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ईश्वर के हृदय को खोलने की चाभी प्रार्थना है, संत पापा

In Church on February 28, 2017 at 3:50 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार 28 फरवरी 2017 (सेदोक) : संत पापा फ्राँसिस ने चालिसा काल की शुरुआत में ट्वीट प्रेषित विश्व के विश्वासियों को प्रार्थना करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने संदेश में लिखा, ″प्रार्थना वह चाभी है जो करुणावान ईश्वर के हृदय रुपी द्वार को खोल देती है।″

विदित हो संत पापा फ्राँसिस येसु मसीह के दुःखभोग के चालीसाकाल की शुरुआत 1 मार्च राख बुधवार को राख मलन धर्मविधि से करेंगे। इस काल में सभी ख्रीस्तीय प्रार्थना, त्याग-तपस्या, दान देकर येसु ख्रीस्त के पास्का में भाग लेने हेतु आपने आप को तैयार करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

फोकोलारे मूवमेंट द्वारा ख्रीस्तीय एकता हेतु नये सिरे से प्रतिबद्धता

In Church on February 28, 2017 at 3:48 pm

 

ओतमारिंग, मंगलवार 28 फरवरी 2017 (सेदोक) : जर्मनी के ओतमारिंग ख्रीस्तीय एकता के गढ़ में क्लारा लूबिक द्वारा स्थापित फोकोलारे आंदोलन के जेनरल काऊन्सिल सदस्य एकत्रित हुए हैं। यहाँ 50 वर्षों से काथलिक और एवांजेलिकल ख्रीस्तीय येसु ख्रीस्त के आदेशानुसार लोगों के बाच एकता की गवाही देते आ रहे हैं। यह वही स्थान है जहाँ 1999 में धर्मविधि समारोह के लिए औचित्य के सिधांत पर संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था.

इस विशिष्टता से ख्रीस्तीय एकता के संदर्भ में स्पस्ट रुप से घोषणा की इच्छा की गई है। ख्रीस्तीयों के बीच मिलकर काम करने हेतु प्रोत्साहन देते हुए उत्तरदायित्व का नवीकरण किया गया।

ओतमारिग घोषणा में कहा गया है कि आस वर्ष लूथर सुधार के 500 वीं वर्षगांट के विशेष अवसर पर 31 अक्टूबर को स्वीडेन के लंड शहर में रोमन काथलिक कलीसिया और लूथरवादी विश्व संघ की बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया जिसमें दोनों समुदायों को बपतिस्मा में नीहित विश्वास में बढ़ने, योसु मसीह के सुसमाचार का साक्ष्य देने, विश्वासी धर्मप्रचारक बनने तथा मानव जाति के लिए ईश्वर के प्रेम को बांटने हेतु आमंत्रित किया गया है।

इस ओतमारिंग घोषणा को मरिया वोचे के एक पत्र के साथ काथलिक कलीसिया के परमधर्म गुरु संत पापा फ्राँसिस, प्राधिधर्माध्यक्ष बारथोलोम प्रथम, कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष जस्टीन वेल्बे, लूथरन विश्व संघ के अध्यक्ष और महासचिव के लिए भेजा गया।


(Margaret Sumita Minj)

उरुग्वे – सोरियानो और कोलोन में श्रम संकट हेतु कलीसिया की चिंता

In Church on February 28, 2017 at 3:47 pm

मर्सिडीज, मंगलवार, 28 फरवरी 2017 ( फीदेस) :  मर्सिडीज  धर्मप्रांत के कई लोगों के स्थायी और सुरक्षित नौकरियों से हटा दिये जाने के कारण तथा बेरोजगार लोगों के परिवारों की कठिनाईयों को द्खते हुए चालीसा काल की शुरुआत में मर्सिडीज  धर्मप्रांत के पुरोहितों और धर्माध्यक्ष कार्लोस कोल्लाजी ने अपनी चिंता और दर्द व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया।

काम करने का मौलिक अधिकार जो प्रत्येक व्यक्ति को एक बेहतर दुनिया का सह निर्माता और योगदान कर्ता बनाता है, पूँजी और लाभ के आगे मनुष्य एक गुलाम बनकर रह जाता है।

धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा फीदेस को भेजे गये पत्र में पुरोहितों को ″काम के संकट ″ पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया गया है। 1 मार्च राख बुधवार से शुरु होने वाले चालीसा काल में पुरोहितों को इस संकट से प्रभावित परिवारों के करीब रहने और उनकी मदद हेतु दया के कार्यों को जारी रखने के लिए आमंत्रित किये गये हैं साथ ही उन्हें संघर्ष दलों के बीच विवेकपूर्ण और रचनात्मक बात-चीत को बढ़ावा देने के पूरा प्रयत्न करना चाहिए।

ख्रीस्त के पास्का का रहस्य प्रतिष्ठित कार्यों की खोज और समस्याओं के समाधान में मालिकों, श्रमिकों, राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों के मन को प्रज्वलित और प्रोत्साहित करे।

सन् 2016 में फीदेस द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार उरुग्वेय के उद्योग लगातार तीन वर्षों से बंद पड़े हैं। फानापेल कागज फैक्टरी और खाद्य उद्योग मोलिनो डोलोरेस के बंद होने से बहुतों की नौकरी चली गई। परिणाम स्वरुप अनेक परिवारों के पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है।


(Margaret Sumita Minj)

भारत के गृह मंत्री ने सलेसियन फादर को युवा काम के लिए किया सम्मानित

In Church on February 28, 2017 at 3:45 pm

ईटानगर, मंगलवार, 28 फरवरी 2017 (वी आर सेदोक): अरुणाचल प्रदेश के 31 वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक काथलिक पुरोहित को भारत के गृह मंत्री ने सम्मानित किया। राज्य की राजधानी ईटानगर में 20 फरवरी को दीमापूर धर्मप्रांत के सलेसियन फादर सीरियक पुलिनथानाथूमालायिल को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने युवा काम में उत्कृष्टता के लिए राज्य पुरस्कार स्वर्ण पदक से सम्मानित किया।

विगत 16 वर्षों में फादर सिरियक ने पूर्वोत्तर भारतीय राज्य में दो युवा केन्द्रों की स्थापना की। सन् 2000 में उन्होंने पूर्वी अरुणाचल के खोनसा में पहला युवा केंद्र स्थापित किया। सन् 2007 में उन्होंने पश्चिम अरुणाचल के ईटानगर में डॉन बोस्को युवा केंद्र शुरू कर दिया। प्रशस्ति पत्र के अनुसार, ऍ डॉन बोस्को युवा केंद्र ने सैंकड़ो युवाओं को देश के विभिन्न भागों में नौकरी पाने में मदद की।ऍ

पुरस्कार समारोह का आयोजन इटानगर के इंदिरा गाँधी उद्यान में किया गया था। इस अवसर पर राज्य के मुख्य मंत्री पेमा खंडू, संघीय राज्य मंत्री किरण रिज्जू, उप मुख्यमंत्री चौना मैइन, अरुणाचल गृह मंत्री कुमार वाई और महा सचिव शकुंतला गामलिन उपस्थित थे।

मुख्य मंत्री खंडू ने युवा केंद्र का दौरा कर ताडार तानियंग होल का उद्घाटन किया और दोरजी खांडू एनेक्सी की नींव के पत्थर का अनावरण करने हुए कहा, मैं ईटानगर के डोन बोस्को युवा केंद्र की प्रशंसा करता हूँ  इसने पिछले कई वर्षों से युवाओं को एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए उन्हें सक्षम बनाया है।

युवाओं को प्रशिक्षण केंद्र में, कंप्यूटर प्रशिक्षण, आतिथ्य, अंग्रेजी में बात करने का कला और अन्य कौशल भी शामिल हैं। भारत के प्रमुख व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं सहयोग इस केंद्र को प्राप्त है।

ईटानगर में फादर सीरियक ने साक्षरता केंद्र और ई-सेक्टर में 100 लड़कों के लिए आवासीय सुविधाओं के साथ एक पुस्तकालय सहित एक आवासीय कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र के साथ कंप्यूटर सेंटर की स्थापना की है। विवेक विहार में लड़कियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र है।

फादर ईटानगर के संकट में फंसे बच्चों के लिए चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से एक चाइल्डलाइन का भी संचालन करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

धर्मसंघी समतावादी समाज की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध

In Church on February 28, 2017 at 3:42 pm

चेन्नई, मंगलवार, 28 फरवरी 2017 (एशिया न्यूज ) : समाजसेवी पुरोहितों और धर्मबहनों के एक दल ने गरीबों खासकर दलितों को उत्पीड़न से बाहर निकालने और उनके प्रति उपेक्षा को समाप्त करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की है।

भारत के 14 राज्यों से एकत्रित, 34 धर्मसमाज के न्याय और शांति के लिए बने धार्मिक मंच के 68 धर्मसंघियों का दो दिवसीय सेमिनार 17 और 18 फरवरी को चेन्नई में आयोजन किया गया था जिसमें उन्होंने भारतीय संविधान के आधार पर जातीय असंवेदीकरण और समावेशी समुदायों के निर्माण पर विचार विमर्श किया।

मंच ने एक बयान जारी किया है कि काथलिक पुरोहितगण और धर्मबहनें येसु ख्रीस्त के पद चिन्हों पर चलते हुए अन्यायपूर्ण सामाजिक ढांचे के खिलाफ विद्रोह करें और एक समतावादी समाज के निर्माण हेतु कार्य करें।

सेमिनार में प्रख्यात दलित वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक परिस्थिति में दलित सशक्तिकरण के तरीकों,  भारतीय कलीसिया के अंदर दलित भेदभाव का निपटारा, एक महिला के नजरिए से जातीय भेदभाव जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। कुछ दलित महिलाओं ने जातिवाद की अनैतिकता के खिलाफ कठिन संघर्ष के अपने अनुभवों को साझा किया।

मंच के राष्ट्रीय संयोजक जेकब पीनिकापारंबिल और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सचिव मंजू कुलामपुरम द्वारा हस्ताक्षर किये गये बयान के अनुसार,″हर छठा भारतीय दलित है। जाति पदानुक्रम विनाशकारी, विभेदक, दलितों विशेषकर दलित महिलाओं के प्रति दमनकारी है।″

हमारे देश की स्वतंत्रता के 70 वर्ष बाद भी जाति प्रथा के कारण अस्पृश्यता की क्रूरता और दलितों के खिलाफ अमानवीय अत्याचार बढ़ रहे हैं।

धर्मसंघियों के रुप में हमारा प्रेरितिक कार्य और उत्तरदायित्व है कि हम हाशिये पर जीवन यापन करने वालों का पक्ष लें जैसा कि बाइबिल में ईश्वर ने और येसु ने अपने जीवन काल में किया था।

हमें दलितों के साथ हो रहे अन्याय के प्रति जागरुक रहने और उन अन्यायों के उन्मूलन के लिए तरीके खोजने और उनके अनुसार काम करने की जरुरत है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने दी धन्य घोषणा हेतु प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन

In Church on February 27, 2017 at 4:30 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): सन्त पापा फ्राँसिस ने सोमवार, 27 फरवरी को कार्डिनल आन्जेलो आमातो के नेतृत्व में परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद द्वारा धन्य घोषणा के लिये प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन दे दिया है।

इनके नाम इस प्रकार हैं, सलेशियन पुरोहित प्रभु सेवक तितुस ज़ेमन जो सन् 1969 ई. में विश्वास के कारण मृत्यु के शिकार हुए थे।

काकापोयस के धर्माध्यक्ष, सलेशियन धर्मसमाज के सदस्य, प्रभु सेवक ओतावियो ऑर्तिज अर्रियस्ता।

मरियम को समर्पित धर्मसमाज के संस्थापक, प्रभु सेवक अंतोनियो प्रोवोलो, जिन्होंने बहरों एवं गूँगों को शिक्षा देने के लिए धर्मसमाज की स्थापना की।

येसु समाजी पुरोहित, प्रभु सेवक अंतोनियो रेपिसो मार्तिनेज जिन्होंने डिवाईन शेफर्ड धर्मसमाज की स्थापना की है।

येसु के पवित्र हृदय की प्रेरितिक सेविकाओं के धर्मसंघ के संस्थापक, प्रभु सेवक मर्सी काबेजास तेर्रेरो की मरिया।

चैरिटी धर्मसमाज की धर्मबहन, प्रभु सेविका लुचिया इमाकुलेट कनसेप्शन।

लोकधर्मी, प्रभु सेवक पीटर हेरेमो रूबियो

परिवार के पिता, एक लोकधर्मी, प्रभु सेवक वितोरिया त्रांकानेल्ली।


(Usha Tirkey)

काथलिक एवं अंगलिकन ख्रीस्त में एक-दूसरे के भाई-बहन

In Church on February 27, 2017 at 4:28 pm

रोम, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): आज, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के साथ हम एक बपतिस्मा द्वारा एक-दूसरे को सच्चे भाई एवं बहन के रूप में पहचान रहे हैं। मित्र और तीर्थयात्री के रूप में हम येसु ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए एक साथ चलना चाहते हैं। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को रोम स्थित सब संतों को समर्पित अंगलिकन गिरजाघर में विश्वासियों को सम्बोधित कर कही।

पल्ली के सभी सदस्यों को सम्बोधित कर संत पाप ने कहा, ″पल्ली के वर्षगाँठ समारोह को मनाने हेतु मुझे निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद देता हूँ। रोम में प्रथम अंगलिकन धर्मविधि के अनुष्ठान का अब दो सौ साल गुजर चुका है। इन दो शताब्दियों में काथलिक एवं अंगलिकन ख्रीस्तीयों में बहुत कुछ परिवर्तन हुआ है जो पहले एक-दूसरे को संदेह की नजर से देखते थे। आज ईश्वर की कृपा से, एक बपतिस्मा द्वारा एक-दूसरे को सच्चे भाई-बहन की तरह पहचान पा रहे हैं। मित्र और तीर्थयात्री की तरह ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए हम एक साथ आगे बढ़ें।

संत पापा ने ख्रीस्त की प्रतिमा पर आशीष देने के आग्रह पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ख्रीस्त हमें निहार रहे हैं तथा उनकी दृष्टि एक मुक्तिदाता, प्रेमी एवं दयालु व्यक्ति की दृष्टि है। इसी करुणामय दृष्टि ने शिष्यों के हृदय को बेध दिया था जिन्होंने अपना सबकुछ छोड़, जीवन की एक नई यात्रा शुरू की ताकि वे प्रभु के सुसमाचार की घोषणा कर सकें। इस पवित्र प्रतीक जिसके द्वारा येसु हम पर दृष्टि डालते हैं ऐसा लगता है कि मानो वे हमें देख रहे हैं, और कह रहे हैं- क्या आप बीती सभी बातों को त्यागने के लिए तैयार हैं? क्या आप मेरे प्रेम एवं करुणा की घोषणा करना चाहते हैं?

संत पापा ने कहा कि दिव्य करूणा की उनकी दृष्टि, सभी ख्रीस्तीय प्रेरिताई का स्रोत है। संत पौलुस कोरिंथियों को लिखे अपने पत्र में कहते हैं, ″ईश्वर की दया ने हमें यह सेवा कार्य सौंपा है इसलिए हम सभी हार नहीं मानते।” (2 Cor 4:1) हमारी प्रेरिताई ईश्वर की करुणा से प्रवाहित होती है। जो हमारी प्रेरिताई को पुष्ट करती एवं शक्ति खो देने से बचाती है।

संत पापा ने पत्र पर गौर करते हुए कहा कि संत पौलुस का कोरिंथ के विश्वासियों के साथ हमेशा अच्छा संबंध नहीं रहा किन्तु वे उन चुनौतियों से ऊपर उठ पाये। उन्होंने विभाजन की समस्या के बीच भी अपनी प्रेरिताई को करुणा के प्रकाश में आगे बढाते हुए अपने आप को मेल-मिलाप हेतु समर्पित किया। संत पापा ने कहा कि जब हम बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्तीय असहमति की स्थिति महसूस करते हैं तथा उस पर विजय पाने हेतु करुणावान ईश्वर की ओर मुड़ते हैं तब हम संत पौलुस के समान करते हैं जिसको उन्होंने अपने प्रथम समुदाय के लिए किया।

संत पापा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक काथलिक एवं अंगलिकन के रूप में हम कृतज्ञ हैं कि सदियों की आपसी अविश्वास के बाद, अब हम एक-दूसरे में ख्रीस्त की कृपा के परिणाम को पहचान पा रहे हैं। उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि ख्रीस्तीयों के बीच एक-दूसरे के करीब आने की भावना में वृद्धि हुई है।

उन्होंने अंगलिकन कलीसिया के विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, ″आइये, येसु के विश्वस्त शिष्य बनने हेतु हम एक दूसरे को प्रोत्साहन दें, बीती बातों के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर, एक साथ मिलकर प्रार्थना करने की इच्छा जागृत करें। इस चाह का एक उत्तम चिन्ह है ‘ट्विनिंग’, सब संतों को समर्पित काथलिक गिरजाघर एवं अंगलिकन गिरजाघर।″

संत पापा ने सभी संतों से प्रार्थना की कि वे एक साथ मिलकर हमारे लिए एक रास्ता खोल दें जहाँ हम भाईचारा एवं ख्रीस्तीय एकता के साथ आगे बढ़ सकें। जहाँ हम येसु के साथ एक हो जायेंगे तथा वे अपनी करुणावान दृष्टि हम पर डालेंगे। वे हमें एकता एवं प्रेम का माध्यम बनने हेतु पूर्ण समर्पित होने के लिए बुला रहे हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि ईश्वर का चेहरा हम पर, हमारे परिवारों एवं पूरे समुदाय पर प्रतिबिम्बित हो।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने किया अंगलिकन गिरजाघर का दौरा

In Church on February 27, 2017 at 4:26 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सोदक): संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 26 फरवरी को, रोम स्थित सब संतों को समर्पित अंगलिकन गिरजाघर का दौरा किया। दौरा में उन्होंने यूरोप में अंगलिकन धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष रोबर्ट इन्नेस के साथ संध्या प्रार्थना में भाग लिया।

संत पापा ने अंगलिकन गिरजाघर में विश्वासियों के सवालों का भी उत्तर दिया। उनके एक सवाल के जवाब में संत पापा ने कहा कि दक्षिण सूडान की यात्रा की तैयारियाँ हो रही है। उन्होंने इस बात की संभवना बतलायी कि इस यात्रा में उनके साथ कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष जस्टिन वेलबे भी शामिल हो सकते हैं।

इस मुलाकात के दौरान संत पापा ने मुक्तिदाता ख्रीस्त की प्रतिमा को आशीष दी।

यह पहली बार है जब संत पापा ने रोम के इस अंगलिकन गिरजाघर का दौरा किया है। यह मुलाकात गिरजाघर की 200वीं वर्षगाँठ समारोह का हिस्सा है।


(Usha Tirkey)

दक्षिणी सूडान में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा की संभावना

In Church on February 27, 2017 at 4:24 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा ने कहा है कि उनके स्टाफ दक्षिणी सूडान की ″यात्रा की संभावना″ पर अध्ययन कर रहे हैं।

उन्होंने इसका कारण बतलाते हुए कहा कि दक्षिण सूडान के अंगलिकन तथा काथलिक धर्माध्यक्षों ने यह कहते हुए वहाँ उन्हें निमंत्रण दिया है, ″कृपया दक्षिण सूडान आइये, कम से कम एक ही दिन के लिए किन्तु अकेला में नहीं, वरन् कैंटरबरी के अंगलिकन महाधर्माध्यक्ष जस्टिन वेलबे के साथ।″

उन्होंने कहा कि हम यह देखने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या यह सम्भव है अथवा क्या वहाँ की परिस्थिति अत्यन्त जोखिम भरा है किन्तु हमें इसे पूरा करना चाहिए क्योंकि तीनों (ख्रीस्तीय समुदाय) शांति की चाह रखते हैं और वे शांति हेतु तीनों मिलकर कार्य कर रहे हैं।″

संत पापा का यह कथन उस समय आया जब वे रोम स्थित अंगलिकन गिरजाघर का दौरा करते हुए विश्वासियों के सवालों का उत्तर दे रहे थे।

उन्होंने नाईजेरिया के एक अंगलिकन गुरूकुल छात्र के सवाल का उत्तर दिया जिन्होंने उनसे दक्षिणी गोलार्ध में कई कलीसियाओं के बारे प्रश्न किया था। उन्होंने कहा कि वे समुदाय युवा हैं अतः अपनी युवावस्था के कारण निश्चय ही उनमें विविधता है।

उन्होंने धन्य संत पापा पौल षष्ठम की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि ″ख्रीस्तीय एकता युवा कलीसियाओं में ही ज्यादा आसान है।″

ख्रीस्तीय एकता पर दूसरे सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि आज काथलिक एवं अंगलिकन कलीसियाओं के बीच संबंध ठीक है हम भाई-भाई की तरह एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं।


(Usha Tirkey)

बैंगलोर महाधर्माध्यक्ष ने कहा प्रथम ‘परिवार परामर्श सेवा’ का उद्घाटन

In Church on February 27, 2017 at 4:23 pm

 

बैंगलोर, सोमवार, 27 फरवरी 2017 (वीआर सेदोक): बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष बेर्नार्ड मोरेस ने कलीसिया द्वारा संचालित प्रथम ‘परिवार परामर्श सेवा’ का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि यह पहल उन काथलिकों के प्रति चिंता के कारण की गयी है जो विवाह की पवित्रता को बहुत कम समझते हैं। महाधर्मप्रांत द्वारा प्रदान की जाने वाली इस सेवा द्वारा परिवारों के पुनःनिर्माण में सहायता दी जायेगी।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा, ″पुरोहिताई हेतु लम्बी अवधि के प्रशिक्षण के बावजूद पुरोहित संकट की स्थिति से गुजरते हैं तथा उन्हें आध्यात्मिक परामर्श की आवश्यकता होती है, तो संकट की स्थिति से गुजर रहे परिवारों को इसकी आवश्यकता कितनी अधिक पड़ सकती है।″

महाधर्मप्रांत के प्रेरितिक केंद्र के पालाना भवन में करीब 20 पेशेवर प्रशिक्षित परामर्शदाताओं ने एक सभा में भाग लिया तथा इस बात पर विचार किया कि संकट से गुजर रहे दम्पतियों को किस तरह सलाह दी जाए एवं उन्हें मेल-मिलाप हेतु मदद दिया जाए।

महाधर्माध्यक्ष मोरेस के अनुसार यह सेवा, भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों की आम सभा का ठोस प्रत्युत्तर है जिसमें पारिवारिक मामलों के समाधान हेतु मदद दिये जाने पर प्रकाश डाला गया था।

2015 में विश्व काथलिक धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में संत पापा ने परिवारों को बिखरने से बचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

उन्होंने कहा कि महाधर्मप्रांत में हमने विवाह के संस्कार की रक्षा की आवश्यकता महसूस की जहाँ समाज में परिवार बदल रहे हैं तथा इसके द्वारा परिवारों का विनाश हो रहा है। परिवार टूटने का सबसे स्पष्ट परिणाम विवाह की शून्यता द्वारा देखने को मिल रहा है जो विवाह के पूर्व की तैयारी में ध्यान नहीं देने के कारण होता है।

महाधर्माध्यक्ष ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि पुरोहित तथा धर्मबहनें भी शादी में यौन जीवन और जीवन कौशल के बारे कलीसिया की सही शिक्षा एवं निर्देश देने से हिचकिचाते हैं।


(Usha Tirkey)

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