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रोमा विश्वविद्यालय त्रे को संत पापा फ्राँसिस का संदेश

In Church on February 17, 2017 at 4:26 pm

 

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 17 फरवरी 2017 (सेदोक) संत पापा फ्रांसिस रोमा विश्वविद्यालय त्रे की भेंट करते हुए विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को अपना संदेश दिया।

अपने संबोधन के प्रारम्भ में उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा दिये गये निमंत्रण हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि हमारा समाज अच्छाई से भरा हुआ है। यह आपके जीवन के द्वारा परीलक्षित होता है क्योंकि विद्याअर्जन के दौरान भी आप कई जरूरमंदों की सहायता हेतु पहल करते हैं जो यह हमारे लिए गौरव की बात है। आज विश्व में शत्रुता और हिंसा की निशानी भरी हुई हैं। हम दुनिया में युद्ध की स्थिति में जीने को बाध्य हैं जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को नष्ट करती जान पड़ती है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्यों अन्तराष्ट्रीय संगठन और समुदाय इन युद्दों के रोक पाने में असमर्थ हैं? इसका कारण यही है कि देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि जनसामान्य लोगों के बीच शांति स्थापना से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ये सारे सवाल हमारे शिक्षण के अंग हैं जो हमारे मन-दिल में गूँजते हैं। संत पापा ने कहा कि शिक्षण संस्थान हमारे अंतरात्मा को निर्माण करने का समय है जहाँ हम जीवन में अच्छाइयों का चुनाव करने हेतु सीखते हैं।

उन्होंने कहा कि आप युवा अपने जीवन से हताश न हो बल्कि आशा में बने रहें क्योंकि यदि हमारे जीवन में आशा नहीं है तो हम जीवन को खोने लगते हैं और बहुधा अपने जीवन से भटक जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में हम क्षणिक खुशी की कामना करते और बुरी चीजों को अपना लेते हैं। बम शरीर का विनाश करता तो दूसरी ओर बुरी लत हमारे मन-दिल और शरीर को मार डाली है।
विश्वविद्यालय के एक छात्रा निकोलस के सवालों का जवाब देते हुए संत पापा ने कहा कि आज हमें अपने को सामान्य घर का एक अंग महसूस करने की जरूरत है। आज दुनिया में बहुत सारी कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ हैं जब हम उनका सामना करते और अन्यों की सहायता करते तो हम समाज के लिए नायकों जैसे बन जाते हैं और इस प्रकार हम दुनिया में हो रहे विध्वंस को रोकने में अपना हाथ बांटते हैं। यह आशा और विश्वास में बने रहने के द्वारा ही संभव होता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के रुप में आज हमें चुनौतियों के बारे में जानने, उन पर चिंतन और बिना डर तथा पूर्वाग्रह से अपने लिए आत्मा परीक्षण करने की जरूरत है। परिवर्तन कठिन और तकलीफ दायक होती है लेकिन यह एक नये क्षितिज को जन्म देती है। परिवर्तन हमें अर्थव्यवस्था के रूप, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केन्द्रीय विचारों की खोज करने का निमंत्रण देती है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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