Vatican Radio HIndi

Archive for 2017|Yearly archive page

संत पापा ने ″चेंतेसिमुस अन्नुस प्रो पोंतेफिचे″ फाऊँडेशन से मुलाकात की

In Church on May 20, 2017 at 3:07 pm

 

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 20 मई को ″चेंतेसिमुस अन्नुस प्रो पोंतेफिचे″ फाऊँडेशन के 250 सदस्यों से वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में मुलाकात की।

चेनतेसिमुस अन्नुस संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा 1991 में प्रकाशित प्रेरितिक विश्व पत्र है जिसे उन्होंने संत पापा लेओ 13वें द्वारा 1891 में प्रकाशित प्रेरितिक पत्र ‘रेरूम नोवारूम’ के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में किया था।

संत पापा ने फाऊँडेशन के सदस्यों को सम्बोधित कर कहा, ″मैं आपके उस प्रयास की सराहना करता हूँ जिसमें आप नए मानदंडों और प्रौद्योगिकी से प्राप्त शक्ति के रूप में, अस्थायी संस्कृति और जीवन शैली को लागू करने वाली नैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए, जो गरीबों की उपेक्षा और दुर्बलों को तुच्छ करती हैं, अर्थव्यवस्था, प्रगति तथा व्यापार को समझने हेतु दूसरे उपायों को खोजने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई लोग समस्त मानव परिवार के स्थायी एवं पूर्ण विकास हेतु उसे एक साथ लाने में प्रयासरत हैं क्योंकि हम जानते हैं कि चीजें बदल सकती हैं। संत पापा ने कहा कि उनका न्यास भी इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, खासकर, कलीसिया के समृद्ध धरोहर सामाजिक सिद्धांत के प्रकाश में तथा ″रचनात्मक विकल्प” के लिए विवेकशील खोज के द्वारा। भले लोगों के साथ मिलकर, वे मानव व्यक्ति की कसौटी की, उसकी प्रतिष्ठा, स्वतंत्रता तथा रचनात्मकता द्वारा आर्थिक विकास हेतु समर्पित हैं।

संत पापा ने फाऊँडेशन के वक्तव्य पर गौर करते हुए कहा कि गरीबी के विरूद्ध संघर्ष, मानवीय रूप में गरीबी की वास्तविकता को बेहतर समझने की मांग करती है, न कि केवल आर्थिक घटना।

समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन, संवाद एवं लोगों की ज़रूरतों और आशा को समझने, ग़रीबों और “बहुआयामी अतिच्छादित वंचितों” के दैनिक अनुभव को सुनने और ठोस स्थितियों के लिए विशिष्ट प्रतिक्रियाएं तैयार करने की मांग करता है।

संत पापा ने कहा कि इसके लिए समुदायों में मध्यस्थ सर्जनाओं की आवश्यकता है जो लोगों और संसाधनों को एक साथ ला सके।

संत पापा ने रोजगार व्यवस्था पर फाँडेशन के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विकसित और विकासशील दोनों ही तरह के राष्ट्रों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है और जिसका सामना किया जाना आवश्यक है। संत पापा ने उन्हें नई तकनीकी के विकास, बाज़ारों के परिवर्तन तथा कर्मचारियों की वैध आकांक्षाओं पर गौर करते हुए न केवल व्यक्तिगत किन्तु परिवारों को भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बतलायी।

उन्होंने ″चेंतेसिमुस अन्नुस प्रो पोंतेफिचे″ फाऊँडेशन के सभी प्रयासों के लिए उन्हें प्रोत्साहन देते हुए, उनके कार्यों को सुसमाचार एवं कलीसिया की सामाजिक शिक्षा के प्रकाश में आगे बढ़ाने की सलाह दी।


(Usha Tirkey)

शांति की खोज

In Church on May 20, 2017 at 3:06 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 मई 2017 (वीआर सेदोक): आज शांति की खोज पूरी दुनिया को है। संत पापा फ्राँसिस ने शांति के निर्माण हेतु प्रोत्साहन देते हुए एक ट्वीट संदेश प्रेषित किया।

उन्होंने संदेश में लिखा, ″शांति को, न्याय पर, समग्र मानव विकास पर, मानव अधिकारों के सम्मान पर एवं सृष्टि की सुरक्षा पर स्थापित होना चाहिए।″


(Usha Tirkey)

संत पापा ने की परिवारों की आशीष

In Church on May 20, 2017 at 3:03 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 मई 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने ″करुणा की असाधारण जयन्ती वर्ष″ के दौरान करुणा के एक ठोस कार्य के रूप में विभिन्न लोगों, परिवारों एवं समुदायों से मुलाकात करने की पहल को जारी रखते हुए, शुक्रवार 19 मई को, रोम के दूरवर्ती शहर ऑस्तिया के स्तेल्ला मारिस (समुद्री तारा) नामक पल्ली जाकर, वहाँ के परिवारों से मुलाकात करते हुए उन्हें पास्का की आशीष प्रदान की।
वाटिकन प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि संत पापा वाटिकन से ऑस्तिया गये। यह उन परिवारों के लिए पास्काकाल की अवधि में पुरोहित द्वारा प्रदान किये जाने वाले आध्यात्मिक सामीप्य का चिन्ह था जो रोम के सुदूर क्षेत्रों में रहते हैं। दो दिनों पूर्व स्तेल्ला मारिस के पल्ली पुरोहित फादर प्लिनियो पोंचिना ने परिवार के सदस्यों को सूचना जारी की थी कि वे पास्का की आशीष हेतु उनके घर आयेंगे।
प्रेस रिपोर्ट में बतलाया गया कि परिवार के सदस्यों के लिए यह एक बड़े आश्चर्य की बात थी कि उन्होंने पल्ली पुरोहित के स्थान पर खुद संत पापा फ्राँसिस को द्वार की घंटी बजाते हुए पाया। संत पापा ने सामान्य पल्ली पुरोहित की तरह घर में प्रवेश किया। उन्होंने फ्रांसिस्को कंतेदुका प्राँगण- 11 के दर्जनों परिवारों को पास्का की आशीष प्रदान की तथा उन्हें रोजरी माला की भेंट की।

ऑस्तिया जो रोम का एक बाहरी इलाका है तथा समुद्र के तटीय भाग में बसा है इसकी आबादी करीब 100,000 हैं जहाँ विश्वासियों का एक जीवित समुदाय निवास करता है।


(Usha Tirkey)

″संत पेत्रुस कोष″ अब फेसबुक पर

In Church on May 20, 2017 at 2:58 pm

>

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 मई 2017 (वीआर अंग्रेजी): परमधर्मपीठ ने घोषित किया है कि ‘संत पेत्रुस कोष’ के लिए अब एक फेसबुक पेज का निर्माण किया गया है।

विदित हो परंपरागत रुप से संत पेत्रुस और पौलुस के पर्व के दिन विश्व के सभी काथलिक गिरजाघरों में जो दान दिये जाते हैं उसे ‘संत पेत्रुस कोष’में जमा किया जाता है। ‘संत पेत्रुस कोष’ की रकम को संत पापा स्वेच्छा से विश्वव्यापी कलीसिया की ज़रूरतों, जरुरतमंद लोगों अथवा समुदायों के लिए खर्च करते हैं।

‘संत पेत्रुस कोष’जिसे फेसबुक पेज पर इसी साल शुरू किया गया है ट्वीटर एवं इंस्टाग्राम के लिए भी रास्ता खोल देगा।

वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि दुनिया में सबसे बड़े सामाजिक नेटवर्क का उपयोग करने का निर्णय दोहरे उद्देश्य के तहत किया गया है: एक तरफ, जहां फेसबुक का इस्तेमाल व्यापक होने के कारण हर किसी के लिए समुदाय को खोल देगा तथा दूसरी तरफ, एकात्मता के लंबे समय से स्थापित कार्यालय की गतिविधियों को भी साझा किया जा सकेगा।

फेसबुक पर संत पेत्रुस कोष का उद्देश्य है उन सभी के संवाद को प्रोत्साहन देना जिनका एक आम उद्देश्य है- जरूरतमंद लोगों की मदद करना तथा उदारता के कार्य को समर्थन देना।

प्रेस विज्ञाप्ति में संत पेत्रुस कोष के समर्थन हेतु कई उदाहरण दिए गये हैं जिनमें भारत के दलित बच्चों के लिए प्राथमिक स्कूल खोलना भी शामिल है।

उम्मीद की गयी है कि नये फेसबुक पेज द्वारा उदार कार्यों की ओर लोगों का ध्यान खींचा जा सकेगा।

अन्य संचार माध्यमों के साथ, परमधर्मपीठ की इच्छा से निर्मित ये पेज वाटिकन राज्य सचिवालय, वाटिकन संचार सचिवालय और वाटिकन सिटी के राज्यपाल के बीच एक महत्वपूर्ण तालमेल का नतीजा है।


(Usha Tirkey)

बाल मजदूरी की बुराई का सामना करने हेतु करीतास प्रतिबद्ध

In Church on May 20, 2017 at 2:57 pm

नई दिल्ली, शनिवार, 20 मई 2017 (फिदेस): काथलिक उदारता संगठन कारितास की भारतीय शाखा कारितास इंडिया ने अपने समर्पण को विस्तृत करते हुए देश में बाल श्रम की बुराई का विरोध किया है।

वर्ष 2001 के आँकड़े में दिखाया गया है कि भारत में बाल मजदूरों की कुल संख्या 12 मिलियन थी जो 2011 में घटकर 4.3 मिलियन हो गयी, जबकि संयुक्त राष्ट्र के बाल सुरक्षा विभाग की 2017 की रिपोर्ट अनुसार 5 से 9 वर्ष के बाल मजदूर के शिकार बच्चों की संख्या 2001 के आँकड़े अनुसार कुल 15 प्रतिशत थी जो 2011 के आँकड़े अनुसार 25 प्रतिशत हो गयी है।

करीतास इंडिया के मुताबिक बच्चों की समस्या, जो मजदूरी करते तथा स्कूल नहीं जा पाते हैं अब भी गंभीर समस्या बनी हुई है तथा भारत जैसे देश को इस तरह की समस्या के लिए शर्मिंदा होना चाहिए।

भारत में बाल श्रम की स्थिति गाँवों एवं शहरों दोनों ही क्षेत्रों में असंरचित कार्य स्थलों में पनपता  है।

कारीतास इंडिया के शीर्ष अधिकारी अंतोनी क्षेत्री ने फिदेस को जानकारी दी कि कारीतास इंडिया दार्जिलिंग में एक कार्यक्रम को सहयोग दे रही है जिसका उद्देश्य है बच्चों को बाल मजदूरी की समस्या से मुक्त कराना। यदि यह कार्यक्रम सफल रहा तो पहली बार भारत सरकार एवं आम नागरिक इस लक्ष्य को प्राप्त कर पायेंगे। इस कार्यक्रम द्वारा ग्राम पंचायत के सहयोग से 45 बाल मज़दूरों को मुक्त किये जाने की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि कारीतास इंडिया का मानना है कि एक राष्ट्र के रूप में हमें अपने देश के बेहतर भविष्य के लिए बचपन की गारंटी देने की आवश्यकता है।

आंध्रप्रदेश में करीब 400,000 बाल मजदूर हैं जिनमें से अधिकतर लड़के बच्चे हैं जो 7 से 14 साल के उम्र के हैं जिन्हें कपास उत्पादन हेतु दिन में 14 से 16 घंटे काम करने पड़ते हैं। कर्नाटक में बाल श्रमिक बड़ी संख्या में शहरी क्षेत्र में कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में काम करते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश तथा बच्चों की सुरक्षा हेतु बने नियमों के प्रभावकारी ढंग से लागू नहीं किये जाने के कारण बाल श्रम को बढ़ावा मिल रहा है।

बच्चे जिस स्थिति में काम करते हैं वह गुलामी के समान है। कई मामले ऐसे भी हैं जिसमें घरेलू श्रमिकों के शारीरिक, यौन एवं भावनात्मक दुरुपयोग की घटनाएँ हैं। इंडियन कारीतास के अनुसार गरीबी तथा सामाजिक सुरक्षा की कमी ही बाल श्रम के मुख्य कारण हैं। ‘बच्चों के अधिकार केंद्र’ का कहना है कि बाल श्रम में फंसने वाले अधिकतर बच्चे निचली जाति एवं गरीब परिवारों से आते हैं।


(Usha Tirkey)

ख्रीस्तयाग के दौरान हमले का शिकार पुरोहित अब भी गंभीर स्थिति में

In Church on May 20, 2017 at 2:55 pm

मेक्सिको सिटी, शनिवार, 20 मई 2017 (फिदेस): मेक्सिको महाधर्मप्रांत ने फा. जोश मिगवेल माक्कोरो अलकाला के स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी प्रकाशित की है जिनपर 15 मई को स्थानीय महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित करने के दौरान चाकू से हमला किया गया था।

17 मई को फिदेस को प्रेषित मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ″पुरोहित के शरीर का दाहिना हिस्सा लकवा के समान हो गया है जो उनके बायें मस्तिष्क पर वार के कारण बहुत अधिक खून बह जाने का परिणाम है।

18 मई को प्रेषित दूसरे मेडिकल रिपोर्ट में जानकारी दी गयी है कि दुर्भाग्य से तंत्रिका संबंधी स्थिति बिगड़ गई है और रक्त प्रवाह में कमी है।

आक्रामक के बारे में, मैक्सिको सिटी के अटॉर्नी जनरल ने बताया कि अपराधी को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उसकी पहचान फ्राँसिसी मूल के जोन रॉकशिल्ड के रूप में किया गया है जबकि उसका वास्तविक नाम जुवान रेने सिल्वा मार्टिनेज़ है तथा मूल रूप से वह मातेहुआला, सेन लुइस पोतोसी का रहने वाला है।

अनुमान लगाया गया है कि 26 वर्षीय सिल्वा मनोवैज्ञानिक विकार की बीमारी से पीड़ित है तथा कल्पना और वास्तविकता में फर्क करने में असमर्थ है।


(Usha Tirkey)

सच्चा धर्म सिद्धांत हमें जोड़ता है

In Church on May 19, 2017 at 12:59 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को संत मार्था ने अपने निवास में प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान प्रवचन में कहा कि विचारधाराएँ हमें विखंडित करतीं जबकि सच्चा धर्म सिद्धांत हमें आपस में जोड़ता है।

संत पापा ने दैनिक पाठों के आधार पर अपना चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा, “हम मानव हैं, हम पापी हैं।” प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय में भी आपसी ईर्ष्या, द्वेष और अधिकार हेतु संघर्ष की भावना थी। “कठिनाइयाँ कलीसिया के जीवन में शुरू से ही रहीं हैं।” लेकिन हमारी पापमय स्थिति हमें नम्र बनाती और येसु के पास लेकर आती है जो हमें पापों से मुक्ति दिलाते हैं। गैरख्रीसतियों जो पवित्र आत्मा के बुलावे द्वारा ख्रीस्तीय समुदाय में सम्मिलित होने हेतु बुलाये जाते हैं, प्रेरितों और समुदाय के बुज़ुर्गों द्वारा कुछ पौलुस और बरनाबस के पास आतोखिया ले जाये जाते हैं। हम यहाँ दो दलों को पाते हैं जहाँ एक दल “अच्छी आत्मा” तो दूसरा अपने में “अस्पष्ट” कड़ा निर्णय लेता है।

प्रेरितों का दल अपने में समस्याओं का समाधान विचार-विमर्श करते हुए निकालना चाहा तो दूसरा दल समस्याओं को और भी जटिल बनाते हुए कलीसिया को विभाजित करता है। प्रेरित समस्याओं पर विचार-विमर्श करते और उसका हल निकालते हैं लेकिन यह राजनीति समस्या नहीं है। वे पवित्र आत्मा द्वारा संचालित किये जाते हैं अतः वे देवमूर्तियों को बलि चढाये और गाल घोटे हुए पशुओं का माँस सेवन करने से परहेज करते हैं।

संत पापा ने कहा कि आत्मा हमें मुक्त करता है अतः अख्रीस्तीय खतना के बिना भी कलीसिया के अंग बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह विषयवस्तु प्रथम कलीसियाई महा धर्मसभा का मुद्दा था जहाँ संत पापा और धर्माध्यक्षों ने पवित्र आत्मा के मुद्दे पर प्रकाश डाला। यह कलीसिया का कर्तव्य है कि इस धर्म सिद्धांत को सुस्पष्ट किया जाये जिससे हम सुसमाचार में येसु की शिक्षा को समझ सकें जो कि पवित्र आत्मा द्वारा उत्प्रेरित है।

संत पापा ने कहा कि लेकिन बहुत से लोग हैं जो अन्यों को दिग्भ्रमित करते और उनकी आत्मा को अशांत कर देते हैं। वह धर्मविरोधी बातें कहता है, ऐसे नहीं कहा जाना चाहिए, कलीसिया के सिद्धांत ऐसे हैं…। ऐसी बातें ख्रीस्तीय समुदाय को विभाजित करती हैं। धर्म सिद्धांत का विचारधारा में परिवर्तन हमारे लिए समस्या उत्पन्न करती है। प्रेरितों ने इस पर विचार मंथन करते हुए अपने हृदय को पवित्र आत्मा के कार्यों हेतु खुला रखा।

संत पापा ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि कलीसिया के अपने धर्म सिद्धांत हैं जो येसु की शिक्षा पर आधारित और पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित है जो “हमेशा खुला और स्वतंत्र” है। धर्म सिद्धांत और धर्मसभा हमें एक समुदाय के रुप में पिरो कर रखते हैं जबकि “विचारधारा” हमें विभाजित करती है।


(Dilip Sanjay Ekka)

19 मई को सन्त पापा ने किया ट्वीट

In Church on May 19, 2017 at 12:58 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार, 19 मई को एक ट्वीट प्रकाशित कर हम सब से जीवन के उद्देश्य पर मनन-चिन्तन का आग्रह किया है।

19 मई के ट्वीट पर सन्त पापा ने लिखा, “अपने जीवन के स्वर को हम सदैव ऊँचा रखने का प्रयास करें, यह याद करते हुए कि हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, किस महान पुरस्कार के लिये हम अस्तित्व में हैं, किसके लिये काम करते, संघर्ष करते तथा दुःख भोगते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

हन्टिंगटन पीड़ितों से सन्त पापा ने कहाः आप बहुमूल्य हैं

In Church on May 19, 2017 at 12:56 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): वाटिकन स्थित पौल षष्टम भवन में सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को हन्टिंगटन रोग से ग्रस्त पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

हन्टिंगटन रोग, पार्किनसन बीमारी जैसी एक दुर्लभ और विकृतिपूर्ण न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। यह एक जननिक विकार है जिससे, विश्वव्यापी स्तर पर, प्रति 1000 व्यक्तियों में 5 से 10 व्यक्ति ग्रस्त होते हैं। एशिया में प्रति दस लाख व्यक्तियों में एक व्यक्ति जबकि, वेनेज्यूएला के लेक माराकायबो क्षेत्र में प्रति एक लाख में 700 व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त होते हैं। इस रोग से पीड़ित लोगों में गम्भीर शारीरिक विकारों के अलावा वृद्धावस्था के आते ही डिमेनशिया यानि भूल जाने की बीमारी शुरु हो जाती है।

गुरुवार को, हन्टिंगटन पीड़ितों, उनके परिजनों, उनकी देख-रेख करनेवालों, चिकित्सकों, शोधकर्त्ताओं एवं वकीलों को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “बहुत अधिक समय तक हन्टिंगटन रोग से ग्रस्त लोगों के जीवन को प्रभावित करनेवाला भय एवं कठिनाइयाँ बनी रही हैं जिसने इनके प्रति ग़ैरसमझदारी एवं बाधाओं को उत्पन्न किया है तथा इन्हें हाशिये पर रहने के लिये बाध्य किया है।”

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, इस रोग से पीड़ित लोगों एवं उनके परिजनों को कई बार लज्जा, अलगाव एवं परित्यक्ति का कटु अनुभव करना पड़ा है। आज, हालांकि, हम यहाँ उपस्थित हैं क्योंकि हम अपने आप से तथा सम्पूर्ण विश्व से कहना चाहते हैं, “छिपा हुआ अब कभी नहीं!”

पीड़ितों को सन्त पापा फ्राँसिस ने कलीसिया के समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा, “आप में से कोई भी स्वतः को अकेला न महसूस करे; आप में कोई स्वतः को बोझ न समझे; कोई भी भागने के लिये स्वतः को मजबूर न समझे। आप ईश्वर की दृष्टि में बहुमूल्य हैं; आप कलीसिया की दृष्टि में अनमोल हैं।”

अन्वेषकों एवं शोधकर्त्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए सन्त पापा ने उनसे आग्रह किया कि वे अपना काम अनवरत जारी रखें। इस क्षेत्र में उन्होंने ठोस एकात्मता का आह्वान करते हुए कहा कि हर शोध कार्य को सुसंगत ढंग से तथा मानव व्यक्ति की अलंघनीय प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिये।


(Juliet Genevive Christopher)

कॉरपुस क्रिस्टी शोभायात्रा हुई मुल्तवी

In Church on May 19, 2017 at 12:54 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 19 मई 2017(सेदोक): वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय के निर्देशक ने एक घोषणा कर बताया कि सन्त पापा फ्राँसिस ने कॉरपुस क्रिस्टी शोभायात्रा को मुल्तवी करने का फ़ैसला किया है।

निर्देशक ग्रेग बुरके ने गुरुवार को घोषित किया, “सन्त पापा फ्राँसिस ने कॉरपुस क्रिस्टी धर्मविधिक समारोह के आयोजन को गुरुवार 15 जून के बजाय रविवार 18 जून को रखने का फ़ैसला किया है।”

बुर्के ने स्पष्ट किया कि सन्त पापा का निर्णय ईश प्रजा एवं पुरोहितों तथा रोम धर्मप्रान्त के विश्वासियों की बेहतर भागीदारी के पक्ष में लिया गया है। उन्होंने कहा, “दूसरा कारण यह है कि गुरुवार सप्ताह का सामान्य दिन है तथा अपने काम-धन्धों में व्यस्त रहने के कारण रोम के लोग समारोह में शरीक नहीं हो पायेंगे।”

पवित्र यूखारिस्त में प्रभु येसु ख्रीस्त के रक्त एवं शरीर की यथार्थ उपस्थिति सम्बन्धी विश्वास के आदर में प्रति वर्ष कॉरपुस क्रिस्टी महापर्व मनाया जाता है। कलीसियाई धर्मविधिक वर्ष के अनुसार यह महापर्व पवित्र तृत्व महापर्व के बाद पड़नेवाले गुरुवार को मनाया जाता है किन्तु इस वर्ष सन्त पापा फ्राँसिस ने इसे रविवार को मनाये जाने का निर्णय लिया है।

रोम में प्रतिवर्ष कॉरपुस क्रिस्टी महापर्व पर कलीसिया के परमाध्यक्ष रोम स्थित मरियम महागिरजाघर तथा सन्त जान लातेरान महागिरजाघर के बीच पवित्र यूखारिस्त सहित शोभायात्रा का नेतृत्व करते हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

%d bloggers like this: