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युद्ध और आतंकवाद की रोक हेतु जर्मनी में संगोष्ठी

In Church on July 20, 2017 at 4:15 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार 20 जुलाई 2017 (रेई) “शांति का मार्ग” इस विषयवस्तु के तहत विश्व के सभी धर्मों के नेतागण युद्ध और आतंकवाद की रोकथाम हेतु जर्मनी में होने वाली एक संगोष्ठी में शरीक होंगे।

इस संगोष्ठी की घोषणा इटली का एजिदियो समुदाय कल 21 जुलाई 2017 को साढ़े ग्यारह बजे अपने में प्रेस विज्ञाप्ति के दौरान रोम के पियात्स संत एग्दियो में करेगा।

संत एजिदियो समुदाय के सभापति मार्को इम्पेलियासो कल संवाददाता सम्मेलन का संचालन करते हुए अन्तराष्ट्रीय संगोष्ठी “शांति का मार्ग” की रूपरेखा की जानकारी लोगों को देंगे। यह संगोष्ठी “अस्सीसी के संत फ्रांसिस के विचारों” पर आधारित है जिसका आयोजन जर्मनी के मंस्टर और ओसनाब्रुक शहर में 10 सितम्बर से 12 सितम्बर तक किया गया है।
इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी घोषणा संत पापा फ्रांसिस ने संत पापा जोन पौल द्वितीय के द्वारा विश्व शांति हेतु प्रार्थना की 30वीं वर्षगाँठ 1986, के अवसर पर अस्सीसी में की थी।

उन्होंने कहा कि यूरोप के केन्द्र से हम शांति का एक पुख्ता संदेश देना चाहते हैं। यह हमारे लिए जरूरी है कि हम विश्व में हो रहे युद्ध और आतंकवाद को न कहें क्योंकि इसके कारण युद्ध और हिंसा ग्रस्त देश नष्ट हो जाते हैं, कितनों को जान से हाथ धोना पड़ता है और हज़ारों की संख्या में लोग विस्थापित होते तथा विभिन्न धर्मों लोगों का शोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि हम इस विशिष्ट सम्मेलन में कई यूरोपीय देशों की सहभागिता की आशा रखते हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

प्रवासियों का स्वागत करना सुसमाचार के अनुसार अनिवार्य है, धर्माध्यक्ष सेट्स

In Church on July 20, 2017 at 4:14 pm

अमेरिका, गुरुवार, 19 जुलाई 2017 (फिदेस) “ईश्वर ने एक दुनिया की सृष्टि है जहाँ जीवन के भोज हेतु सभों के लिए स्थान है।” उक्त बातें अमेरीका एल पासो, टेक्सस के धर्माध्यक्ष मार्क जे. सेट्स ने अपने प्रेरितिक पत्र “दुःख और संतप्त दूर हो” में कही।

उन्होंने कहा, “मैं कलीसिया की शिक्षा को राजनीति से बदलना नहीं चाहता लेकिन एक प्रेरित के रुप में मेरा यह कर्तव्य है कि मैं येसु की शिक्षा का अनुसरण करुँ।” उन्होंने कलीसिया की शिक्षा को उद्धत करते हुए कहा, “सुसमाचार हमें स्पष्ट रुप से कहता है कि जो परदेशी तुम्हारे बीच में निवास करता है उसके साथ तुम अपने देश के नागरिक-सा बर्ताव करो।” धर्माध्यक्ष ने सामाजिक व्यवस्था कि आलोचना करते हुए कहा कि कुछ लोग अपने फ़ायदे हेतु कुछ लोगों को देश में प्रवेश करने से रोकते हैं जो कि प्रवासियों के प्रति देश के ऐतिहासिक समर्पण को नष्ट करता है। फीदेस समाचार को भेजे गये प्रेरितिक प्रति में प्रवासियों के समर्थन में विभिन्न धर्माध्यक्षों ने साक्ष्य दिया है जिससे प्रवासियों के समुदाय और केन्द्रीय अमेरीका के लोगों की स्थिति के बारे में चिंतन किया जा सके जो “आशा की यात्रा” है।

उन्होंने चार वर्ष पूर्व अपनी सीमा रेखा में संत पापा की यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि लेकिन अब भी प्रवासियों की स्थिति में कुछ परिवर्तन नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी नियमावली व्यर्थ जान पड़ती है क्योंकि यह समस्या का समाधान नहीं करती चूंकि “निर्वाचित नेता इसे पूर्णरूपेण संयोजित करने का साहस नहीं करते हैं। धर्माध्यक्ष ने अपने पत्र के अंत में एकता हेतु आहृवान करते हुए कहा, “प्रत्येक साल सीमा रेखा में सीडाड जुआरेज, लास क्रूज़ और एल पासो के विश्वासी ख्रीस्तयाग में सम्मिलित होते हैं। हम लोग एक दीवार या नदी के द्वारा, अर्थव्यवस्था और प्रवासी नियमों के तहत एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन इन सारी चीजों के बावजूद यूखारीस्त बलिदान हम सभों को येसु ख्रीस्त में एक मानव समुदाय के रुप में संयुक्त करता है।”


(Dilip Sanjay Ekka)

येरुसलेम अन्तर धार्मिक संबंध का केन्द्र

In Church on July 20, 2017 at 4:13 pm

वाटिकन रेडियो, गुरुवार, 20 जुलाई 2017 (वीआर) नोट्रे डेम परमधर्मापीठीय केन्द्र और रोम के यूरोपीयन विश्वविद्यलय ने “येरुसलेम और एकेश्वरवादी धर्म; प्रतीक, दृष्टिकोण, वास्तविक जीवन” शीर्षक से बुधवार को एक अन्तर धार्मिक जनसभा का आयोजन किया जिसमें यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों के लिए पवित्र शहर के महत्व पर विचार किये गये।

जनसभा में ख्रीस्तीय और यहूदी अन्तरराष्ट्रीय समिति के सभापति रब्बी डेविड रोसेन ने अन्तर धार्मिक संबंध के बारे में वाटिकन रेडियो की फिलिप्पा हिचेन से वार्ता करते हुए कहा, “येरुसलेम किसी एक व्यक्ति विशेष के आलिंगन का स्थल कभी भी नहीं हो सकता है, हम वास्तव में वहाँ शांति व्यवस्था करने हेतु सफल तब होंगे जब हम एक दूसरे को समझते हुए उनका सम्मान करेंगे।”

फिलीस्तीनी और इस्रलाएली देशभक्ति और युद्ध के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह शहर युद्ध का शहर मात्र नहीं है, बल्कि युद्ध का एक औजार है जिसके द्वारा हम एक दूसरे की आध्यात्मिक शक्ति का उपयोग अपने लाभ हेतु करते हैं। इस पर हम विजयी तब हो सकते हैं जब हम अपने से बाहर निकलते हुए दूसरे की उपस्थिति को एक आशीष के रुप में देख सकेंगे न कि अभिश्राप के रूप में।

युद्ध विराम के संबंध में विभिन्न धर्मों के अगुवों की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि संत पापा जोन पौल द्वितीय की सन् 2000 की प्रेरितिक यात्रा ने पवित्र भूमि में धार्मिक सम्मेलन हेतु समिति की स्थापित करने में मदद की है। इस समिति के तीन मुख्य उद्देश्य हैं पहला अन्य धर्मों के धार्मिक नेताओं संग वार्ता हेतु खुलापन, दूसरा किसी भी धार्मिक स्थलों पर आक्रमणों की निंदा और तीसरा युद्ध की रोकथाम हेतु राजनीतिक पहल को धार्मिक सहायता प्रदान करना जिससे दो देशों और तीन धर्मों का विकास एक स्थान पर हो सकें।

शांति व्यवस्था के संबंध में धर्मों की महत्वपूर्ण पर उन्होंने लूथरन धर्माध्यक्ष की बातों को उद्धत करते हुए कहा कि हम शांति व्यवस्था नहीं कर सकते लेकिन हमारी शांति, एक-दूसरे के सहयोग बिना स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि शांति बहाल हेतु एक धार्मिक नेता का महत्व अहम है वह आध्यात्मिक पहचान प्रदान करता और हमें एक दूसरे से संयुक्त होने में मदद करता है।

विगत वर्षों में शांति स्थापना की असफलता के बारे में उन्होंने कहा, “मैं विश्वास करता हूँ कि हमने धार्मिक आयामों को गंभीरता से नहीं लिया है।”  अशांति की वर्तमान स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि हमारा यह मिलन उचित समय पर हुआ है क्योंकि यह हमें उत्तेजनशील येरुसलेम, इसका राजनीतिक दुरुपयोग और इस भ्रांति पर विचार करने हेतु प्रेरित करता है कि कैसे हम धार्मिक आयामों से अलग रहते हुए इस पर छिड़े युद्ध का समाधान निकाल सकते हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

सीरिया के ख्रीस्तीय परिवारों को एसीएन द्वारा सहायता

In Church on July 20, 2017 at 4:12 pm

वाटिकन रेडियो, गुरुवार, 20 जुलाई 2017 (वीआर) सीरिया में युद्ध का स्थिति बने रहने के दौरान कलीसिया में जरूरत मंदों की सेवा हेतु गठित संस्थान एसीएन हजारों की संख्या में युद्ध प्रभावितों की सेवा में कर रहा है।

एसीएन सीरिया के युद्ध प्रभावितों हेतु अपने में 32 परियोजनों की देखभाल कर रहा है जिसके अंतर्गत विस्थापित परिवारों हेतु भोजन की व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था हेतु मद और परिवारों का किराया भुगतान जैसे सेवा कार्य जारी हैं।

वाटिकन रेडियो की लीदिया ओकाने को दिये गये अपने साक्षात्कार में एसीएन के सूचना और प्रेस मुख्य अधिकारी ने सीरिया की वर्तमान स्थिति के बारे में बतलाते हुए कहा, “हम लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्य कर रहें हैं जैसे कि आलेप्पो और निकटवर्ती हस्काह शहर के 2,200 परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था करना। बच्चों की शिक्षा हेतु मदद करना और क्रीड़ा भवन को लोगों के बहुमुखी आवश्यकता हेतु प्रयोग में लाते हुए महाविद्यालयों के युवाओं की सहायता करना साथ ही विधवाओं की देख-रेख करना जो घायल हो गयीं हैं।”

6 वर्षों से चल रहे युद्ध की स्थिति में भी आशा में बने रहते हुए लोगों की सहायता करने के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए जोन पोंटीफेक्स ने कहा, “देश में विनाश और हताशी की स्थिति दर्दनाक है, इसके शिकार असंख्य लोग हैं क्योंकि उन्होंने अपनी जीविका की सारी चीजों को  पूरी तरह खो दिया है। हमारे कार्यक्रम उनके लिए आशा की किरणें हैं जिसके कारण वे अपने जीवन में आगे बढ़ते की चाह रखते हैं।”

उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि परियोजनाओं ने लोगों को यह अनुभूति दिलाई है कि इस संकट की घड़ी में वे नहीं भूलाये गये हैं। अपने अनुभव को साक्षा करते हुए उन्होंने कहा, “लोगों का संदेश साधारण है वे कहते हैं आप का यहाँ आना हमारे लिए सहायता की निशानी है जो विश्व के विभिन्न भागों से हमारे लिए आती है।”


(Dilip Sanjay Ekka)

विकास हेतु पारंपरिक नेताओं को अधिकार दिये जाये

In Church on July 20, 2017 at 4:11 pm

आक्का, गुरुवार, 20 जुलाई 2017 (फीदेस) विकास के कार्यों में तीव्रता और उनके कुशल संचालन हेतु पारंपरिक नेताओं को अधिकार दिया जाना चाहिए, उक्त बातें घाना के प्राध्यापक एम्मानुएल नाशा ने घाना में शांति पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि अफ्रीका के लोगों को अपने विचार बदले की जरूरत है जिससे सम्पूर्ण अफ्रीका महादेश का विकास हो सके, यदि पारंपरिक अगुवे संसद के सदस्य बनते तो विकास की परियोजनाओं के संचालन में और भी तीव्रता आती और वे उन्हें प्रभावकारी ढ़ंग से पूरा करते।

उन्होंने कहा “स्थानीय पारंपरिक नेता अपने स्थानीय लोगों और पारंपरिक समुदाय के सच्चे प्रतिनिधि हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि यदि ऐसा होता तो सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचारों के प्ररुपों में कमी आती, परियोजनाओं में टालमटोल नहीं होते और विकास के कार्यों का सही निष्पादन हो पाता।

यह इसलिए संभव होता क्योंकि स्थानीय पारंपरिक नेता अपने कार्यों का फायदा उठाते हुए प्रत्यक्ष रुप से अपने लोगों के प्रति उत्तरदायी होते और अपने कार्यों को पूरा करते तथा स्थानीय लोग सीधे तौर पर उनके कार्यों का मूल्यांकन कर पाते। प्रतिनिधियों के द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी और भ्रष्टाचार उनके लिए बर्खास्तगी का कारण बनती, यह उन्हें अपने कार्यों को ईमानदारी पूर्वक करने हेतु प्रोत्साहित करता।


(Dilip Sanjay Ekka)

बोरसेलिनो की हत्या के 25वीं वर्षगांठ पर संत पापा का संदेश

In Church on July 19, 2017 at 3:52 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार,19 जुलाई 2017 (रेई) : इटली के लोग आज के दिन पलेरमो के पावलो इम्मानुएल बोरसेलिनो की याद करना कभी नहीं भूलते, जिन्होंने इटली के बड़े माफिया के विरुद्ध आवाज उठाई थी और इसके लिए उन्हें अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा था। संत पापा फ्राँसिस ने पावलो इम्मानुएल बोरसेलिनो की हत्या के 25वीं वर्षगांठ पर ट्वीट संदेश प्रेषित कर माफिया के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना और माफिया के विरुद्ध संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया है।

उन्होंने अपने संदेश नें लिखा, ″आइये, हम माफिया के शिकार सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें तथा ईश्वर से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई को जारी रखने हेतु शक्ति मांगें।″

पावलो इम्मानुएल बोरसेलिनो का जन्म पलेरमो में 19 जनवरी 1940 को हुआ था। वे इटली के नामी मजिस्ट्रेट थे। अपने कार्यकाल में इटली के माफिया ने उन्हें अपने साथ मिलाने की जी तोड़ कोशिश की थी पर उन्होंने अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाई। 19 जुलाई को विया द-अमेलियो में माफिया के साथ एक मुठभेड़ में अपने 5 अन्य अधिकारियों के साथ मारे गये।


(Margaret Sumita Minj)

बच्चों के लिए नए बाल-चिकित्सालय का शिलान्यास

In Church on July 19, 2017 at 3:50 pm

 

बांगुई, बुधवार,19 जुलाई 2017 (रेई) : मध्य अफ्रीकी गणराज्य के बांगुई में परमधर्मपीठीय बम्बिनो येसु बाल चिकित्सालय के सहयोग से बच्चों के लिए एक नये बाल-चिकित्सालय का शिलान्यास किया गया।

देश के प्रमुख फॉस्टीन आर्चेंज तोदेरा ने शिलान्यास किया। इस अवसर पर देश के प्रधान मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री तथा विदेश मंत्री को छोड़ अन्य सभी मंत्री उपस्थित थे। बांगुई की मेयर भी उपस्थित थीं। परमधर्मपीठ की ओर से प्रेरितिक राजदूत तथा बम्बिनो येसु अस्पताल की निदेशक श्रीमति एनोक मरिएल्ला उपस्थित थीं।

इस नये बाल-चिकित्सालय में देश में फैले बहुत ही गंभीर और व्यापक रोग कुपोषण से पीड़ित बच्चों का इलाज किया जाएगा जिन्हें फिलहाल टेंट में इलाज किया जा रहा है।

परमधर्मपीठीय बम्बिनो येसु बाल अस्पताल, बांगुई अस्पताल के बच्चों की चिकित्सा के लिए फरवरी महीने 2016 से प्रतिबद्ध है जब संत पापा फ्राँसिस ने करुणा के वर्ष में उदारता के ठोस कार्यों के रुप में मध्य अफ्रीका के बांगुई अस्पताल के विशेष रुप से बीमार बच्चों की सेवा की पहल की।

हाल के महीने में बम्बिनो येसु बाल अस्पताल ने बांगुई अस्पताल के डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना भी शुरु किया तथा अस्पताल के पुराने शौचालय, स्नानगृह, सेप्टिक टैंक वगैरह को तोड़कर पूरी तरह से नया बनाया। पहले से ठोस सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। शिशुओं के मृत्यु दर में काफी हद तक कमी आई है।


(Margaret Sumita Minj)

धार्मिक नेता गरीबी का अंत करने एवं शांति को बढ़ावा देने में मदद करें, वाटिकन

In Church on July 19, 2017 at 3:49 pm

 

 न्यूयॉर्क, बुधवार,19 जुलाई 2017 (रेई) : संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष बेर्नारदितो औजा ने सोमवार को न्यूयॉर्क में शांति के लिए धर्मों के विभाग द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय राजनीतिक बैठक के दौरान अपने संबोधन में गरीबी उन्मूलन और शांति को बढ़ावा देने में धार्मिक नेताओं और समुदायों की भूमिका के बारे कहा।

धार्मिक नेतागण राजनीतिक नेताओं और सामाजिक वैज्ञानिकों से अलग हैं, “वे जो हैं और जो नहीं हैं उसका दिखावा नहीं करते हैं।” उनका कार्य वैज्ञानिक संकेतक के माध्यम से लक्ष्यों और उद्देश्यों को मापना नहीं है। वे मुख्यतः लोगों को कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे उनके कार्यों की सार्थकता और उद्देश्यों और कार्यों की महत्ता को समझाते हैं। वे आशावादी हैं और दूसरों को भी अपने कामों के प्रति आशावादी बने रहने की प्रेरणा देते हैं, जैसा कि संत पेत्रुस अपने पहले पत्र में व्याख्या करते हैं। हालांकि धार्मिक नेताओं का पहला उत्तरदायित्व विश्वासियों और लोगों की आध्यात्मिक आवश्यकता की पूर्ति करना है पर वे प्रत्येक व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि सभी धर्म इस बात पर विश्वास और घोषणा करते हैं कि शांति विकास के लिए आवश्यक है। सभी अध्ययनों से पता चलता है कि देशों और क्षेत्रों में युद्ध-संघर्ष प्रगति को रोकता है। संत पापा पौल छठे ने भी 1967 में इस बात की पुष्टि की थी कि शांति का नया नाम विकास है। शांति को बनाये रखने के लिए विकास की आवश्यकता है। आर्थिक और राजनीतिक प्रभुत्व के दिखावे बिना, धर्मों और विश्वास पर आधारित संगठन आम तौर पर शांति निर्माण में निष्पक्ष दलालों के रूप में देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि शांति की दिशा में टिकाऊ विकास के संकेतक “गुणात्मक होनी चाहिए, मात्रात्मक नहीं।”

“विशेष रूप से, धार्मिक नेताओं का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वे लोगों के व्यक्तित्व और नैतिक विकास में उनकी मदद करें जिससे कि वे एक अच्छे इन्सान बन सकें और दूसरों को भी अपने भाइयों और बहनों की तरह देखभाल कर सकें।


(Margaret Sumita Minj)

पूर्वी लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में दो पुरोहितों का अपहरण

In Church on July 19, 2017 at 3:47 pm

किंशासा, बुधवार,19 जुलाई 2017 (रेउटर्स) :  कांगो अशांत पूर्वी लोकतांत्रिक गणराज्य के दो साल से हो रहे नरसंहार क्षेत्र में अज्ञात बंदूकधारी हमलावरों ने गत रविवार को दो काथलिक पुरोहितों का अपहरण कर लिया था।

कांगों धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने बताया कि रविवार को करीब 10 अज्ञात बंदूकधारियों ने रात को भुनुका पल्ली से फादर चार्ल्स किपासा और फादर जोन-पियेर्र अकिमाली को उठा ले गये। यह पल्ली बुटेम्बो और बेनी शहर के बीच में स्थित है।

कांगों धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा, ″पुरोहित ईश्वर के व्यक्ति हैं जिन्होंने बिना राजनीतिक एजेंडा के लोगों की भलाई के लिए उनकी सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है। उन्हें आधात पहुंचाने का अर्थ है, पूरे समुदाय को पीड़ा देना जिनकी सेवा में वे कार्यरत हैं।″

कांगों धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने सुरक्षा बलों से अपील की है कि वे पुरोहितों को मुक्त करने का हर संभव प्रयास करें। बयान में उन्होंने कहा कि सन् 2012 में भी इसा क्षेत्र से तीन पुरोहितों का अपहरण कर लिया गया था और अभी तक उनको मुक्त नहीं किया गया है।

बेनी पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक अस्थिर क्षेत्र रहा है। अक्टूबर 2014 में नरसंहार की एक श्रृंखला शुरू हुई थी जसमें अज्ञात हमलावर बहुत से लोगों को बंधक बना कर अपने साथ ले गये और सैकड़ों नागरिकों को मार डाला था।

कांगो के पूर्वी सीमा क्षेत्र बहुमूल्य खनिजों के कारण दो दशकों से लगातार वहाँ के निवासियों और विद्रोहियों के बीच युद्ध जारी है।


(Margaret Sumita Minj)

फिलीपींस धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के नये अध्यक्ष की नियुक्ति

In Church on July 19, 2017 at 3:45 pm

मनिला , बुधवार,19 जुलाई 2017 (वा. रेडियो) : मनिला स्थित पाको के संत पापा पियुस बारहवें काथलिक केन्द्र में दवाओ महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वाल्लेस फिलीपींस धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के नये अध्यक्ष नियुक्त हुए। महाधर्माध्यक्ष रोमुलो फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत थे। वे लिगायेन-डागुपान के महाधर्माध्यक्ष सोक्रेट्स विल्लेगास का स्थान ग्रहण करेंगे, जिन्होंने अध्यक्ष पद पर अपनी दूसरी और अंतिम अवधि समाप्त की।

महाधर्माध्यक्ष वाल्लेस 86 धर्मप्रांतों से फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के 83 धर्माध्यक्षों, 5 धर्मप्रांतीय प्रशासकों और 43 मानद सदस्यों की अगुवाई करेंगे।

कालगून के धर्माध्यक्ष पाब्लो विरजिलो डेविट फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष नियुक्त हुए।

फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अधिकारियों का कार्यकाल दो वर्षों के लिए होता है और उनकी नियुक्ति दो बार तक हो सकती है। इस प्रकार वे चार साल तक पद में कार्य कर सकते हैं।

महाधर्माध्यक्ष वाल्लेस के पुरोहिताभिषेक 1976 में हुआ था। 1997 में वे किडापावान के धर्माध्यक्ष नियुक्त हुए। 2006 में वे जामबोन्गा के महाधर्माध्यक्ष नियुक्त हुए और 2012 में उनका तबादला दावाओ महाधर्मप्रांत में हुआ।

बाइबिल विद्वान के नाम से ज्ञात धर्माध्यक्ष डेविड केवल जनवरी वर्ष 2016 से कालगून धर्मप्रांत में अपनी सेवा दे रहे हैं। उनका पुरोहिताभिषेक मार्च 1983 में हुआ था। 2006 में वे पामपान्गा संत फेरनांन्दो के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त हुए। वहाँ उन्होंने 10 वर्षों तक अपनी सेवा प्रदान की।

फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के नियमानुसार, औपचारिक रूप से नए अधिकारी 1 दिसंबर  2017 को अपने पद ग्रहण करेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

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