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शरणार्थियों के स्वागत की संस्कृति के प्रतीक मूर्ति की संत पापा द्वारा आशीष

In Church on January 26, 2017 at 3:01 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 26 जनवरी 2017 (वीआर अग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने विस्थापितों एवं शरणार्थियों के प्रति पुनः अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया जब उन्होंने एक प्रतिमा को आशीष प्रदान की जिसे लम्पेदूसा स्थित सिसिली द्वीप के बंदरगाह पर स्थापित किया जायेगा। लम्पेदूसा गरीबी तथा हिंसा से भाग कर यूरोप में प्रवेश करने वाले हज़ारों शरणार्थियों के लिए प्रवेश द्वार है।

25 जनवरी बुधवार को पौल षष्ठम सभागार में प्रवेश करने के पूर्व संत पापा ने मूर्तिकार मौरो भकाई से मुलाकात की तथा उसके द्वारा निर्मित मूर्ति को आशीष प्रदान किया जिसे स्वागत की संस्कृति के प्रतीक स्वरूप, लम्पेदूसा के अधिकारी एवं जनता वहाँ स्थापित करना चाहते हैं।

भौगोलिक स्थिति के कारण यह नन्हा द्वीप अफ्रीकी शरणार्थियों के प्रवेश के लिए प्रमुख स्थान है। विगत सालों में हज़ारों निराश स्त्री, पुरूषों और बच्चों ने इस द्वीप पर पाँव रखा है। दुर्भाग्य से लम्पेदूसा पहुँचने में सैंकड़ों लोगों की जानें भी गयी हैं।

पिस्तोरिया के तोस्कान निवासी भकाई ने बतलाया कि 800 किलोग्राम की यह मूर्तिकला श्वेत संगमरमर से बनी है जिसे इताली जल सुरक्षा बल की सहायता से लम्पेदूसा में स्थापित किया जायेगा।

भकाई के कई सहकर्मी गिरजाघरों एवं धार्मिक स्थलों में कार्यरत हैं। उन्होंने अधिकतर ख्रीस्तीय धार्मिक स्थानों में कार्य किया है जो उसके लिए प्रेरणा स्थल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लम्पेदूसा के लिए यह प्रतिमा एक उदाहरण है जो विश्व में शरणार्थियों के स्वागत की प्रेरणा दे रहा है।

13 मार्च 2013 को संत पापा बनने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी पहली प्रेरितिक यात्रा लम्पेदूसा के द्वीप पर की थी जहाँ उन्होंने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए उन लोगों के लिए प्रार्थना की थी जिन्होंने लम्बी यात्रा में अपना जीवन खो दिया है तथा उदासीनता की संस्कृति का बहिष्कार करने का अह्वान किया था।


(Usha Tirkey)

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