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समर्पित जीवन के लिए गठित धर्मसंघ की आम सभा को संत पापा का सम्बोधन

In Church on January 28, 2017 at 4:23 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 जनवरी 2017 (वीआर सेदोक): हम उस रक्तस्राव को झेल रहे हैं जो समर्पित जीवन तथा कलीसिया के जीवन को कमजोर करता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने धर्मसंघी एवं धर्मसमाजियों की प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ की आम सभा के प्रतिभागियों को सम्बोधित कर, धर्मसंघीय बुलाहट के परित्याग पर चिंता व्यक्त करते हुए कही।

उन्होंने कहा, ″समर्पित जीवन का परित्याग बहुत अधिक मायने रखता है। यह सच है कि कुछ लोग सामंजस्य नहीं कर पाने के कारण धर्मसंघ छोड़ देते हैं क्योंकि वे गंभीर चिंतन के बाद पाते हैं कि उनमें बुलाहट थी ही नहीं किन्तु कुछ लोग ऐसे हैं जो समय बीतने के साथ अपनी बुलाहट में विश्वस्त नहीं रह पाते और कई बार तो आजीवन व्रत धारण के कुछ ही सालों बाद ऐसी घटना देखने को मिलती है।″

संत पापा ने कहा कि कई कारण हैं जो निष्ठा को प्रभावित करते हैं। निष्ठा को बनाये रखने में बाधक पहला कारण है सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जहाँ हम जीते हैं। हम ऐसी संस्कृति में जीते हैं जो खंड तथा अस्थायित्व की भावना से प्रभावित है जो लोगों को फैशन का गुलाम बनाता है। हम एक ऐसे समाज में जीते हैं जहाँ आर्थिक नियम नैतिक मूल्यों का स्थान ले लेती है तथा जीवन के मूल्यों की कीमत पर अपने को लागू करती हैं। समाज जहाँ पैसों एवं लाभ का बोलबाला है और अभावग्रस्त लोगों को अलग कर दिया जाता है। ऐसी परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि दूसरों को सुसमाचार सुनाने के पूर्व अपने को ही सुसमाचार सुनाया जाए।

इस सदर्भ में संत पापा ने युवा जगत पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवा बहुत उदार, सहयोगी तथा सामाजिक एवं धार्मिक स्तर पर समर्पित होते हैं। वे दुनिया द्वारा प्रदान की जाने वाली चीज से अलग वास्तविक आध्यात्मिक जीवन की खोज करते हैं किन्तु युवाओं में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो दुनियावी विचारों के शिकार हैं जिन्हें किसी भी कीमत पर सफलता हासिल करने की चाह, आसानी से धन एवं सुख अर्जित करने की अभिलाषा है। संत पापा ने धर्मसंघ के सभी सदस्यों को परामर्श दिया कि वे उन युवाओं के साथ चलें तथा सुसमाचार के आनन्द एवं ख्रीस्त के साथ उनके बीच आयें।

संत पापा ने दूसरा कारण बतलाते हुए कहा कि यह समर्पित जीवन में ही पाया जाता है जहाँ निष्ठा का साक्ष्य प्रस्तुत करने के बजाय उसे जटिल रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण के लिए रूटीन और थकान भरा जीवन, व्यवस्था का भार, आंतरिक विभाजन, सत्ता की खोज, दुनियावी ढंग से संस्था का संचालन, अधिकारियों की सेवा आदि। उन्होंने कहा कि यदि समर्पित जीवन अपनी प्रेरिताई तथा आकर्षण को बनाये रखना चाहती है तो उसे अपने निकट और दूर के सभी लोगों के प्रति निष्ठपूर्ण आचरण अपनाने की आवश्यकता है। येसु को केंद्र में रखने एवं ताजगी को बनाये रखने की जरूरत है। आध्यात्मिक आकर्षण, मिशन की शक्ति, ख्रीस्त का अनुसरण करने की सुन्दरता तथा सच्ची आशा एवं आनन्द को प्रकट करना है।

संत पापा ने समर्पित जीवन में बुलाहट को नहीं खोने हेतु समुदाय में भ्रातृत्व की भावना अपनाने की सलाह दी जिसे सामुदायिक प्रार्थना, धर्मग्रंथ पठन, यूखरिस्त में सक्रिय सहभागिता तथा मेल- मिलाप संस्कार द्वारा पोषित किया जा सकता है। इसके साथ ही, ग़रीबों के बीच सादगी भरे जीवन के आनन्दमय साक्ष्य को प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है।

संत पापा ने धर्मसंघीय समुदायों में एक-दूसरे के प्रति धीरज की भावना रखने की सलाह देते हुए सचेत किया कि समुदाय में समर्पित जीवन हेतु सहयोग नहीं मिलने पर, समर्पित जीवन के परित्याग की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।


(Usha Tirkey)

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