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संत दोमनिक के पर्व पर संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on August 8, 2017 at 3:19 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (रेई): संत दोमनिक के पर्व दिवस के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने अपने ट्वीट संदेश में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

उन्होंने ट्वीट संदेश में लिखा, ″आज हम सुसमाचार की सेवा में संत दोमनिक के कार्यों के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें जिसको उन्होंने अपने वचनों एवं जीवन के माध्यम से प्रकट किया है।″

संत दोमनिक का जन्म 1170 ई. को स्पेन में हुआ था। उनके माता-पिता स्पेन के एक कुलीन परिवार के सदस्य थे।

दोमनिक ने पलेनसिया में शिक्षा प्राप्त की तथा उनके अध्ययन के मुख्य विषय थे ईशशास्त्र एवं कला। वे एक आदर्श विद्यार्थी माने जाते थे। सन् 1191 ई. में जब स्पेन में आकाल पड़ा तो कई लोग बेघर एवं अकेले हो गये। कहा जाता है कि दोमनिक ने उनकी मदद करने हेतु अपना सब कुछ बेच दिया। दो बार उन्होंने दूसरों को मुक्त करने के लिए खुद को ही बेचने की कोशिश की।

सन् 1194 ई. में दोमनिक ने बेनेडिक्टाईन धर्मसमाज में प्रवेश किया।


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने पेरू की कलीसिया को संदेश भेजा

In Church on August 8, 2017 at 3:15 pm

पेरू, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने पेरू में अपनी प्रेरितिक यात्रा के पूर्व वहाँ की कलीसिया को एक संदेश भेजा। संत पापा का यह वीडियो संदेश लीमा महाधर्मप्रांत के वेबसाईट पर महाधर्माध्यक्ष जुवान लुईस सिप्रियानी थोरने द्वारा जारी किया गया है।

संदेश में संत पापा ने समृद्ध मानव संसाधन पर चर्चा की है जो दक्षिण अमरीकी राष्ट्र की कलीसिया के भूत एवं वर्तमान को चिह्नित करता है। उन्होंने कहा कि पेरू में कई महान संत हुए हैं जिन्होंने कलीसिया के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा विभाजन को दूर कर एकता में आने हेतु मदद दी है।

संत पापा ने कहा, ″एक संत वह है जो हमेशा एकता बनाये रखने के लिए कार्य करता है ठीक उसी तरह जिस तरह येसु ने किया। एक संत निरंतर उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करता है।″

वीडियो संदेश में संत पापा ने पेरू वासियों को निमंत्रण दिया है कि वे इसी राह पर आगे बढ़ें तथा एकता हेतु कार्य करें, कड़वाहट एवं संदेह की अपेक्षा भविष्य को आशा के साथ देखें। एक ख्रीस्तीय भविष्य को हमेशा आशा के साथ देखता है क्योंकि वह उन बातों को पूरा होते हुए देखने की आशा करता है जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने की है।

ज्ञात हो कि संत पापा फ्राँसिस 15 से 21 जनवरी 2018 को पेरू की प्रेरितिक यात्रा करेंगे जिसमें वे खासकर, प्योर्टो मॉल्डोनाडो, त्रुजिल्लो एवं पेरू की राजधानी लीमा का दौरा करेंगे।


(Usha Tirkey)

नाइजीरिया के गिरजाघर में हमले के शिकार लोगों के प्रति संत पापा की संवेदना

In Church on August 8, 2017 at 3:14 pm

नाइजीरिया, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने दक्षिण पूर्वी नाइजीरिया के एक गिरजाघर पर हुए हमले पर, वहाँ के विश्वासियों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए एक संदेश भेजा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ओनिशा शहर के निकट ओजुबुलु स्थित संत फिलिप काथलिक गिरजाघर में रविवार को ख्रीस्तयाग अर्पित कर विश्वासियों पर हमले में 11 लोगों की मौत हो गयी है तथा 18 लोग घायल हो गये हैं।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से प्रेषित एक तार संदेश में कहा कि ″मृत्यु एवं घायल होने की खबर सुन संत पापा अत्यन्त दुःखी हैं। वे निनवी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष एवं विश्वासियों को अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट करते हैं, विशेषकर, आक्रमण के शिकार लोगों के परिवार वालों के प्रति वे सहानुभूति प्रकट करते हैं।

अंमब्रा राज्य पुलिस कमिश्नर गरबा उमर ने कहा कि हिंसा नशीली पदार्थों की तस्करी से जुड़ी हो सकती है। पुलिस ने कहा कि शूटिंग ओज़ुबुलु से नाइजीरिया के बीच एक विवाद का परिणाम है जो विदेशों में रह रहे थे।

पल्ली पुरोहित जूड ओनुवासो ने कहा कि एक व्यक्ति ने गिरजाघर में प्रवेश किया और शूटिंग शुरू कर दी: “पहले दौर के बाद, दूसरा दौर था और मुझे लगता है कि दूसरे राउंड के दौरान लोगों को गोली मार दी गई थी। जब मैं वापस आया,  मुझे पता चला कि मेरे कुछ पुरोहित मारे गए थे, लगभग पांच या छह व्यक्तियों के शरीर से खून बह रहा था।″


(Usha Tirkey)

उत्तर तथा दक्षिण कोरिया के बीच शांतिपूर्ण समझौता की अपील

In Church on August 8, 2017 at 3:12 pm

कोरिया, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (रेई): युद्धविराम संधि की घोषणा की 64वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में सियोंग्जू में आयोजित एक अंतरधार्मिक समारोह में उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में सच्ची शांति हेतु अपील की गयी।

एशियान्यूज़ के अनुसार काथलिक, प्रोटेस्टेंट एवं बौद्ध धर्मावलम्बियों ने 27 जुलाई 1953 की याद की जो युद्ध विराम के रूप में चिह्नित किया गया है किन्तु अब भी शांति का अभाव है।

कोरियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष हेजिनुस किम ही जुंग ने कहा, ″अगर कोरियाई प्रायद्वीप में शांति निश्चित रूप से पुष्ट नहीं हुई तो यह समस्त उत्तर पूर्व एशिया में समाप्त हो जाएगी एवं कोरियाई प्रायद्वीप पाउडर की तरह हो जायगा जिससे विस्फोट एवं दूसरे युद्ध को बढ़ावा मिलेगा। हमें शांति समझौते की आवश्यकता है न कि युद्धविराम मात्र।″

धर्माध्यक्ष किम ने टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स, विरोधी मिसाइल रक्षा प्रणाली तथा प्योंगयांग पर किसी भी हमले के खिलाफ संयुक्त राज्य द्वारा तैनाती पर, धर्माध्यक्षों के विरोध को दोहराया तथा कहा कि वे हथियारों के द्वारा शांति स्थापित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स, कोरिया में किसी तरह से भी शांति स्थापित नहीं कर सकता। महाधर्माध्यक्ष कौंगजू ने कहा कि टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स की तैनाती लागों की सहमति के बगैर हुई है, अतः इस पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। शांति के लिए, हमें एक संधि के मसौदे के साथ मिलकर काम करना चाहिए।”

इस बीच, उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा रविवार को कठोर प्रतिबंधों के बाद किम जोंग-उन और वाशिंगटन के शासन के बीच तनाव बढ़ना जारी है। प्योंगयांग ने प्रतिबंधों को उत्तर कोरिया को अलग करने और गला घोंटने के लिए घृणास्पद अमेरिकी षडयंत्र” के रूप में परिभाषित करते हुए “एक हजार गुना अधिक बड़े बदले” की धमकी दी। ”

रविवार को एक संयुक्त वक्तव्य में अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ड्रम्प तथा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाई इन ने कहा कि उत्तर कोरिया, जापान, दक्षिण कोरिया एवं अमरीका तथा विश्व के अन्य देशों के लिए एक बड़ा खतरा है।


(Usha Tirkey)

भारत करेगा 2020 में अगले एशियाई युवा दिवस की मेजबानी

In Church on August 8, 2017 at 3:11 pm

भारत, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): आगामी एशियाई युवा दिवस 2020 को भारत में आयोजित किया जाएगा, इसकी घोषणा 7वें एशियाई युवा दिवस के समापन पर मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस ने रविवार को योग्यकार्ता में की। इस घोषणा के साथ ही भारत के कलीसियाई अधिकारी एवं युवा प्रतिनिधियों ने इंडोनेशिया के प्रतिनिधियों से, एशियाई युवा क्रूस को ग्रहण किया।

8वें एशियाई युवा दिवस के लिए स्थान का निर्धारण भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा किया जाएगा। यह दूसरी बार है जब भारत को एशियाई युवा दिवस की मेजबानी करने का अवसर मिला है।

एशियाई युवा दिवस हर तीन साल में आयोजित किया जाता है। इसकी शुरूआत थाईलैंड में 1999 ई. में हुई थी। उसके बाद 2001 में ताईवान ने इसकी मेजबानी की थी। 2003 में भारत ने, हॉंगकोंग ने 2006 में, फिलीपींस ने 2009 में तथा 2014 में दक्षिण कोरिया ने मेजबानी की जिम्मेदारी सम्भाली थी।

चार दिवसीय युवा दिवस का समापन रविवार 6 अगस्त को हुआ।

संत पापा ने अपने संदेश में युवाओं को निमंत्रण दिया कि वे आगामी विश्व युवा दिवस की तैयारी हेतु येसु की माता मरियम को आदर्श के रूप में देखें तथा उनके साथ एक माता की तरह बातें करें एवं उनकी ममतामय मध्यस्थता में भरोसा रखें।

उन्होंने कहा कि इस तरह वे येसु का करीबी से अनुसरण करने का प्रयास करते हुए नाजरेथ की बाला की तरह विश्व में नयापन ला सकेंगे तथा इतिहास में एक निशान अंकित कर सकेंगे।

अपने संदेश में संत पापा ने युवाओं को अपना प्रेरित आशीर्वाद प्रदान किया तथा प्रभु की शांति एवं आनन्द की शुभकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

एशियाई युवा दिवस में मुस्लिम युवाओं की सहभागिता

In Church on August 8, 2017 at 3:09 pm

योग्यकार्ता, मंगलवार, 8 अगस्त 17 (एशियान्यूज़): विभिन्न मुस्लिम संगठनों के सौ से अधिक स्वयंसेवकों ने 7वें एशियाई युवा दिवस (योग्यकार्ता 2-6 अगस्त) की सफलता हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें विभिन्न देशों के 2,000 से अधिक युवाओं ने भाग लिया।

चार दिवसीय इस अवसर पर अंतरधार्मिक वार्ता के महत्व एवं देश में शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने सहअस्तित्व पर कई सभाओं में भाग लिया तथा विभिन्न धार्मिक मूल्यों को साक्षा किया। मुस्लिम स्वयंसेवकों ने इस अवसर पर सुरक्षा कार्यों सहित कई विभागों में उत्साहपूर्वक सहायता प्रदान की।

सभा में इंडोनेशिया की वर्तमान स्थित की चुनौतियों को प्रस्तुत किया गया। वास्तव में, दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता के कृत्यों में तेज से वृद्धि देखी गयी है।

शांतिपूर्ण सहअस्तित्व तथा इंडोनेशिया के बहुलवादी परंपरा में कुछ इस्लामिक चरमपंथी संगठनों द्वारा भय उत्पन्न करने के कारण सामाजिक तनाव उत्पन्न हो गया है।

एक मुस्लिम स्वयं सेवक रिफकी फैरूज़ ने कहा, ″ऐसी स्थिति में, इस अवसर को सफलता प्रदान कराने की जिम्मेदारी इंडोनेशिया तथा इसके मुसलमानों की बनती है।″

उन्होंने कहा, ″”हम मुस्लिम स्वयंसेवक हमारे समय को एआईडी प्रतिभागियों को ‘सीखने वाले साथी’ के रूप में समर्पित करने को तैयार हैं। हम विभिन्न मुस्लिम संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं जैसे- नहदलला उललाम और मुहम्मदिया।”

उनमें से कई योग्यकार्ता में इस्लामिक विश्वविद्यालयों के छात्र हैं जबकि कुछ स्थानीय इस्लामी बोर्डिंग स्कूल के छात्र। ए.वाई.डी अंतरधार्मिक एवं अंतर-संस्कृति के बीच आदान-प्रदान करने का एक अच्छा अवसर है। ताकि एशिया में विविधता, बहिष्कारवाद द्वारा नष्ट न किया जाए।

काथलिकों एवं मुसलमानों के बीच प्रमुख आदान-प्रदान सम्मेलन के तीसरे दिन के प्रदर्शनी सत्र में हुआ जिसकी विषयवस्तु थी ″विविधता में एकता″।

प्रतिभागियों ने विभिन्न दलों में विभक्त हो कर योग्यकार्ता के 25 प्रसिद्ध स्थलों का दौरा किया। इन अवसरों पर सुरक्षा का भार मुस्लिम स्वयंसेवकों ने लिया। सत्र के समय युवा मुसलमानों ने अपने विचार भी बांटें।


(Usha Tirkey)

प्रभु के रूपांतरण की घटना हमें आशा का संदेश देता है

In Church on August 7, 2017 at 3:04 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 अगस्त 2017 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 अगस्त को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।″

इस रविवार की धर्मविधि में प्रभु के रूपांतरण का पर्व मनाया जाता है। आज का सुसमाचार पाठ बतलाता है कि प्रेरित पेत्रुस, याकूब तथा योहन इस असाधारण घटना के साक्षी हैं। ″छः दिन बाद ईसा ने पेत्रुस, याकूब और उसके भाई योहन को अपने साथ ले लिया और वह उन्हें एक ऊँचे पहाड़ पर एकान्त में ले चले। जब वे प्रार्थना कर रहे थे उनका मुखमण्डल सूर्य की तरह दमक उठा और उनके वस्त्र प्रकाश के समान उज्ज्वल हो गये। शिष्यों को मूसा और एलियस उनके साथ बातचीत करते दिखाई दिये। तब पेत्रुस ने ईसा से कहा, प्रभु यहाँ होना हमारे लिए कितना अच्छा है। आप चाहें तो यहाँ मैं तीन तम्बू खड़ा कर दूँगा, एक आपके लिए, एक मूसा के लिए और एक एलियस के लिए। वह बोल ही रहा था कि उन पर एक चमकीला बादल छा गया।″ (मती. 17.1-5)

संत पापा ने कहा, ″प्रभु के रूपांतरण की घटना हमें आशा का संदेश देता है कि हम भी उनके साथ होंगे। वे हमें येसु के साथ मुलाकात करने हेतु निमंत्रण देते हैं ताकि हम भाई-बहनों की सेवा कर सकें।″

शिष्यों का तबोर पर्वत पर चढ़ना हमें अपने आपको सांसारिक वस्तुओं से विरक्त रखने, ऊपर की ओर देखने एवं येसु पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है।

संत पापा ने इसका अर्थ चौकसी एवं प्रार्थनामय तरीके से ख्रीस्त को सुनना बतलाया जो पिता के परम प्रिय पुत्र हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रार्थना हेतु समय निकालना हमें ईश्वर की वाणी को विनम्रता एवं आनन्द पूर्वक स्वीकार करने में मदद देता है। इस आध्यात्मिक चढ़ान में, सांसारिक वस्तुओं के त्याग में, हम सुसमाचार पर चिंतन करने, बाईबिल का पाठ करने तथा सौदर्य, वैभव एवं आनन्द प्राप्त करने के लिए हम शांत एवं प्रार्थनामय एकान्त वातावरण की खोज करते हैं।

जब हम हाथ में बाईबिल लेकर, एकान्त में ऐसा करते हैं तब हम इस आंतरिक सुन्दरता का एहसास करने लगते हैं। एक ऐसा आनन्द जो हमारे अंदर निहित ईश वचन के द्वारा उत्पन्न होता है। इस दृष्टिकोण से ग्रीष्म काल प्रभु के साथ मुलाकात करने एवं उनके प्रति समर्पण को प्रगाढ़ करने का एक अस्थायी अवसर है। इस अवधि में विद्यार्थी अपने अध्ययन के कार्यों से मुक्त होते हैं तथा कई परिवार छुट्टियों में जाते हैं। विश्राम की इस अवधि में तथा अपने दैनिक कार्यों से मुक्त रहने में यह महत्वपूर्ण है कि शरीर और आत्मा में हम सक्रिय रूप से आध्यात्मिक पथ को गहरा बनायें।

रूपांतरण के अनुठे अनुभव के बाद शिष्य प्रभु से मुलाकात कर हृदय से परिवर्तित होकर पर्वत से नीचे उतरे। संत पापा ने कहा कि यह एक ऐसा रास्ता है जिसपर हम भी चल सकते हैं। येसु के बारे जानने की कोई सीमा नहीं है किन्तु यह हमें पर्वत से नीचे ले चलता है, दिव्य आत्मा से संबल प्राप्त कर हम सच्चे रूपांतरण की ओर बढ़ने तथा दैनिक जीवन में उदारता का सतत साक्ष्य देने हेतु बल प्राप्त करते हैं।

ख्रीस्त की उपस्थिति एवं उनके वचनों के माध्यम से रूपांतरित होकर हम, हमारे सभी भाई बहनों खासकर, जो अकेले हैं, परित्यक्त अथवा बीमार हैं या दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अन्याय, दुष्टता एवं हिंसा द्वारा अपमानित किये जा रहे हैं उन लोगों के बीच ईश्वर के ठोस प्रेम के चिन्ह बनें।

रूपांतरण के दौरान स्वर्ग से पिता ईश्वर की वाणी यह कहते हुई सुनाई पड़ी, यह मेरा प्रिय पुत्र है मैं इस पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ, इसकी सुनो। “(पद.5).

संत पापा ने माता मरियम के माध्यम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, ″हम माता मरियम की ओर देखें जो हमें सुनती है। जो ईश पुत्र का स्वागत करने और उनके हरेक वचन को हृदय में संजोये रखने के लिए तत्पर रहती है। हमारी स्वर्गिक माता एवं ईश्वर की माता ईश्वर की वाणी को सुनने में सहायता दे ताकि ख्रीस्त हमारी ज्योति बनें एवं हमारे सम्पूर्ण जीवन की रक्षा करें। हम प्रभु को हम सभी के अवकाश को समर्पित करें, विशेषकर, जो वृद्धावस्था, बीमारी, काम, आर्थिक मामलों अथवा अन्य कारणों से छुट्टी लेने में असमर्थ हैं ताकि वे भी आराम का समय पा सकें, मित्रों का साथ एवं आनन्दमय क्षण को व्यतीत कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, ″रोम वासियो तथा विभिन्न देशों, परिवारों, संस्थाओं तथा सभी विश्वासियों का मैं अभिवादन करता हूँ।

संत पापा ने युवाओं का अभिवादन करते हुए कहा, ″आज लड़के-लड़कियों का कई दल यहाँ उपस्थित है। मैं बड़े स्नेह से आप सभी का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, वेरोना, अद्रिया, कमपोदारसेगो एवं ओफारेंगो के युवा दलों को।″

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

क्षमा हमारे दिल को मुक्त करता है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on August 7, 2017 at 3:02 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 7 अगस्त 2017(रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी विश्वासियों को आशा और क्षमा जैसे उच्च मानवीय गुणों के हासिल करने और उनका प्रयोग कलीसिया के विस्तार हेतु करने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने 6 अगस्त के संदेश में उन्होंने लिखा,″आशा हृदय का वह सदगुण है जो स्वयं को अंधेरे में बंद नहीं करता एवं अतीत पर ध्यान नहीं देता, बल्कि आने वाले कल को देखने में सक्षम है।″

7 अगस्त के ट्वीट में उन्होंने लिखा,″क्षमा हमारे दिल को मुक्त करता है और हमें नए सिरे से शुरू करने की अनुमति देता है। क्षमा हमें आशावान बनाता है। क्षमा के बिना, कलीसिया का निर्माण नहीं किया जा सकता है।″


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने धन्य पापा पौल छठे की कब्र का दर्शन किया

In Church on August 7, 2017 at 3:00 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 7 अगस्त 2017(रेई) : वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति अनुसार संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 6 अगस्त को धन्य पापा पौल छठे के 39वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाधर में सुबह साढ़े नौ बजे से दस बजे तक उनकी कब्र का दर्शन किया और मौन प्रार्थना की।

इटली के ब्रेशिया प्रांत स्थित कोनचेसियो में धन्य पापा पौल छठे का जन्म 26 सितम्बर 1897 ई. को हुआ था। 21 जून 1963 को वे काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष नियुक्त हुए और संत पापा जोन तेईस्वें के उतराधिकारी बनें। 80 वर्ष की उम्र में रोम के निकट परमाधिकारियों के ग्रीषम अवकाश गृह, कास्टेल गंडोल्फो में 6 अगस्त 1978 को उनकी मृत्यु हुई। 18 मार्च 1993 को संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें प्रभु सेवक का सम्मान दिया और संत पापा फ्राँसिस ने 19 अक्टूबर 2014 को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में उन्हें धन्य घोषित किया।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने सीरो-मलंकारा कलीसिया में कई परिवर्तन किए

In Church on August 7, 2017 at 2:58 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 7 अगस्त 2017(रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 5 अगस्त को सीरो-मलंकारा कलीसिया के लिए भारत के केरल स्थित पारास्सेला नए धर्मप्रांत की स्थापना की और धर्माध्यक्ष थोमस युसेबियुस नाइकेपारांबिल को नये धर्मप्रांत का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। धर्माध्यक्ष थोमस युसेबियुस नाइकेपारांबिल अबतक संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में संत मरिया शांति की महारानी सीरो-मलंकारा धर्मप्रांत के लिए धर्माध्यक्ष थे।

संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्ष थोमस युसेबियुस नाइकेपारांबिल के स्थान पर धर्माध्यक्ष फिलिप स्टीफन थोट्टथिल को संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में संत मरिया शांति की महारानी सीरो-मलंकरा धर्मप्रांत के लिए नये धर्माध्यक्ष नियुक्त किया।

अबतक वे तिरुवल्ला धर्मप्रांत (भारत) के सहायक धर्माध्यक्ष के रुप में कार्यरत थे।

संत पापा फ्राँसिस ने यूरोप और ओशिनिया में रहने वाले सीरो-मलंकारा विश्वासियों के लिए धर्माध्यक्ष जोन कोचुथुंडिल को प्रेरितिक प्रवेक्षक नियुक्त किया। वे सीरो-मलंकारा कलीसिया कूरिया महाधर्मप्रात के महाधर्माध्यक्ष हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने केरल के सीरो-मलंकारा पुट्टूर धर्मप्रांत के लिए फादर जोर्ज कालायिल को नये धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। अबतक नव निर्वाचित धर्माध्यक्ष जोर्ज कालायिल पुट्टूर महागिरजा के पल्ली पुरोहित थे।

नये धर्मप्रांत पारास्साला के नये धर्माध्यक्ष धर्माध्यक्ष थोमस युसेबियुस नाइकेपारांबिल को जन्म केरल के मैलाप्रा में 6 जून सन् 1061 को हुआ।

भारत में दर्शन शास्त्र और ईशशास्त्र की पढ़ाई करने के पश्चात उन्होंने रोम में दर्शनशास्त्र में डॉक्ट्रेट की पदवी हासिल की। 1986 में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। वे मलयालम, हिन्दी, अंग्रेजी, इताली और जर्मन भाषाओं में बात-चीत कर सकते हैं और सीरियक, ग्रीक और फ्रेंच पढ़ सकते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

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