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ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सप्ताह में प्रवेश करते हुए काथलिकों को चाहिए कि…

In Church on January 19, 2017 at 3:26 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 जनवरी 2017 (वीआर अंग्रेजी): ख्रीस्तीय एकता हेतु प्रार्थना सप्ताह में प्रवेश करते हुए काथलिकों को चाहिए कि वे इसे मनायें क्योंकि वर्ष 2016 सचमुच ख्रीस्तीय एकता का वर्ष था। उक्त बात ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल कूर्ट कोच ने कही जिन्होंने विगत वर्ष संत पापा की उन सभी यात्राओं में हिस्सा लिया जिसको उन्होंने ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देने हेतु सम्पन्न किया।

कार्डिनल ख्रीस्तीय एकता हेतु प्रार्थना सप्ताह पर चिंतन प्रस्तुत कर रहे थे जो कुरिंथियों को लिखे संत पौलुस के दूसरे पत्र पर केंद्रित है।

कार्डिनल ने कहा, ″प्रार्थना के इस सप्ताह की मुख्य विषयवस्तु है,″ मेल-मिलाप″ जो जर्मनी के ख्रीस्तीयों द्वारा प्रस्तावित है जहाँ से सुधार की शुरुआत हुई थी। हम सुधार के प्रति आभारी हैं तथा उन सभी खोजों के प्रति भी जो लूथेरन एवं काथलिकों में एक समान हैं। हमें विगत 500 सालों की दुखद इतिहास की भी याद रखनी चाहिए। यद्यपि लुथर कलीसिया को विभाजित करना नहीं चाहते थे तथापि भयावाह युद्ध का माहौल बन गया तथा यूरोप खून के कारण लाल सागर में बदल गया। हमें इन अध्यायों को नहीं भूलना चाहिए तथा पश्चाताप एवं मेल-मिलाप के लिए कार्य करना चाहिए, साथ ही साथ सुधार के सुन्दर उपहार के लिए आभार प्रकट करना चाहिए।

स्वीडेन में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का स्मरण कर कार्डिनल ने कहा कि लुंड में आयोजित सभा उस वार्ता का फल था जो लूथेरनों एवं काथलिकों के बीच द्वितीय वाटिकन महासभा से ही चलती आ रही है, विशेषकर, सन् 1999 में औसबर्ग में संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर। इस प्रक्रिया के बिना लुंड में सभा का आयोजन नामुमकिन था। उन्होंने बतलाया कि इस यात्रा के दो मुख्य भाग थे पहला लुंड स्थित महागिरजाघर में ख्रीस्तीय एकता हेतु प्रार्थना सभा तथा मालमो स्टेडियम में काथलिकों एवं लुथेरनों के बीच सहयोग को मनाया जाना। कार्डिनल ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि इस दौरान संत पिता के हृदय में न केवल ख्रीस्तीय एकता हेतु धार्मिक सिद्धांत की बातें थीं किन्तु सभी मानव जाति के साथ ठोस सहयोग की भावना भी।

कार्डिनल कोच ने संबंधों में सुधार लाने तथा कलीसिया में आये दरारों को भरने के लिए मेल मिलाप को ख्रीस्तीय एकता का केंद्र बतलाया। उन्होंने वर्ष 2016 को सचमुच ख्रीस्तीय एकता का वर्ष करार दिया। जिसमें संत पापा ने रूसी ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बरथोलोमियो प्रथम, ग्रीक ऑर्थोडोक्स के महाधर्माध्यक्ष आदि प्रमुख धर्मगुरूओं से मुलाकात की थी।


(Usha Tirkey)

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