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भारत की काथलिक कलीसिया की प्रेरिताई में परिवार सबसे प्रमुख स्थान पर

In Church on February 9, 2017 at 4:38 pm

भोपाल, बृहस्पतिवार, 9 फरवरी 17 (मैटर्स इंडिया): लातीनी रीति के भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षों ने आठ दिवसीय सम्मेलन के समापन पर, अंतरधार्मिक विवाह, एकल माता, विकलांग बच्चों, पीड़ित और शोक-संतप्त लोगों, प्रवासियों, रोगियों, वयोवृद्धों, किन्नरों और अत्यंत गरीबी में जीवन यापन करने वालों के मुद्दों का समाधान करने के लिए कलीसिया के कार्यों को नई दिशा देने का प्रण लिया।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रही लातीनी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 29वीं सभा 8 फरवरी को समाप्त हुई।

आठ दिवसीय सभा में दो कार्डिनलों समेत 130 धर्माध्यक्षों ने हिस्सा लिया जिन्होंने परिवार की प्रेरिताई पर आधारित संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक प्रबोधन ‘अमोरिस लेतित्सिया’ का प्रत्युत्तर देने का प्रयास किया।

सीसीबीआई का अंतिम वक्तव्य 7 फरवरी को प्रकाशित हुआ था जिसमें कहा गया था कि ″परिवार का कल्याण कलीसिया एवं विश्व के भविष्य के लिए निर्णयात्मक है।″

राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो ने मैटर्स इंडिया से कहा, ″परिवार ही अभी की कलीसिया की प्राथमिकता है। हमें अपने परिवारों की देखभाल हर कीमत पर करनी चाहिए। परिवार ही कलीसिया का आधार है।″

इस बात को ध्यान में रखते हुए धर्माध्यक्षों ने शादी के पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम पर जोर दिया ताकि विवाह की तैयारी करने वाले लड़के-लड़कियों को परिवार एवं विवाह के महत्व को समझने में मदद मिल सके।

वक्तव्य में कहा गया था कि कलीसिया युवाओं की मदद करना चाहती है ताकि वे पुरोहिताई एवं धर्मसंघीय जीवन हेतु बुलाहट को कम किये बिना, विवाह की गरिमा एवं उसकी सुन्दरता को पहचान सकें।″

मेरठ के धर्माध्यक्ष फ्राँसिस कालिस्ट ने कलीसिया के धर्मगुरूओं को एकजुट होकर काम करते हुए अपनी प्रेरिताई द्वारा परिवार को मजबूत बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, ″अब समय बदल चुका है पल्लियों में कार्यरत पुरोहितों एवं धर्मबहनों को चाहिए कि वे परिवारों की नियमित भेंट करें तथा उनके दुःख और सुख को परिवार के एक सदस्य की तरह बांटें।″

सीसीबीआई के अंतिम वक्तव्य में यह भी कहा गया कि ″कलीसिया उन लोगों तक पहुँचने का प्रयास करें जो कई कारणों से अपने को कलीसिया से बहिष्कृत महसूस करते हैं।″ बतलाया गया कि संत पापा के उन शब्दों को अपने मन में रखा जाए जिसमें उन्होंने कहा है कि आज हमारी प्रेरिताई में सबसे आवश्यक है कि हम उन लोगों की चिंता करें जिनका वैवाहिक संबंध टूट चुका है। सभी कलीसिया के ममतामय प्रेम का अनुभव कर सकें मानो कि वे करुणावान पिता द्वारा आलिंगन किये जा रहे हों जिनसे कोई भी बहिष्कृत नहीं है।

धर्माध्यक्षों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत के पारिवारिक जीवन को नवीकृत करने के लिए पुरोहितों, धर्मबहनों, प्रचारकों तथा प्रेरिताई कार्यों में संलग्न लोगों के बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है ताकि वे परिवार के मामलों को समझ सकें एवं वक्त पर उनकी मदद कर सकें। उन्होंने किन्नरों एवं विकलांगों के लिए भी पर्याप्त प्रेरितिक देखभाल किये जाने एवं उनके प्रति सम्मान की भावना रखने की इच्छा व्यक्त की।


(Usha Tirkey)

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