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ख्रीस्तीय आशा उम्मीद में जीना है

In Church on February 1, 2017 at 4:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 1 फरवरी 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम के सभागार में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधिथ करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो,

सुप्रभात

हमने विगत दिनों में धर्म शिक्षा माला के दौरान आशा पर बने रहने की यात्रा की शुरुआत करते हुए धर्मग्रंथ के प्रचीन विधान के कुछ अध्यायों पर चिंतन किया था। आज हम नये विधान में येसु ख्रीस्त के पास्का की घटना पर अपना ध्यान क्रेन्दित करते हुए इस आशा के अति विशेष गुण पर अपना चिंतन जारी रखेंगे।

संत पौलुस थेसलनीकियों के नाम अपने पहले पत्र में येसु के पुनरुत्थान की चर्चा करते हैं जहाँ हम प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय की एक नवीन और सुन्दर घोषणा के बारे में सुनते हैं। थेसलनीकियों का समुदाय एक युवा समुदाय था जिसकी स्थापना हाल ही में की गई थी, फिर भी कठिनाइयों और तकलीफों के बावजूद वे अपने विश्वास में अडिग बन रहे और जोश तथा उत्साह के साथ येसु के पुनरुत्थान को अपने जीवन में घोषित किया। प्रेरितों ने अपने हृदय में इस खुशी का अनुभव किया कि वे पास्का में येसु ख्रीस्त के संग ईश्वरीय संतान के रुप में एक नये जीवन की शुरुआत करते हैं।

थेसलनीकियों के नये समुदाय को अपने पत्र में संत पौलुस इस बात से वाकिफ कराते हैं कि येसु के पुनरुत्थान का प्रभाव हम प्रत्येक के जीवन और कार्य में होता है। उस नये समुदाय को विशेषकर येसु के पुनरुत्थान में विश्वास करने में कठिनाई नहीं हुए लेकिन उन्हें मृतकों के पुनरुत्थान पर विश्वास करना मुश्किल लगा और इस दृष्टिकोण से यह प्रेरितिक पत्र अपने में महत्वपूर्ण है। हम अपने जीवन में जब अपने प्रियजनों को खोते हैं तो यह हमारे विश्वास की परीक्षा होती है। हम अपनी कमजोरी और निराशा में अपने आप से यह सवाल करते हैं कि क्या सचमुच में मृत्यु के उपरान्त जीवन है…? मैं अपने प्रियजनों को अभी तक याद करता और उन्हें देखता हूँ…? हम अपने वर्तमान जीवन की परिस्थिति में अपने विश्वास की नींव को मजबूत करें जिससे हम यह अनुभव कर सकें कि पिता ईश्वर ने अपने बेटे येसु ख्रीस्त में हमारे लिए क्या किया है।

संत पौलुस भय और चिंता के विपरीत समुदाय के लोगों को निमंत्रण देते हैं कि वे विशेषकर अपने जीवन के विकट और मुश्किल घड़ी में विश्वास का टोप धारण कर लें जिससे वे आशा में मुक्ति के भागीदार हो सकें। संत पापा ने कहा कि आशा ख्रीस्तीयों हेतु एक टोप के समान है। उन्होंने कहा कि हम अपने जीवन में आशा की चर्चा करते हुए उन बातों से अपने को संयुक्त करते हैं जो जीवन में सुन्दर दिखाई देती हैं लेकिन हम इसे अपने जीवन में बहुधा साक्षात रुप में नहीं देखते पाते हैं। हम आशा करते हैं कि यह हमारे जीवन में पूरी होगी लेकिन यह बहुधा आशा ही रहती है। संत पापा ने मौसम का उदाहरण देते हुए कहा कि हम आने वाला कल एक अच्छे मौसम की आशा करते हैं लेकिन कल का मौसम और भी खराब होता है…। ख्रीस्तीय आशा ऐसी नहीं है। आशा में हम उस चीज की प्रतीक्षा करते हैं जो हमारे लिए पहले ही किया जा चुका है। हमें आशा के उस द्वार तक जाने की जरूरत है। इसके लिए हम क्या करें? हम उस द्वार तक जायें और मैं निश्चित रूप से कहता हूँ कि आप के लिए द्वार खोला जायेगा। ख्रीस्तीय विश्वास उस चीज की आशा करना है जो हमारे लिए पहले ही पूरी की गई है जिसके भागीदार हम सभी होंगे। संत पापा ने कहा कि हमारी आशा हमें इंतजार में जीवन जीने की शिक्षा देती है। यह इंतजार हमें अनंत जीवन की प्राप्ति हेतु एक पाठ पढ़ाती है। एक मातृत्व को प्राप्त करने वाली नारी प्रति दिन अपने नवजात शिशु को देखने की चाह में जीवन जीती है। उसी तरह हमें भी अपने जीवन के इन्हीं अनुभवों से सीख लेते हुए ईश्वर की प्रतीक्षा में जीवन जीना है। यह हमारे लिए सहज नहीं है लेकिन हमें इंतजार में जीने सीखना है। इसका तात्पर्य हमारे लिए यही है कि हम अपने में नम्र और दीन बने रहें। एक गरीब प्रतीक्षा करता है लेकिन एक समृद्ध व्यक्ति अपने को छोड़कर किसी पर विश्वास और भरोसा नहीं रख सकता है।

संत पौलुस लिखते हैं,“ मसीह हमारे लिए मरे, जिससे हम चाहे जीवित हों या मर गये हों, उन से संयुक्त होकर जीवन बितायें।” (1थेस.5,10) ये शब्द हमें लिए शांति और सांत्वना प्रदान करते हैं। यह हमारे प्रियजनों के लिए भी आशा प्रदान करते जो हम से पहले चले गये हैं हम उनके लिए प्रार्थना करें जिससे वे येसु से पूर्णरूपेण संयुक्त होकर हमारे साथ रह सकें। संत पापा ने कहा कि संत पौलुस की एक बात मेरे दिल को छूती है, “इस प्रकार हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।” सभी अच्छी चीज़ें खत्म हों जायेंगी लेकिन मृत्यु के बाद हम येसु के साथ होंगे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें शांति और खुशी की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

 

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