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हम ईश्वरीय वरदानों पर घमंड करें

In Church on February 15, 2017 at 4:27 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार,15 फरवरी 2017 (सेदोक) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम् सभागार में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को आशा में बने रहने की धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो,

सुप्रभात

अपने बचपन के दिनों में हमने इस बात को सीखी है कि हमें घमंड नहीं करना चाहिए। यह हमारे लिए उचित है क्योंकि जब हम अपने जीवन में अहम के भाव रखते तो हम उन लोगों की अवहेलना करते हैं जो हमसे कम भाग्यशाली हैं। संत पौलुस का रोमियों के नाम लिखित पत्र हमें आश्चर्यचकित करता है क्योंकि यह हमें घमंड करने को निर्देशित करता है। अतः हम किन बातों पर घमंड करें? हम कैसे बिना किसी को चोट पहुँचाये अपने में घमंड कर सकते हैं?

संत पापा ने कहा कि संत पौलुस हमें अपने विश्वास में ईश्वर से मिले गये सभी कृपादानों पर घमंड करने को कहते हैं। वे हमें इस तथ्य को समझने में मदद करते हैं कि यदि हम अपने जीवन की सारी चीजों को पवित्र आत्मा की नज़रों से देखें तो सारी चीज़ें हमें ईश्वर से मिले वरदान हैं।  संत पापा ने कहा कि यदि हम अपने जीवन के इतिहास को देखें तो हम इसमें ईश्वर को सर्वेसर्वा पाते हैं। वे हमारे जीवन में मुख्य नायक के समान हैं जो अपने प्रेम में हमें जीवन के उपहारों से भर देते हैं। हमें उन सारी चीजों को अपने जीवन में देखने और पहचाने की आवश्यकता है जिसे हम उन्हें खुशी पूर्वक स्वीकार करते हुए ईश्वर की महिमा और स्तुति कर सकें। जब हम ऐसा करते हैं तो हम ईश्वर में शांति और अपने जीवन में स्वतंत्रता का अनुभव करते हैं। यह शांति हमारे द्वारा हमारे इर्दगिर्द रहने वालों के बीच प्रसारित होती है। हम अपने परिवार, संगे-संबंधियों, समुदाय, कार्य स्थल तथा अपने रोज दिन के जीवन में लोगों से मिलते हुए शांति का अनुभव करते हैं।

संत पापा ने कहा लेकिन संत पौलुस हमें अपने दुःख तकलीफों पर भी घमंड करने को कहते हैं परन्तु यह हमारे लिए कठिन लगता है। वास्तव में जो शांति हमें ईश्वर देते हैं वो हमारे जीवन में चिंताओं, निराशा, असफलताओं की अनुपस्थिति नहीं है, यदि ऐसा होता तो यह तुरंत खत्म हो जाती और हम पुनः तुरन्त ही दुःख तकलीफों के शिकार हो जाते। इसके विपरीत यह हमारे लिए ईश्वर के प्रेम की अनुभूति है जो हमारे जीवन में धैर्य उत्पन्न करती क्योंकि हम जानते हैं कि जीवन की कठिन और आश्चर्यजनक परिस्थितियों में भी ईश्वर की अच्छाई और करुणा का अनुभव हम अपने जीवन में करते जो हमें इस बात से रूबरू करती है कि ईश्वर से हमें कोई भी अलग नहीं कर सकता है।

संत पापा ने कहा कि यही कारण है कि ख्रीस्तीय आशा मजबूत है जो हमें हताश होने नहीं देती है। ईश्वर हमें कभी निराश नहीं करते हैं। वे हमें हताशा होने नहीं देते हैं। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम अपने जीवन में क्या कर सकते हैं और क्या नहीं। ख्रीस्तीय आशा का आधार हमारे लिए ईश्वर का प्रेम है। उन्होंने कहा कि यह कहना हमारे लिए सहज लगता है कि ईश्वर हमें प्रेम करते हैं लेकिन क्या हम सब के सब निश्चित रुप से यह कह सकते हैं कि ईश्वर मुझे प्रेम करते हैं? यह हमारी सुरक्षा, हमारी आशा का मूलभूत आधार है। ईश्वर ने प्रचुर मात्रा में हम पर पवित्र आत्मा की वर्षा की है जो शिल्पकार के रुप में हम सबों के जीवन में आशा और विश्वास को सजीव बनाये रखते हैं। अतः हम अपने में कितने भी खराब क्यों न हों, हमने कितने ही बुरी चीज़ें क्यों न कीं हों, ईश्वर हमें प्रेम करते हैं। हमें इस प्रार्थना को अपने जीवन में निरंतर दुहराने की जरूरत है कि ईश्वर हमें प्रेम करते हैं। वे मुझे निश्चित रुप से प्रेम करते हैं।

संत पापा ने कहा कि इस तरह हम इस तथ्य को समझते हैं कि क्यों संत पौलुस हमें घमंड करने को कहते हैं। हम ईश्वर पर घमंड करते हैं क्योंकि वे हमें प्रेम करते हैं। जो आशा हमें मिली है वह हमें ईश्वर और दूसरों से अलग होने नहीं देती है। यह हमारे लिए ईश्वर की ओर से दिया गया एक विशेष वरदान है जिसके द्वारा हम अपनी नम्रता और सरलता में दूसरों के लिए एक ईश्वरीय उपहार बनते हैं। हमारे लिए सबसे बड़ा घमंड का कारण ईश्वर पिता हैं जो किसी के साथ पक्षपात नहीं करते और न ही किसी का परित्याग करते हैं। वे अपना द्वार सबों के लिए खोलते जिससे ईश्वर की संतान के रुप में हम एक दूसरे को सांत्वना प्रदान कर सकें। संत पापा ने कहा कि हम यह कभी न भूले की आशा हमें कभी निराशा नहीं करती है।
इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें आशा में बने रहने की शुभकामनाएँ देते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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