक्तिदाता के साथ जो नम्र और दीन बन कर सरलता में हमारे बीच आये, सार्थक रुप में जीने हेतु एक अच्छा माहौल तैयार करने की माँग करता है। आइए हम बच्चों-सा मनोभाव धारण कर चरनी के करीब आयें क्योंकि यहाँ हम ईश्वर की अच्छाई और उनकी करुणा पर मनन करते हैं जो शरीरधारण कर हमारी नजरों को कोमल बनाने आते हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

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