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साहस, प्रार्थना और विनम्रता के साथ सुसमाचार का प्रचार करें, संत पापा

In Church on February 15, 2017 at 4:03 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 15 फरवरी 2017 (सेदोक) : ″साहस, प्रार्थना, और विनम्रता ये तीन तत्व उन बड़े संदेशवाहकों की पहचान है जिन्होंने दुनिया में कलीसिया के विस्तार में अपना योगदान दिया है।″  उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थालय में मंगलवार 14 फरवरी को प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग समारोह के दौरान यूरोप के संरक्षक संत मेथोदियुस और संत सिरिल का उदाहरण देते हुए कहा।

संत पापा ने कहा, आज लोगों के बीच ईश्वर के वचन को बोने के लिए संत मेथोदियुस और संत सिरिल जैसे सच्चे संदेशवाहक मिशनरियों की जरुरत है। यूरोप के संरक्षक ईश्वर का साक्ष्य देने वाले निडर भाइयों ने यूरोप को विश्वास में मजबूत बनाया था।

संत पापा फ्राँसिस ने पहले पाठ पर चिंतन करते हुए संत पौलुस और बारनाबास के चरित्र की ओर विश्वासियों का पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा सुसमाचार प्रचारकों की पहली विशेषता होनी चाहिए ″ स्पस्टता ″ इसके तहत “शक्ति और साहस” भी शामिल हैं।

ईश्वर के वचन को एक प्रस्ताव के रूप में नहीं दिया जा सकता है जैसे यदि तुम चाहते हो तो कर सकते हो … या ईश्वर का वचन एक अच्छा दार्शनिक या नैतिक विचार नहीं है जिसे तुम जैसा चाहो जी सकते हो…ईश्वर के वचन को स्पष्टता के साथ प्रस्तावित किए जाने की जरूरत है जैसा कि संत पौलुस कहते हैं ईश्वर के वचन को पूरी शक्ति के साथ देना चाहिए जिससे कि वह हड्डी के अंदर तक प्रवेश कर जाये। ईश्वर के वचन को पूरी स्पस्टता, पूरी शक्ति और साहस को साथ प्रचार करना चाहिए। येसु से जब हम प्रेम में बंधे रहते हैं तो हमारे दिल में सुसमाचार प्रचार करने के लिए साहस मिलता है। इसी साहस के साथ हम लोगों को ईश्वर के निकट लाने में सक्षम होते हैं।

प्रार्थना के बिना ईश्वर का वचन एक सम्मेलन बन जाता है

संत पापा ने कहा ईश्वर के संदेशवाहक की दूसरी विशेषता है प्रार्थना। येसु कहते हैं, ″ फसल तो बहुत है पर बनिहार कम। अतः फसल के मालिक से प्रार्थना करो कि वे और बनिहारों को भेजे।″ ईश्वर के वचन को हमेशा प्रार्थना के साथ प्रचार करना चाहिए। प्रार्थना के बिना ईश्वर का वचन अच्छी शिक्षा या सम्मेलन मात्र बनकर रह जाएगी। प्रार्थनामय दिल से निकले वचन रुपी बीज को बोने में प्रभु हमारा साथ देते हैं और वे ही बीज को अंकुरित होने के लिए उपयुक्त परिस्थिति प्रदान करते हैं।

एक सच्चा संदेशवाहक विनम्र होता है। येसु ने अपने चेलों को भेड़ियों के बीच मेमनों के समान भेजा।

एक सच्चा संदेशवाहक वह है जो जानता है कि वह कमजोर है और वह जानता है कि वह खुद का बचाव नहीं कर सकता है पर प्रभु स्वयं उसका बचाव करेंगे। संत पापा ने संत क्रिसोस्तम के विचारों को पेश करते हुए कहा कि यदि आप मेमने के समान नहीं, पर भेड़ियों के समान भेड़ियों के पास जाएंगे तो आपको स्वयं अपना बचाव करना होगा। उसे दूसरों की मदद की कोई जरुरत नहीं। जब एक संदेशवाहक यह समझता हैं कि वह बहुत होशियार है और ईश्वर के वचन को आगे ले जाने में अपनी बुद्धिमता पर घमंड करता हैं और वह उसे विनाश की ओर ले जाती है। संत पापा ने कहा कि संदेशवाहकों को सरल और विनम्र हृदयवाला होना चाहिए।

संत पापा ने प्रवचन के अंत में संत मेथोदियुस और संत सिरिल की मध्यस्ता से उनके समान साहसी, प्रार्थना करने वाले एवं विनम्रता के साथ ईश्वर के वचन के संदेशवाहक बनने की कृपा की याचना की।


(Margaret Sumita Minj)

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